बोध कथा २४ : सब ठीक है ? *********************************** बहुत पुरानी बात है. उत्तरी भारत के एक गुरुकुल में निरंजन नामक ऋषि रहते थे. उनके आश्रम में पूरे भारत से विद्यार्थी शिक्षा लेने के लिए आते थे.उन्हें अपने सभी शिष्य प्रिय थे,लेकिन शशांक पर उनका विशेष स्नेह था.वे शशांक पर ही सबसे अधिक भरोसा भी करते थे. एक बार क़ि बात है,निरंजन ऋषि किसी काम से एक लम्बी यात्रा के लिए निकले.उनके साथ कई शिष्य भी थे.सभी के हाँथ में कोई ना कोई वस्तु थी.शिष्यों में शशांक भी था. उसके हाँथ में एक थैला देते हुए निरंजन ऋषि बोले,'' बेटा,इसमें बहुत ही मूल्यवान आभूषण हैं.इसे संभाल कर ले चलना .'' ...
हिन्दी साहित्य, भाषा-विज्ञान, समाज-विज्ञान, भारतीय संस्कृति और सिनेमा पर प्रामाणिक शोधपरक आलेख। संपादक: डॉ. मनीष कुमार मिश्रा।