अरुणोदित किरणे सहमी सी मुस्कान लिए ,
मद्धिम हवा के झोंके इक अनोखी शान लिए ,
पत्तों पे ओस की बुँदे एक सुनहरा भान लिए ,
पक्षी के कलरव भौरों की गूंज महकी धरती संज्ञान लिए ,
एक सहज सी शांति थी फैली इश्वर है कण कण में ज्ञान लिए ,
चीत्कारा जंगल गाडिओं की आवाजें भोपूं के सीत्कार लिए ,
सन्नाटा फैला नीरवता छाई स्तब्ध शमा आक्रांत लिए ,
अरुणोदित किरणे सहमी सी मुस्कान लिए ,
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Saturday, 30 October 2010
अरुणोदित किरणे सहमी सी मुस्कान लिए ,
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hindi kaviya,
shanti
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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