हर राज दिल के खोलती है ,तेरी तस्वीर कितना बोलती है ।
लहराती हुई खुली जुल्फों से ,
तू पास दिल को खीच लेती है ।
मुस्कुराते लबों से अपने ,
तू बातों में शहद घोल देती है ।
हर राज दिल के खोलती है ,रिश्तों की भाषा और अनुवाद की सांस्कृतिक चुनौती नीलूफ़र ख़ोदजाएवा के ‘Semantics of Kinship Terms as a Form of Address in Uzbek Translations...
Beautiful photo..
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