मोहब्बत की जुदाई में भी एक सुकूँ है दिले दिलदार से पूंछो ,
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मोहब्बत की तड़पन में छुपा इक जुनूं है किसी आफताब से पूँछों ;
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चाहते तमन्ना में उम्र गुजर जाये भी तो कम है ,
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इन्तजारे इश्क भी एक खुदाई है अपने प्यार से पूँछों /
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हिन्दी साहित्य, भाषा-विज्ञान, समाज-विज्ञान, भारतीय संस्कृति और सिनेमा पर प्रामाणिक शोधपरक आलेख। संपादक: डॉ. मनीष कुमार मिश्रा।
मोहब्बत की जुदाई में भी एक सुकूँ है दिले दिलदार से पूंछो ,
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मोहब्बत की तड़पन में छुपा इक जुनूं है किसी आफताब से पूँछों ;
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चाहते तमन्ना में उम्र गुजर जाये भी तो कम है ,
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इन्तजारे इश्क भी एक खुदाई है अपने प्यार से पूँछों /
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