
तू प्रेम नयन मे जैसे अंजन ,
तू चाहत का प्रेमी खंजन ।
लक्ष्य अलक्षित इस जीवन का ,
तू ही मेरे बना प्रिये ।
अभिलाषा

जाने क्यों तुझे मैंने फिर पुकारा नहीं, मुश्किल ये कि तेरे बिन गुज़ारा नहीं। सफ़र लंबा है अभी बड़ी दूर जाना है अब किसे आवाज़ दूँ कोई सहारा न...
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