
तू प्रेम नयन मे जैसे अंजन ,
तू चाहत का प्रेमी खंजन ।
लक्ष्य अलक्षित इस जीवन का ,
तू ही मेरे बना प्रिये ।
अभिलाषा

1. भूमिका : स्वच्छंदतावाद की संकल्पना स्वच्छंदतावाद (Romanticism) अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में विकसित एक सशक्त साहित्यिक, कलात्मक और...
No comments:
Post a Comment
Share Your Views on this..