
बीच जवानी बचपन में,
हम दोनों फ़िर जो जा पाते ।
तो गुड्डे -गुडियों के जैसे,
रचा ब्याह हम लेते प्रिये ।
---------------------------------अभिलाषा
फोटो लिंक ----------

हम दोनों फ़िर जो जा पाते ।
तो गुड्डे -गुडियों के जैसे,
रचा ब्याह हम लेते प्रिये ।
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हिं दी के पक्ष में जिस भावुकता के साथ तर्क रखे जाते हैं उन्होंने हिंदी का कोई भला नहीं किया अपितु नुकसान ही अधिक हुआ । हिंदी की ...
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