
बीच जवानी बचपन में,
हम दोनों फ़िर जो जा पाते ।
तो गुड्डे -गुडियों के जैसे,
रचा ब्याह हम लेते प्रिये ।
---------------------------------अभिलाषा
फोटो लिंक ----------

हम दोनों फ़िर जो जा पाते ।
तो गुड्डे -गुडियों के जैसे,
रचा ब्याह हम लेते प्रिये ।
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प्रेम और संवेदना के जैविक कवि : मनीष डॉ. चमन लाल शर्मा प्रोफेसर ' हिन्दी ' शासकीय कला एवं विज्ञान स्नातकोत्तर महावि...
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