Monday, 15 June 2009

वो आए शहर में ,

वो आए शहर में ,
हमें अनजान रख के चल दिए ;
समझते हैं हाले दिल तेरा ए हँसी ,
किसके साथ आए औ क्यूँकर चल दिए ;
आदतें जाती नही है ,
राहें बदल जाती हैं ;
बदन पिघलाते थे ,
दिल सुलगा के चल दिए /
वो शहर में आए ,
हमें अनजान रख के चल दिए /

No comments:

Post a Comment

Share Your Views on this..

सब दोस्त यार दिलवाले रखना / ग़ज़ल/ डॉ मनीष कुमार मिश्रा

  सब दोस्त यार दिलवाले रखना सुख-दुःख उन्हें संभाले रखना। जीवन का क्या, पल दो पल है उसकी यादों के उजाले रखना। आएगी एक दिन सच है लेकिन  तू हँस...