Thursday, 4 June 2009

जब-जब सावन बरसता है -------------------------------------

जब -जब सावन बरसता होगा
मेरा यार कितना तरसता होगा ।

छत पर अकेले हर शाम को ,
वह न जाने क्या-क्या सोचता होगा ।

सब पूछेंगे उदासी का सबब उससे,
मगर वह कुछ नही कहता होगा ।

बहुत ही उदास होता होगा वह ,
जब रात अकेले मे चाँद देखता होगा ।

चंदन सा शीतल बदन उसका यारों ,
sardiyon ki raat mae jaltaa hoga .

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