Sunday, 14 June 2009

वह प्यार को ----------------------

वह प्यार को नया मोड़ देता है ,
रुमाल अपना मेरे पास छोड़ देता है ।

जात-पात ऊँच-नीच की गागर को ,
अक्सर कोई कन्हाई फोड़ देता है ।

हर एक नई मुलाकात के साथ ,
वह नया रिश्ता जोड़ देता है ।

तेवर बगावती हैं इसके बडे ,
मोहबत्त हर रिवाज को तोड़ देता है ।

1 comment:

  1. BEAUTIFUL THOUGHTS.....THANKS FOR VISITING MY BLOG.REGARDS
    KAVITA

    ReplyDelete

Share Your Views on this..

स्वच्छंदतावाद की संकल्पना

  1. भूमिका : स्वच्छंदतावाद की संकल्पना स्वच्छंदतावाद (Romanticism) अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में विकसित एक सशक्त साहित्यिक, कलात्मक और...