Sunday, 14 May 2023

खेल तो सारा मुकद्दर का होगा

खेल तो सारा मुकद्दर का होगा 

डूबता जहाज बवंडर का होगा ।


ईमान से लड़ेंगे पोरस कई पर

इतिहास में बड़ा सिकंदर होगा ।


वही तो रहेगा हर हाल में खुश 

जो खयाल से मस्त कलंदर होगा ।


अपने दिल में थोड़ी जगह दे दो

अब वहीं पर इश्क का लंगर होगा ।


तरसता रहा मीठे पानी के लिए

जिसके आगे खारा समंदर होगा ।


गैरत थी तो अकेले ही रह गया

तेरे इशारों पर नाचता बंदर होगा ।


योग्यताएं इंतज़ार में ही रहेंगी

सिफारिश वाला कोई अंदर होगा । 


डॉ मनीष कुमार मिश्रा

कल्याण पश्चिम

महाराष्ट्र ।

No comments:

Post a Comment

Share Your Views on this..

स्वच्छंदतावाद : मनुष्य की मुक्ति, कल्पना और संवेदना का साहित्यिक स्वप्न डॉ. मनीष कुमार मिश्रा

  स्वच्छंदतावाद : मनुष्य की मुक्ति, कल्पना और संवेदना का साहित्यिक स्वप्न डॉ. मनीष कुमार मिश्रा असोसिएट प्रोफेसर, हिन्दी विभाग के. एम. अग्रव...

Popular Posts