Friday, 5 February 2010

खांसता बुडापा कांपता शरीर ,

खांसता बुडापा कांपता शरीर ,
इस जर्जर तन में उर्जा अंतहीन ,
लालशाओं में बहुधा जवानी कौंधती ,
अनायास ही माया रगों में रौन्धती ,
वर्षों का अनुभव उम्र को तकती ,
पोते की आवाज सहजता आती ,
बेटा उलझा बीबी के ताने बाने में ,
अपने ही अरमानो में ,
बहु सुशील पर उसे,
सिर्फ अपने बच्चे की जिम्मेदारी कबूल है ,
पत्नी खो चुका वर्षों पहले ,
वो चन्द अच्छे शब्दों औ आत्मीयता की मजबूर है ,
जीवन की ललक खो गयी ,
पोते के अंगुली पकड़ते ही हिम्मत बाजुओं में भर आई ,

No comments:

Post a Comment

Share Your Views on this..

जनवरी से दिसंबर 2026 महत्वपूर्ण राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय दिवस

  जनवरी से दिसंबर 2026 महत्वपूर्ण राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय दिवस प्रत्येक दिवस का विस्तृत परिचय, महत्व और शैक्षणिक उपयोग भूमिका: यह वार्षि...

Popular Posts