Friday, 12 February 2010

उससे क्यों ये हाल छुपायें ?

इस दुनिया की हम क्यों माने?
गुनाह इश्क को क्यों जाने ?  

 दिल की बातो को आखिर ,
 क्यों कर सब से हम छुपायें ?

अपनी मर्जी से अपना  जीवन ,
 बोलो क्यों ना जी पायें ?

लगी लगी है दिलमे जो ,
 आखिर उसको क्यों न बुझाएँ ?

 जिसको प्यार किया है मैंने ,
उससे क्यों ये हाल छुपायें ?
  

1 comment:

Share Your Views on this..

अमरकांत जन्मशती पर के एम अग्रवाल महाविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न ।

अमरकांत जन्मशती पर   के एम अग्रवाल महाविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न ।   कल्याण (पश्चिम) स्थित के. एम. अग्रवाल महाविद्...