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ढरकता पल्लू आखों में नाज था , बड़ी मासूमियत से उसने पूछा हाल था ;
उछल पड़ी धड़कन ,सांसे बहक गयी ;मरने नहीं दिया अब जीना मुहाल था /
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Wednesday, 24 March 2010
ढरकता पल्लू आखों में नाज था /
Labels:
हाल -चाल,
हिंदी शायरी
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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The BJP and the Congress are locked in a fierce political row over a viral video from the 80th Independence Day celebrations at the AICC
The BJP and the Congress are locked in a fierce political row over a viral video from the 80th Independence Day celebrations at the AICC ...
मरके भी क्या कर लेंगे.....
ReplyDeleteजब पता है कि जिन्दा कर लेगा कोई.