Monday, 7 September 2009

हिन्दी की दुर्दशा

हिन्दी की हालत आज हम बहुत सतोषजनक नही कह सकते। english की तुलना में हिन्दी को अभी लम्बी लडाई लड़नी है । बाज़ार के साथ हिन्दी आज जुड़ चुकी है ,यह अच्छी बात है लेकिन अभी और प्रयास की जरूरत है । वैसे इस बारे में आप क्या सोचते हैं ?

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