Friday, 13 August 2010

पर अभी जिन्दा ये शहर है /

उदासी क्यूँ हैं बदहवासी क्यूँ है
खोया पूरा परिवार तुने सच है
पर अभी जिन्दा ये शहर है 

भोपाल क्या भुला है तू 
कोशी को क्या सोचा है तू 
वर्षों गुजरते रहते है 
नेतागिरी बड़ती रहती है 
कभी बहस कभी माफ़ी मिलती रहती है 
उदासी क्यूँ हैं बदहवासी क्यूँ है

खोया पूरा परिवार तुने सच है
पर अभी जिन्दा ये शहर है

कश्मीरी पंडितों का भविष्य
लातूर का भूकंप में जनहित
दिल्ली ले दंगों का सच 
गुजरात के कत्लों का सच 
नेताओं के काले पैसों का सच 
देश के भूखे नंगों का सच 
 देख रहा तू वर्षों से
इंसाफ जारी है
प्रयास जारी है
देश के श्रेष्ठतम नेता अफसर जुटे है
दिन महीने या दशक  हो गुजरे
प्रयास जारी है
पत्रकारों टी.वी न्यूज़ चैनल वालों की टी.आर.पी चालू है
देश की महानता नेताओं की दूरदर्शिता चालू है 
फिर उदासी क्यूँ हैं बदहवासी क्यूँ है

खोया पूरा परिवार तुने सच है
पर अभी जिन्दा ये शहर है /



No comments:

Post a Comment

Share Your Views on this..

भारतीय नारीवाद की अवधारणा: इतिहास, सामाजिक संरचना और समकालीन संदर्भ

  भारतीय नारीवाद की अवधारणा: इतिहास, सामाजिक संरचना और समकालीन संदर्भ Concept of Indian Feminism: History, Social Structure and Contemporary...

Popular Posts