Wednesday, 5 May 2010

गुजरे वक़्त का साथ कैसा ,

पुरानी बातों से उदास ना होना ,
बीते लम्हों के हमखास ना होना ;
यादें गर तुझे तड़पायें भी ,
पुराने सपनों के साथ ना होना ;
.
गुजरे वक़्त का साथ कैसा ,
गया वक़्त आज कैसा ;
भाव तो करेंगे अपनी कारागिरी ;
जों बदल गया फिर उसका साथ कैसा /

No comments:

Post a Comment

Share Your Views on this..

वैदिक ज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भविष्य की तकनीकें सतत विश्व-विकास के लिए भारतीय ज्ञान-प्रणाली का समन्वित मॉडल डॉ. मनीष कुमार सी. मिश्रा

  वैदिक ज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भविष्य की तकनीकें सतत विश्व-विकास के लिए भारतीय ज्ञान-प्रणाली का समन्वित मॉडल डॉ. मनीष कुमार सी. मिश्र...

Popular Posts