Tuesday, 7 May 2013

आवारगी 4


            यह दिल, यह दिल ही बड़ा नादान है
            नहीं तो जीना,सिर्फ़ जीना,बड़ा आसान है

            तेरी यादें, तेरी बातें, और ये रातों की तनहाई
            कुछ और नहीं, सब ग़ज़ल का सामान है

            वो जो मुंतजिर है मोहब्बत की राहों का
            वो मासूम तो, अपने अंजाम से अंजान है

            मेरे सीने में धड़कता दिल, उकसाता है मुझे
            है अजीज़ मुझको, पर बड़ा ही शैतान है     

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