Sunday, 19 May 2013

आवारगी -09


             







            




             थोड़ी सी जिस्मानी , थोड़ी रूहानी है
             मोहब्बत थोड़ी भोली, थोड़ी सयानी है


             थी हक़ीक़त मगर मैं कहता रहा
             यह झूठ है सब, झूठी पूरी कहानी है


             अब भी याद है मुझे वो लड़की
             जिसकी फ़ोटो मेरे पास है, पर पुरानी है

            
             सुना है कि वो इसी शहर में हैं
             मगर अब ये उम्र,  नही नादानी की है       
            
                  

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