Thursday, 11 April 2019

16. अपनी अनुपस्थिति से

अपनी अनुपस्थिति से 
उपस्थित रहा 
तुम्हारे ज़श्न में 
और तुम्हें
लज्जित होने से 
बचा पाया ।

अपने मौन से 
भेज पाया
अपनी  शुभकामनाएं 
तुम्हारे लिए
प्रेम के कुछ अक्षत 
तुम्हारी ज़िद्द को 
बिना तोड़े ।

इसतरह 
मिलता रहता हूँ 
बिना मिले 
कई सालों से 
और 
निभाता हूँ 
कभी तुमसे 
किया हुआ वादा ।

.................................... Dr Manishkumar C. Mishra 

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