Friday, 2 October 2009

शुन्यता है खालीपन है और है अभाव आनंद का ;

शुन्यता है खालीपन है और है अभाव आनंद का ;
नही रहता मन प्यासा किसी प्यार का ;
नही तड़पता तन तेरे अभाव पे ;
हर्षित नही है ह्रदय तेरे जिक्र पे ;
द्रवित नही है दिल तेरे कुफ्र पे ;
शुन्यता है खालीपन है और है अभाव आनंद का ;
जिंदगी इक सहजता बन गई है अब तो ;
इक रस्मो रिवाज की कवायद रह गई है अब तो ;
उस्फुर्ती नही रही तुझसे मिलने की ;
प्यार रहा गया है इक सजावट अब तो ;
शुन्यता है खालीपन है और है अभाव आनंद का ;
तेरे ना मिलने की बात से उदासी नही है ;
तेरी मोहब्बत और चाहतों से बानगी नही है ;
जिंदगी जा रही है इक रह पे जैसे भी ;
उन राहों में दिलचस्पी और दुराव नही है ;
शुन्यता है खालीपन है और है अभाव आनंद का ;
गम नही है , तकलीफ नही है ,वक्त से रंजिश भी नही है ;
मोहब्बत नही , इश्क नही और कोई कशिश भी नही है ;
शुन्यता है खालीपन है और है अभाव आनंद का ;
पास नही है तू दूर नही है ;
आभास तो है अहसास नही है ;
सुलझी नही पर वो उलझी नही है ;
तू गैर तो बन न पाई पर मेरी भी नही है ;
विस्वास तो है पर आस नही है ;
तू बाँहों में है उनके पर उसमे खोयी भी नही है ;
शुन्यता है खालीपन है और है अभाव आनंद का ;

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