Saturday, 25 July 2009

अनेक यादें बिखरी हुई हैं

अनेक यादें बिखरी हुई हैं ;

कितनी ही बातें उलझी हुई हैं ;

खुबसूरत वाकयों का हिसाब क्या करें ;

सब तेरी बेतकल्लुफी में सिमटी हुई हैं /

----------------------------------

मोहब्बत और तनहाई से कैसे रूठें ;

अपनो की जुदाई से कैसे रूठें ;

ईश्वर की खुदाई पे कैसे रूठें ;

जीने को कुछ खुशियाँ ,

खुशियों को कुछ भावः लगते हैं ;Italic

मेरी जिंदगी मेरे प्यार ,

तेरी मोहब्बत और बेवफाई पे कैसे रूठें ?

No comments:

Post a Comment

Share Your Views on this..

अमरकांत जन्मशती पर के एम अग्रवाल महाविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न ।

अमरकांत जन्मशती पर   के एम अग्रवाल महाविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न ।   कल्याण (पश्चिम) स्थित के. एम. अग्रवाल महाविद्...