Sunday, 10 March 2024

रात चांद को देखा तो

 रात चांद को देखा तो कोई याद आ गया 

मेरी यादों में फिर से मेरा वो चांद आ गया।


कहना था लेकिन जो भूल गया तेरे सामने

वो सब तो तेरे जाने के बाद याद आ गया।


इश्क है तुझसे तो फिर कोई तगाफुल कैसा 

यही सोच लेकर तेरे आगे फरियाद आ गया।


तेरे बाद मैं होता भी कुछ और तो कैसे होता

तेरी मोहब्बत में देखो होकर बर्बाद आ गया।


बेड़ियां तो बहुत सी थी जमाने भर की लेकिन

तेरे खातिर ही होकर सब से आज़ाद आ गया।

Dr ManishKumar Mishra

Tashkent, Uzbekistan 





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