वह क्या है हरा-हरा-सा जिसके आगे
हैं उलझ गए जीने के सारे धागे
-----केदारनाथ सिंह
भारतीय ज्ञान परंपरा में गाली का स्वरूप और महत्व भाषा, लोक-संस्कृति, साहित्य और सामाजिक मनोविज्ञान के संदर्भ में एक अध्ययन डॉ. मनीष कुमार स...
No comments:
Post a Comment
Share Your Views on this..