Tuesday, 14 June 2011

अभिलाषा 2012

राहें चिकनी जब भी मिलीं ,
तभी-तभी मैं फिसल गया . 
लेकिन इस फिसलन में भी ,
 लुफ्त बड़ा था गजब प्रिये . 


                                     अभिलाषा *
        

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