Monday, 9 March 2009

निरर्थक परीक्षा प्रणाली

इस साल पहली बार मुंबई बोर्ड के १२ कक्षा के प्रश्न पत्र जांचने के लिये मिले ,वो भी पूरे २५० । साथ ही साथ यह आदेश भी मिला की मै जल्द से जल्द उन्हे मोडरेटर के पास भिजवा दूँ । मै परेसान था की इतने जल्दी मैं २५० प्रश्न पत्र किसी जांच सकता हूँ ?
परेसान हो कर मैं ने अपने मोडरेटर को फ़ोन किया । उन्हे अपनी परेसानी बताई । इस पर उन्होने कहा की ''तुम २५० पेपर लेकर परेसान हो, मुझे तो १७०० पेपर निपटाने हैं । जल्दी करो ---"
मैं ने भी निपटा ही दिया २५० प्रश्न पत्र । लेकिन यह सोच कर परेसान था की जो विद्यार्थी साल भर मेहनत करते हैं .उन्हें इस तरह निपटा देना कितना सही है ? आख़िर यह व्यवस्था किस काम की है ? इसका इलाज होना ही चाहिये । परीक्षा के नाम पे यह दिखावटी व्यवस्था ख़त्म होनी चाहिये ।
आप इस बारे मे क्या सोचते हैं ?

No comments:

Post a Comment

Share Your Views on this..

Most trending searches in the world

  The most searched topics in the world change hour by hour, but based on the latest Google Trends and global search activity, these are amo...

Popular Posts