तेरा शहर बहुत याद आता है
दिल तेरी ही यादों में चैन पाता है .
वो शमा जिससे रोशन थी जिन्दगी,
परवाना उसी में जल जाना चाहता है.
अपनी आदतों से परेशान हूँ यारों,
दिल ता उम्र आवारगी चाहता है .
प्रेम और संवेदना के जैविक कवि : मनीष डॉ. चमन लाल शर्मा प्रोफेसर ' हिन्दी ' शासकीय कला एवं विज्ञान स्नातकोत्तर महावि...
No comments:
Post a Comment
Share Your Views on this..