पब कल्चर का विरोध अब चुनाव का मुद्दा बन रहा है । वो भी मुंबई और बंगलोर जैसे शहरो के नाम पे । हम तरक्की तो चाहते है लेकिन सडी गली विचार धारा को भी नही छोडना चाहते । जब भारत मे पूजी आती है ,विदेशी आते हैं तो हमे अच्छा लगता है ,लेकिन इनके साथ आने वाली संस्कृति को हम बरदास नही कर पाते । ये दो तरफी चाल बड़ी भयानक है । हमे इस पे सोचना ही होगा ।
हिन्दी साहित्य, भाषा-विज्ञान, समाज-विज्ञान, भारतीय संस्कृति और सिनेमा पर प्रामाणिक शोधपरक आलेख। संपादक: डॉ. मनीष कुमार मिश्रा।