Tuesday, 27 February 2018

जब तुम्हें लिखता हूँ ।

जब तुम्हें लिखता हूँ
तो मन से लिखता हूँ
तुम्हारे मन में
बैठकर लिखता हूँ  ।

जब तुम्हें लिखता हूँ
तो जतन से लिखता हूँ
हर शब्दों को
चखकर लिखता हूँ ।

जब तुम्हें लिखता हूँ
तो बसंत लिखता हूँ
होली के रंग में
तुम्हें रंगकर लिखता हूँ ।

जब तुम्हें लिखता हूँ
तो पुरवाई लिखता हूँ
तुम्हारी आस में
अपनी प्यास लिखता हूँ ।

जब तुम्हें लिखता हूँ
तो दिल खोलकर  लिखता हूँ
न जाने कितने सारे
बंधन तोड़कर लिखता हूँ ।

जब तुम्हें लिखता हूँ
तो खुशी लिखता हूँ
आँख की नमी को
तेरी कमी लिखता हूँ ।

              -------मनीष कुमार मिश्रा ।











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