
जीवन की सारी तन्हाई ,
खो कर तुझमे ही बिसराई ।
तुझसे पहले तेरे बाद ,
हर हाल मे तेरा ध्यान प्रिये ।


आज तुझे फिर जीने का जी चाहा है ;
आज फिर यादों ने दिल ललचाया है ;
बारिश की फुहारों में तन भीगा है ;
तेरी यादों में मन भीगा है ;
भाव मचले हैं कितनी तमन्नाओं के साथ ;
याद आ रहे हैं गुजरे वाकयात /
क्या खूब घटा छाई थी ;
भीगी जुल्फों ने मासुकी फैलाई थी ;
बारिश की बौछारों ने , बहती बहारों ने ,
हमारे तन की आतुरता बडाई थी ;
मन पे मदहोशी छाई थी ;
मखमली बदन के बड़ते अहसास ;
मेरे शरारती हाथों के बड़ते प्रयास ;
लरजते होठों का तपते होठों से गहराता विस्वास ;
बेकाबू जजबातों का ,दो बदनों के बिच मचाया वो उत्पात ;
बारिश का मौसम और वो तूफानी रात ;
आज तुझे फिर जीने का जी चाहा है ;
आज फिर यादों ने दिल मचलाया है /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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मेरी अन्तिम साँस की बेला ,
अमरकांत जन्मशती पर के एम अग्रवाल महाविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न । कल्याण (पश्चिम) स्थित के. एम. अग्रवाल महाविद्...