
जिसमे तुम मेहमान बने थे ।
सोचा होता मेजबान का ,
कैसा होगा हाल प्रिये ।
-अभिलाषा



इसी तरह की कई सामजिक बुराइयों को ले कर आन्दोलन चलाए गए । शिक्षा के प्रचार -प्रसार के कारण पढ़ा -लिखा नया मध्यम वर्ग अस्तित्व मे आया । लड़कियों ने भी शिक्षा ग्रहण की । वे अपनी अधिकारों से परिचित होने लगी । अपने अधिकारों के लिए लड़ने लगी । अपनी पसंद -नापसंद जाहिर करने लगी । अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति देने लगी । यह सब भारत की नई तस्वीर थी । दो पीढियों के बीच संघर्ष की नई स्थिती थी । सरकार नारा दे रही थी की -बेटा -बेटी एक समान , शिक्षा सब का है अधिकार । लेकिन पुराने लोग इस बात को पचा नही पा रहे थे । यह स्थिती अब भी इस देश मे मौजूद है । यह अलग बात है की इसी देश की इंदिरा गांधी,सरोजनी नायडू ,कल्पना चावला ,पी.टी.उषा,सानिया मिर्जा,महामहिम प्रतिभा पाटिल और किरण बेदी जैसी बेटियों ने पूरी दुनिया मे देश का नाम ऊँचा किया है ।
समय बदल रहा है ,और हमारी सोच भी बदल रही है । इस देश मे राखी सावंत जैसी लडकियां फ़िर से स्वयम्वर रचने लगी हैं ,वो भी डंके की चोट पे । आज लडकियां लड़को के साथ कंधे से कन्धा मिला कर काम कर रही हैं । बाजारवाद की बदली हुई परिस्थितियों मे गृहस्थी की गाड़ी पुरूष के साथ मिल के चला रही हैं ।
आवस्यकता सिर्फ़ इस बात की है की हम पूरी इमानदारी के साथ उनकी आगे बढ़ने मे सहायता करे । पुरानी दकियानूसी मान्यताओं को भूलकर सम सामयिक परिस्थितियों के अनुकूल अपनी विचार धारा मे परिवर्तन लायें । हाल ही मे शिक्षा के अधिकार का बिल संसद से पारित हुआ ,यह एक अच्छी पहल है । महिलाओ के लिए ३३ % आरक्षण वाला विधेयक भी जल्द ही पास हो जाना चाहिए ।
इस देश की बेटियाँ इस देश के सुनहरे भविष्य का आधार हैं । अगर भारत को २१वी सदी मे विश्व की एक महाशक्ति के रूप मे उभरना है तो उसे अपनी बेटियों को शिक्षित,आत्मनिर्भर,खुशहाल ओर हर तरह से सक्षम बनाना ही होगा ।

१। स्त्रियों को घर की चार दीवारी मे ही रहने के लिए कहना ।
२। उनका बाहर निकलना बंद करना ।
३। उन्हे शिक्षा से वंचित करना ।

राखी सावंत और विवादो का चोली -दामन का साथ है । हाल ही मे उनका नौटंकी भरा स्वयम्वर खूब चर्चित हुआ । अब कई लोग मीडिया के माध्यम से यह कहने मे लगे हैं की राखी ने जो किया वह सब पैसे और trp का खेल था ।
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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अमरकांत जन्मशती पर के एम अग्रवाल महाविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न । कल्याण (पश्चिम) स्थित के. एम. अग्रवाल महाविद्...