Saturday, 26 April 2014

बनारस मे नए मित्रों के फोन कुछ इस तरह आते है,

बनारस मे नए मित्रों के फोन कुछ इस तरह आते है,
का बे कहां हो ?
यहीं कमरे पे । 
चलो अस्सी चलें । 
कुछ काम है ।
अबे काम काहे का गुरु , चलो घंटा दू घंटा लंठई / बकचोदी करेंगे, फिर लौट आएंगे । 
जब तक मैं कल्याण में था , न तो बकचोद था न लंठ । लेकिन बनारस -------------------------------------------------------- । 
भो------ के एतना सोचबो तो लड़........ रह जाबों । बु........... कभों न ब्न्बो । 
तो का चल रहे हो ?
हाँ , आता हूँ । 

ये संवाद उन प्राध्यापक मित्रों के साथ जो बीएचयू के प्रोफेसर हैं ।

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