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Turmeric : The Natural Healer

Turmeric : The Natural Healer Posted: 11 Nov 2009 05:03 AM PST Ayurveda is the best home remedy for many diseases. Many herbs and plants are used to cure disease. Even centuries back it was Ayurveda the ultimate healer for all. And among all Turmeric is extensively used as in Ayurveda. Turmeric has always proved to be the best treatment of sprains and swellings since centuries. Turmeric Derive from curcumin used for food colouring and also responsible for the yellow colour of turmeric researches have proved turmeric has the potential for the treatment of various diseases from cancer to Alzheimer’s. Once you know this magic spice you will realize why yellow curry is frequently available in kitchen. As per the express India and the ACS’ Journal of Agricultural and Food Chemistry scientists are developing a nano size capsule that will boost the body’s uptake of  curcumin and help fight several diseases. Please read on for more details . As per SindhT...

जापान :तब और अब

जापान :तब  और   अब   

चलो इक बार फिर से अपनी दुनिया बसा ले हम ,

चलो इक बार फिर से अपनी दुनिया बसा ले हम , मेरी बातों को तुम समझो तेरी राहों को मै जानू ; मेरे भावों को तुम जानो तेरे सपनों को मै मानू ; मेरे अरमाँ को तुम जिओं तेरी सोचों को मै मानू ' चलो इक बार फिर से अपनी दुनिया बसा ले हम , खो के इक-दूजे में अपने ख्वाबों को सच कर ले हम ; दुनिया को ना भूलें मगर ख़ुद को ना तोडे हम , रिश्तों को तो जोडें मगर ख़ुद का ना छोडे हम ; चलो इक बार फिर से अपनी दुनिया बसा ले हम , प्यार छिपा है जो हम दोनों के सीने में ; क्यूँ उसे इक दूजे पे ना वारें हम ; खुशियाँ गर मिलती हैं हमें बातों मुलाकातों में , क्यूँ न करें बातें क्यूँ ना करें मुलाकातें हम ; कीमत तो देनी पड़ती है हर खुशी की जीवन में , जीवन का करेंगे क्या जिसमे न होंगे इक दूजे के संग हम ; चलो इक बार फिर से अपनी दुनिया बसा ले हम , कुछ पल ख़ुद भी जी लें आ इक दूजे को बाँहों में भर लें हम ; चलो इक बार फिर से अपनी दुनिया बसा ले हम ,

कभी पल मुस्कराया करते थे ,

कभी पल मुस्कराया करते थे , कभी क्षण गुनगुनाया करते थे , होते थे जब भी तुम कहीं आस पास ; वो लम्हे खिलखिलाया करते थे / सामने बैठ तुम कॉलेज की बातें किया करती थी , मेरी धडकनों के अंदाज बदल जाया करते थे ; अपनी सहेलियों की शरारतें बता जब इठलाते थे तुम , मेरे अहसास नही दुनिया बसाया करते थे ; तेरी हँसी का एक शमा बना होता था , हम तेरे खुबसूरत चेहरे को निहारा करते थे ; जब कभी आहत होती किसी के बात पे तू , तेरी उदासी को तेरे सिने से चुराया करते थे ; जब तेरा दिल भर आता अपनो के कारण कभी , तेरे ग़मों को अपने ह्रदय में छुपाया करते थे ; हर रोज सुबह नहा के तेरे निकालने का इंतजार हम करते , तुझे देख हर रोज नए सपने बनाया करते थे ; भोर हुए आखं मलते जब तुम सामने मेरे आते , कैसे हम एक दूजे की सिने से लगाया करते थे ; मन्दिर जब भी गए संग तेरे हम, तेरी खुशियाँ मांग तेरे मांग में सिंदूर भरा करते थे ; कभी पल मुस्कराया करते थे , कभी क्षण गुनगुनाया करते थे , होते थे जब भी तुम कहीं आस पास ; वो लम्हे खिलखिलाया करते थे /

भोर हुए तेरी याद चली आती है /

भोर आखँ खुलते तेरी याद चली आती है , बाँहों में भरकर सिने से लगाती है , दिल को प्यास जीवन को आस दिए जाती है , भोर हुए तेरी याद चली आती है / पल भर को जो हुआ अकेला , तेरे भावों ने आ मुझको घेरा , धड़कन को अहसास वो देते , गम को विश्वास वो देते , रातों में बिस्तर पे जब लेटा , तेरी बातों का होता सबेरा , नयनो में सपने आते हैं , तन मन पुलकित हो जाते हैं , भोर हुयी फिर यादें आती हैं , वो मेरी तन्हाई भर जाती हैं , कैसे तुझसे दूर मै जाऊं , कैसे मन मन्दिर फुसलाऊं, भोर हुए तेरी यादें आती हैं , वो मेरी तन्हाई भर जाती हैं /

आखें प्यासी है क्यूँ नीद नही आती /

मेरे लम्हों की बेकरारी नही जाती , आखें प्यासी है क्यूँ नीद नही आती ; जब्त अरमां दिल को बेकरार नही करते , भूल जायुं तुझको क्यूँ ऐसी बीमारी नही आती / है शांत शमा कैसे मै जानू , दिल में उलझन चंचल धड़कन ; मन से खामोशी नही जाती , आखें प्यासी हैं क्यूँ नीद नही आती ? तू गैर की बाँहों में ऐतबार है मुझको , तेरी जिंदगी उससे है इकरार है मुझको ; तू है नही मेरी ये कैसे मै मानू , मेरे रग रग से बहते खूं से तेरी खुसबू नही जाती ; आखें प्यासी है क्यूँ नीद नही आती /

पर वो पल कितने प्यारे औ कितने अच्छे थे/

विस्तृत आकाश विदित है ; मन का भावः विदित है ; अहसास कहाँ कब सीमा जाने , दिल का विश्वास विदित है / झिल-मिल तारों से ,आस करे क्या ? सागर की लहरों से , प्यास करे क्या ? रातों के ख्वाबों का मंतव्य समझ लेते ; जागी आखों के सपने ,करे क्या ? तू गैर नही है ; तुझको मुझसे बैर नही है ; मेरी तन्हाई से क्या रिश्ता तेरा ? मेरी आगोस में होने का अब दौर नही है / तेरे वादे क्या सच्चे थे ; तेरे अहसास सभी कच्चे थे ; बदन से मिलते बदन की यादें ; क्या ले के बैठें अब उसको ; पर वो पल कितने प्यारे औ कितने अच्छे थे/ नई दुनिया तुने बसाई है ; मेरी यादों की अर्थी सजाई है ; मेरे होने का अहसास ना हो ; तुने अपने दिल की कब्र बनाई है /