अगर जिन्दा रह्ने के पीछे
कोई सही तर्क नही है तो राम नामी बेच कर
या रंडियो की दलाली कर के
जिन्दा रह्ने मे
कोई फ़र्क नहीं है।
धुमिल- मोचीरम
हिं दी के पक्ष में जिस भावुकता के साथ तर्क रखे जाते हैं उन्होंने हिंदी का कोई भला नहीं किया अपितु नुकसान ही अधिक हुआ । हिंदी की ...
No comments:
Post a Comment
Share Your Views on this..