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संदेश

कि तुम्हारे क़रीब होने का एहसास बढ़ जाता है

दूर रहकर मेरी इतनी चिन्ता मत किया करो  कि तुम्हारे क़रीब होने का एहसास बढ़ जाता है ।  

मेरे भी ख़्वाब हो गये अमीरों से ।

तुमसे कहता हूँ वही एक बात नए- नए तरीकों से हाय ! भटकते फ़िरते हैं तेरे कूँचे में हम फ़कीरों से ।  तुमने तो कह दी है अपने दिल की बात लेकिन हम सोचते हैं कि लड़ लेंगें क़िस्मत की लकीरों से ।  अब तक यूँ तो तनहा ही रहा हूँ आदतन मैं , तुम क्या मिले कि मेरे भी ख़्वाब हो गये अमीरों से ।

तुम जिन बातों को अधूरा छोड़ देती हो

तुम जिन बातों को अधूरा छोड़ देती हो  उन्हें पूरा - पूरा समझता हूँ ।  कहे से जादा तुम्हारे अनकहे को  अब मैं जानता हूँ ।  तुम्हारे मौन से मेरे मन का रिश्ता है । तुम्हारी इन आखों में मेरी एक दुनियाँ बस्ती है ।

मेरे यार का इक़रार अभी बाकी है ।

हमारी कोशिशों का असर अभी बाकी है  कि उनके गुरूर में कसर अभी बाकी है ।  मैं इस पड़ाव पर आकार खुश तो हूँ  पर मेरी मंजिल का सफ़र अभी बाकी है ।  मैं हूँ ख़ानाबदोश जिसकी तलाश में वो मेरा दिलकश हमसफर अभी बाकी है । मैं तो कह के बैठा हूँ दिल कि बात पर मेरे यार का इक़रार अभी बाकी है ।

जितना प्रेम करना जानता हूँ

जितना प्रेम करना जानता हूँ  काश उतना जताना भी जानता ।  बे वजह तुम्हारे रूठने पर, हर बार तुम्हें मनाना भी जानता ।  जैसे तुम छिपाए रहती हो कई राज, काश कुछ छिपाना मैं भी जानता ।  चलो छोड़ो कुछ भी नहीं और बोलो, यह बोल, दिल जलाना मैं भी जानता ।

मेरी आवारगी में भी

मेरी आवारगी में भी, एक सलीका है  हम दिल तोड़ते हैं, पर एक तरीका है ।

तुम्हें मनाने में

छोड़ो भी कि अब, मैं ऊब सा गया हूँ तुम्हें मनाने में ख़ुद से रूठ सा गया हूँ ।