Thursday, 19 February 2026

भारतीय ज्ञान परम्परा और पर्यावरण चिंतन '

 🕉️ *सादर अभिवादन* 🙏


दिनांक 24 फरवरी, 2026 को हिंदी विभाग ,इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय मीरपुर, रेवाड़ी (हरियाणा)द्वारा आयोजित *एक दिवसीय*  बहुविषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी ( *हाइब्रिड मोड़* ) में सहभागिता के लिए सादर आमंत्रित किया जाता है।

👉 संगोष्ठी का मुख्य विषय : 

         *'भारतीय ज्ञान परम्परा और पर्यावरण चिंतन '* 

👉 संगोष्ठी के विचारणीय *उपविषय* इस प्रकार होंगे–


1.​भारतीय ज्ञान परंपरा की समकालीन प्रासंगिकता

2.​वेद, उपनिषद और दर्शन : पर्यावरण चेतना

3.​पुराण, भगवद्गीता, रामायण, महाभारत : पर्यावरण चेतना

4.​बौद्ध और जैन साहित्य में पर्यावरण चेतना

5.​भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक संरक्षण

6.​भारतीय ज्ञान परंपरा का वर्तमान में पर्यावरण, शांति और सतत विकास में योगदान

7.​भारतीय ज्ञान परंपरा और भक्ति साहित्य में पर्यावरण चिंतन

8.​कथा साहित्य, हिंदी कविता, उपन्यास, नाट्य साहित्य,

​कथेतर साहित्य में पर्यावरण चिंतन

9.​भारतीय ज्ञान परंपरा: पर्यावरण, योग, वैश्विक चिंतन

10.​भारतीय ज्ञान परंपरा: प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद

11.​भारतीय ज्ञान परंपरा और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व

12.​भारतीय ज्ञान परंपरा :  पर्यावरण चिंतन और भारतीय सिनेमा

13.वैदिक वाङ्मय में पर्यावरण चेतना: पृथ्वी सूक्त के विशेष संदर्भ में।

14.​भारतीय लोक पर्व और प्रकृति संरक्षण: हरियाणा के लोक गीतों और परंपराओं का अध्ययन।

15.​रामचरितमानस में प्रकृति चित्रण: एक पारिस्थितिकीय (Ecological) विश्लेषण।

16.​आधुनिक हिंदी कविता और पर्यावरण

17.​NEP 2020 और पर्यावरण साक्षरता: प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक प्रकृति बोध का एकीकरण।

18.​भारतीय ज्ञान परंपरा और 'लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट' (LiFE): वैश्विक संकटों का भारतीय समाधान।

​19.​लोक कलाओं में प्रकृति पूजा: मांडणा, मधुबनी और चौक-पूर्णा जैसी परंपराओं में पारिस्थितिकी।

20.​मंदिर स्थापत्य और जल प्रबंधन: भारत के प्राचीन मंदिरों की बावड़ी और तालाब संरक्षण तकनीकें।

21.​ विभिन्न संस्कृतियों में राम के 'मर्यादा' और 'प्रकृति प्रेम' के आदर्श।

​22. ​प्राचीन भारतीय विमानिकी एवं खगोल विज्ञान: पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा स्रोतों की खोज।

23.​आयुर्वेद और 'प्रिवेंटिव हेल्थकेयर': प्राकृतिक जड़ी-बूटियों का औषधीय एवं आर्थिक महत्व।

24.​डिजिटल इंडिया और पेपरलेस वर्क कल्चर: पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक आधुनिक कदम।

​25.​भारतीय संविधान और पर्यावरण संरक्षण: मौलिक कर्तव्यों (Article 51A) के आलोक में नागरिक भूमिका।

26.​​ईको-मार्केटिंग और उपभोक्तावाद: 'भोग' के स्थान पर 'त्याग' की भारतीय अवधारणा।

27.​​प्राचीन भारतीय ग्रंथों में पर्यावरण बोध: वेदों और उपनिषदों के विशेष संदर्भ में।

28.​NEP 2020: शिक्षा के माध्यम से पर्यावरण मूल्यों का बीजारोपण।

​29.​हिंदी साहित्य में प्रकृति चित्रण : आदिकाल से आधुनिक काल तक की यात्रा।

30.​लोक जीवन और पर्यावरण: हरियाणा की लोक-संस्कृति और प्राकृतिक उत्सव।

31.​​योगिक जीवन पद्धति: आंतरिक शांति और बाह्य पर्यावरण का संतुलन।

32.​वनस्पति एवं जीव विज्ञान: जैव-विविधता संरक्षण की भारतीय पद्धतियां।

33.​कंप्यूटर विज्ञान: हरित तकनीकी (Green Tech) और ई-कचरा प्रबंधन।

34.​​पर्यावरण समाजशास्त्र : सामुदायिक भागीदारी और जल संरक्षण की परंपराएं।

35.​राजनीति विज्ञान और वैश्विक नीतियां: पर्यावरण न्याय और भारत की भूमिका।

36.​भूगोल और जीआईएस (GIS): क्षेत्रीय विकास और पारिस्थितिकीय मानचित्रण।

​37.​ग्रीन बिजनेस: वाणिज्य में सतत् विकास (Sustainable Development) के सूत्र।

38.​होटल प्रबंधन: ईको-टूरिज्म और शून्य अपशिष्ट (Zero Waste) की अवधारणा 

👉उपरोक्त उपविषयों के अतिरिक्त मुख्य विषय से सम्बन्धित अन्य किसी शोध विषय पर भी शोध आलेख प्रस्तुत किया जा सकता है।

✅ संपर्क एवं सबमिशन 

​ *Research Paper Submission* 

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( शोध पत्र इस ई-मेल पर भेजे जाएँ)


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✅​ *संपर्क सूत्र* (संगोष्ठी, पंजीकरण एवं शोधपत्र सम्बन्धी जानकारी हेतु) :

​डॉ.शकुंतला       - 7015950298

डॉ. जागीर नागर  - 9671242990

डॉ. अर्चना यादव  - 9416343568

Sunday, 1 February 2026

बुखारेस्ट में संपन्न क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलन

बुखारेस्ट में संपन्न क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलन 

बुखारेस्ट, रोमानिया | 28–29 जनवरी

रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट स्थित रोमानियन–अमेरिकन यूनिवर्सिटी के सभागार में 28–29 जनवरी को भारतीय दूतावास के तत्वावधान में एक क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का उद्देश्य भारत के बाहर हिंदी शिक्षण की वास्तविक चुनौतियों, भाषा-विज्ञान से जुड़ी समस्याओं तथा उनके व्यावहारिक समाधानों पर केंद्रित संवाद स्थापित करना था।

इस आयोजन के मेज़बान भारतीय उच्चायोग, बुखारेस्ट के श्री सीतेश सिन्हा रहे। सम्मेलन में यूरोप, अमेरिका और भारत से हिंदी भाषा एवं साहित्य से जुड़े प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, अध्यापकों एवं शोधकर्ताओं ने सहभागिता की।





सम्मेलन का उद्घाटन रोमानियन–अमेरिकन यूनिवर्सिटी के रेक्टर प्रो. कोस्टेल नेग्रिसिया ने किया। उन्होंने भारत–रोमानिया सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित करते हुए रोमानिया में हिंदी को एक सशक्त और सम्मानजनक मंच प्रदान करने का आश्वासन दिया।

भारत के राजदूत महामहिम श्री मनोज कुमार महापात्र ने हिंदी शिक्षण एवं प्रशिक्षण की भावी योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए विदेश मंत्रालय का आभार व्यक्त किया, जिसने विश्वभर के हिंदी विद्वानों को एक साझा मंच प्रदान किया।

भारत से पधारीं श्रीमती अंजु रंजन (संयुक्त सचिव, विदेश मंत्रालय) ने इतने कम समय में वैश्विक स्तर के हिंदी प्रेमियों की उपस्थिति पर संतोष व्यक्त किया तथा विदेशों में हिंदी शिक्षण को सुदृढ़ बनाने हेतु मंत्रालय की प्रतिबद्धता दोहराई।

इस सम्मेलन में स्वीडन, डेनमार्क, नीदरलैंड, यू.के., जर्मनी, बुल्गारिया, स्पेन, आर्मेनिया, पोलैंड, तुर्की, हंगरी, रोमानिया, मोल्दोवा, क्रोएशिया, कज़ाख़स्तान, अमेरिका, सर्बिया तथा भारत से कुल 20 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया

भारतीय ज्ञान परम्परा और पर्यावरण चिंतन '

 🕉️ *सादर अभिवादन* 🙏 दिनांक 24 फरवरी, 2026 को हिंदी विभाग ,इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय मीरपुर, रेवाड़ी (हरियाणा)द्वारा आयोजित *एक दिवसीय*  ...