किसी पत्रिका में पढ़ा हुआ मोहब्बत पर एक शेर आप सभी के लिए
सारे पेचीदा मसले आसान हो गए ,
मोहब्बत में हम भी इंसान हो गए.
सारे पेचीदा मसले आसान हो गए ,
मोहब्बत में हम भी इंसान हो गए.
स्वच्छंदतावाद : मनुष्य की मुक्ति, कल्पना और संवेदना का साहित्यिक स्वप्न डॉ. मनीष कुमार मिश्रा असोसिएट प्रोफेसर, हिन्दी विभाग के. एम. अग्रव...
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