बड़ा रुलाया तेरी बातों ने रह रह कर , सब कुछ कहा तुने मोहब्बत ना कह कर ; . मिला बड़े शौक से किसी से, किसी से बढ -चढ़ कर ; लगा किसी के गले ,मिला किसी से दौड़ कर ; किसी को देख मुस्काया,खिलखिलाया किसी से मिलकर ; बैठा किसी के पास रुक कर , सुना किसी की बात दिल भर कर ; . सुना किसी के भाव भी, देखा किसी की आखों में चाह भी ; इनायत कर दी किसी पे मिलकर, शिकायत भी सुन ली किसी की छुप कर ; कहा किसी से बात दिल की , सुना किसी की बात मन की ; . सबसे मुलाकात कर ली , मन की चाह कर ली ; जिनको न परवाह थी खुशिओं की ; उनका भी साथ कर ली ; . खुशियाँ तेरी इसी में थी शायद , शायद तेरा यही ठौर था , न मुझसे मिलने की चाह की , शायद मै अकेला गैर था / . तरसता रहा मै पल- पल , जलता रहा मै हर पल , सोया नहीं हूँ अब भी , तड़पता रहा मै हर पल / . मेरे भावों से उसे क्या , मेरी राहों से किसे क्या , जब तू ही नहीं हुयी तेरी , गैरों की चाहत का मुझे क्या / .