Thursday, 25 June 2009
यूं.जी. सी . का तुगलकी फरमान ,जागो इंडिया जागो
M.PHIL/Ph.D वालो को योग्य तो कभी अयोग्य बताकर उनके साथ मजाक कर रहे है । १ जून २००९ को आए उनके
NOTIFICATION के हिसाब से अब M।PHIL STUDENTS डिग्री कॉलेज मे पढाने के योग्य नही हैं । अब कोई बताये की जो लोग मेहनत से यह डिग्री पाने के लिए काम कर रहे थे , उनका अब क्या होगा ?
इसका जवाब कौन देगा ?
नया मामला निम्नलिखित है
UNIVERSITY GRANTS COMMISSION
BAHADURSHAH ZAFAR MARG
NEW DELHI-I 10 002
UGC (MINIMUM QUALIFICATIONS REQUIRED FOR THE APPOINTMENT
AND CAREER ADVANCEMENT OF TEACHERS IN UNIVERSITIES AND
INSTITUTIONS AFFILIATED TO IT) (3RD AMENDMENT), REGULATION 2009.
TO BE PUBLISHED IN THE GAZETTE OF INDIA
PART Ill, SECTION-4
F.1-1/2002(PS)Exemp.
1" June, 2009
NOTIFICATION
In exercise of the powers conferred by clause (e) & (g) of sub-section (1) of Section 26 read
with Section 14 of University Grants Commission Act 1956 (3 of 1956), and in supersession of the
University Grants Commission (Minimum Qualifications required for the appointment and Career
Advancement of teachers in universities and institutions affiliated to it) (1st Amendment),
Regulation, 2002 dated 315t July, 2002 and University Grants Commission (Minimum
Qualifications required for the appointment and Career Advancement of teachers in universities
and institutions affiliated to it) (2nd Amendment), Regulation 2006 dated 14.06.2006, the
University Grants Commission hereby makes the following Regulations to amend the University
Grants Commission (Minimum Qualifications required for the appointment and Career
Advancement of teachers in universities and institutions affiliated to it) Regulation, 2000, namely:-
I. Short Title, Application and Commencement:
I. These regulations may be called University Grants Commission (Minimum
Qualifications required for the appointment and Career Advancement of teachers in
universities and institutions affiliated to it) (3`d Amendment), Regulation 2009.
2. They shall apply to every university established or incorporated by or under a
Central Act, Provincial Act or a State Act, every institution including a constituent
or an affiliated college recognized by the Commission, in consultation with the
university concerned under clause (f) of Section 2 of the University Grants
Commission Act 1956, and every institution deemed to be a university under
section 3 of the said Act.
Ihev shall come into force with effect from the date of their publication in the
(la/cite of India.
In the ANNEXI:RE to the University Grants Commission (Minimum Qutltficaua»
required for the appointment and Career A , the followmgchas ptovtdedtlnttes
ancen-lent (11
and institutions affiliated to it) Regulation, 2000
Note to Regulation 1.3.3. 1.43. I.5.3 and I.6.1:
°NI;1 shall remain the compulsory requirement for appointment .^.
Lecturer even for candidates having Ph.D degree. Ilowevct the
candidates who have completed MPhil degree or have submitte
Ph.D. thesis in the concerned subject uplo 3December. 1`1`)' ;ur
exempted from appearing in the NET examination
thy'
the said Note to Regulation 13.3. 14 3. 1.5.3 and 1 .6 1 was s su
substituted bo
um QualiliLali^me
tollow6mg para. vide University Grants Commission M
equiredfor the appointment and Career Advancement of teachers in anise siue^
Regulation 200'_:
,_ NUT shall remain compulsory requirement toi appointmeu
lecturer even for candidates having PhD. Degree. ovIIvevC^
candidates who have completed M Phil. Degree by
December.1993 or have submitted Ph.D thesis to the Unive sit
ject on or be fore 31" Dc, ember 200' are exempted
the concerned sub s c,
tfr de ee, eth y shall Ihn case to lpt s ans NI
omobt
appearing in
l'h.D the
examination
in lo tile I I the
in
elholv WOV is appointmentr and (u er
CAodmvmaniscseiomnent of teachers in universities and institutions affiliated to u ^to^ ni^,o
Amendment). Regulation 2002, was turther substituted by the following
oAf the Unisersn} G rantsn Commissioin (Mimum Qualifications required I'll the
appointment and C Amendment).
Alvan) Regulation 2006^s in universities and instiuni^^ro
affiliated to it) (2 °d
NF.T shall remain compulsory requirement for aplpoinl d
ith ost raduate degree.
g '11e Lecturer even for those w p rned suhleLt in the conce
u'.
candidates having Ph.D. Degree l vel teachto
evemptcd from NF;I for PG level and lIC e
candidates having M.Phil. degree in the concerned
exempted From NFT for UL, level teaching only:
Non,
the (II)ore prorision shall he subsiil"ted hr the following paragraph
'\1,
1 SLN1' shall remain the minimum eligihilitc condition for vecruiunu'i ^-
appoinunent of lecturers in (h,ivc die+ Colleges ' Instindinn.c.
Provided, however, that candidates, who are or have been awarded Ph.D.
degree in compliance of the "University Grants Commission (minimum
standards and procedure for award of Ph.D. Degree), Regulation 2009, shall be
exempt from
the requirement of the minimum eligibility condition
of NET/SLET
for recruitment and appointment of Assistant Professor or equivalent positions in
Universities /Colleges /Institutions. "
n
I Dr. R . h auhanl
Secretary, U.G.C.
To
The Assistant Controller
Publication Division
Government of India
Ministry of Urban Development Poverty Alleviation
Civil Lines
Delhi -110054.
Wednesday, 24 June 2009
ऐ दोस्त आज तेरे आंसू का हिसाब हो जाए
ऐ दोस्त आज तेरे आंसू का हिसाब हो जाए /
तेरा जाना जरूरी है आज तुजे समझाना है ;
मेरे बड़ते कदमो को अभी बहुत मंजिले पाना है /
कर नाज ख़ुद पे मेरी सफलता की तू सीढ़ी है ;
खिलखिला के हंस ऐ दोस्त तेरे सिने पे मेरे जूते की मोढी है /
अपने आंसू से तू मुझको उदास ना कर ;
जो बीत गया अब उसकी आस ना कर /
जानता हूँ तुझको मेरी तरक्की tujhe प्यारी हैं ;
मानता हूँ तेरे जज्बे को तुने जान मुजपे वारी है /
बहुधा बाँहों में जकडा है सिने से लगाया है ;
प्यार हूँ मै तेरा मैंने ही तेरे सिने में ख़जर घुसाया है /
मेरे प्यार तेरा इम्तहान है अब तो ;
मेरी तरक्की तेरे आंसू का जवाब है अब तो /
तू कहते थी तू जीवन में बहुत आगे जाएगा ;
इस दुनिया में अपना लोहा मनवाएगा /
तेरे सपनों को सही कराने का वक्त आया है अब तो ;
इसिलए ये छुरा तेरे सिने में समाया है/
तू कहती थी मेरी इक बात पे जान दे देगी ;
मेरी आवाज पे ईमान रख देगी /
मुझे भी प्यार है तुझसे , तेरा ईमान नही माँगा है ;
दे दुवा मुझको तेरे प्यार को मैंने पहचाना है /
झेल जाएगा हर दर्द को हंस के जानता हूँ मैं ;
आखिरी साँस पे भी दुवा होगी मानता हूँ मै /
क्या करूँ अतीत है तू वर्त्तमान कोई और है ;
जीवो आज पे ये संदेश साधू संतो से भरे इस देश का है /
भुत को वर्तमान या भविष्य से मिलायुं कैसे ;
मेरी तरक्की और सुख के बिच तुजको लायुं कैसे ?
गजब की मोहब्बत है तेरी ;
तेरी दुवा असर रखती है ;
जानता हूँ तू समजेगा मेरी मजबूरी को ;
देखेगा बड़े प्यार से काटते तेरे सिने को मेरे हाथ की छुरी को /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
====
( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
====
अब तुझसे क्यूँ है मिलना ?
क्यूँ भावो का फिर से खिलना ?
राहों में तुमने राह बदल दी ,
भावों में अभिप्राय बदल दी ;
रिश्तों की कठिनाई से भागी ,
कब अपनी सच्चाई पे जागी ;
उन लम्हों से फिर क्यूँ है जुड़ना ;
क्यूँ आधे जजबातों से मिलना ;
तुझको दिल की झंकार न भायी ;
तेरे प्यार की खुसबू मुरझाई ,
खोयी थी तू अपने ही सुख में ;
खोयी थी पैसों के बंधन में ;
तुजे चाहिए था इक रुतबा ,
प्यार नही अंहकार का जज्बा ;
गले लगाता था जिसको मैं ;
उनसे हाथ milaane क्यूँ है मिलना ;
फिर मिलके क्यूँ है टूटना /
उन होठों पे पुकार न होगी ;
वछों को सिने की दरकार न होगी ;
न मिलन की aah मन में ,
na bahon ki chah tan me ;
nayan न ढूंढेंगे नयनो को ;
भावों में पुकार न होगी ;
पत्थर से क्या बयां करूँगा ;
कोयले को कैसे गले का हार करूँगा ?
क्यूँ मिलाने kअ व्यवहार करूँ मै ;
क्यूँ ख़ुद पे अत्याचार करूँ मै ?
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
====
( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
====
Sunday, 21 June 2009
जिंदगी की मेहरबानियाँ याद हैं /
वो हँसी शाम फिर न आएगी ;
वो चहकते दिन तू कैसे भुलाएगी ?
सदियाँ लगी थी दिल को करीब लाने में ;
एक पल में उसे कैसे भुलाएगी ?
वो नजरों से नजरें मिलाना याद है ;
तेरा यूँ ही चिडाना याद है ;
मेरे हाथों में तेरा हाथ याद है ;
तेरा शरमा के मुस्कराना याद है ;
आवाजों की खनक ,
सांसों की महक ;
तुझे बस यूँ ही देखना ;
अदा से तेरा अधखुली पलकों का खोलना ;
तेरा दौड़ कर सिने से लगना याद है ;
सांसों का सांसों से महकना याद है ;
आज भी तेरा डोली से जाना याद है ;
कितनी तड़प ,जब्त करते आंसू ,
औ मुस्कराना याद है ;
कितना अकेलापन माहौल की सनसनाहट ,
औ एक कोने में ख़ुद से आंसू छुपाना याद है ;
कितने ही जख्म खाए जिंदगी की राहों में ,
पर कोई गम न था ;
उन जख्मों को बहुतों ने कुरेदा ,
पर दर्द न था ;
लोंगों का खिल्ली उडाना याद है ;
मेरा आखें चुराना याद है ;
आखों के बहते आंसू औ मुस्कराना याद है ;
शिकवा किस की ,
गिला किसका ;
जिंदगी की मेहरबानियों पे तड़पना याद है ;
bhuke पेट दिन है गुजरे ,
खाली पेट रातें ;
जिंदगी याद है मुझे तेरी हर सौगातें ;
अपनो से अपनी हालत पे दबना याद है ;
चंद दिनों की खुशियाँ देकर ,
तेरा बरसों तडपाना याद है ;
जिंदगी तेरी मेहरबानियाँ याद है ;
अपनो की भीड़ में सालों गुजारी तनहाईयाँ याद है /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
====
( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Friday, 19 June 2009
वो तेरा अतीत हूँ /
अंत हूँ ,अनन्त हूँ ;
आकर्षण हूँ , आमंत्रण हूँ ;
जो तू वश में ना कर सकी ,
वो तेरा अत्यंतर हूँ /
अरस्तु हूँ , अगस्त्य हूँ ;
अनुगामी हूँ , अभ्यस्त हूँ ;
जो तू ना पढ़ सकी ;
वो तेरा ही अर्थ हूँ /
अमूर्त हूँ , अभिभूत हूँ ;
अविरक्त हूँ , अभिव्यक्ति हूँ ;
जिसे ना तू जीत सकी ,
वो तेरी आशक्ति हूँ /
आगाज हूँ , आवाज हूँ ;
आस हूँ , अनायास हूँ ;
जिसे ना तू मिटा सकी ;
वो तेरा अहसास हूँ /
अभिज्ञान हूँ , अभिमान हूँ ;
आकार हूँ , अविकार हूँ ;
जो तू न संभाल सकी ,
वो तेरा अधिकार हूँ /
अमान्य हूँ , अवमान्य हूँ ;
अरीती हूँ , अप्रिती हूँ ;
जो स्वीकार ना कर सकी ,
वो तेरा अतीत हूँ /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Thursday, 18 June 2009
वो तेरा अतीत हूँ /
अनिभिज्ञ हूँ , अवरुद्ध हूँ ;
अदृश्य हूँ , अदृष्ट हूँ ;
अभीष्ट नही जो तुझे ;
वो तेरा अधिष्ट हूँ /
अनुरोध हूँ , अवरोध हूँ ;
अज्ञान हूँ , अनजान हूँ ;
जो पुरा ना हो सका ,
वो तेरा अरमान हूँ /
अप्राय हूँ , अभिप्राय हूँ ;
आवेश हूँ , अवशेष हूँ ;
मन में तेरे छुपा हुआ ,
उलझनो का आक्रोष हूँ /
अमान्य हूँ , अवमान्य हूँ ;
अरीती हूँ , अप्रिती हूँ ;
जो स्वीकार ना कर सकी ,
वो तेरा अतीत हूँ /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Wednesday, 17 June 2009
तेरा मुझसे क्या रिश्ता था
मेरा तुझसे क्या रिश्ता है ;
सब रिश्ता भूल गया /
याद हैं बस आखों के आंसू ;
सारा किस्सा भूल गया /
रातें आखों में कटी ;
रातों का अँधियारा भूल गया /
राहों में उलझा हूँ दिन भर ;
घर का रास्ता भूल गया /
बातों में उनके बिरहा होता था ,
आखों में मदिरालय ;
बहकूँ कैसे यार मेरे ;
मदहोशी ही भूल गया /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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यूं . जी .सी का अत्याचार
अब सुनने मे आ रहा है की फ़िर से M.PHIL की मान्यता ख़त्म होने जा रही है । अब कोई इनसे यह पूछे की आप के आदेश के बाद जिन लोगो ने M।PHIL किया या कर रहे हैं अब उनका क्या होगा ?
UGC वालो इसका क्या जवाब दोगे ?
गम नही दूरियों का
वक्त की मजबूरियों का ;
जब मिलन की आग हो ,
जलते बदन में एक प्यास हो ;
मन में एक मीठा भास हो /
सुनी रातें अहसास बडाती हैं ;
तेरा आभास दिखाती हैं ;
उगता सूरज एक विस्वास दिलाता है ;
मन अपना ही कयास लगाता है ;
जब दिल बेकरार हो ;
अलग मजा है मजबूरियों का ;
अगर बेइंतहा प्यार हो ;
उदासियों में भी आस हो /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Tuesday, 16 June 2009
पहली मुलाक़ात -----------------------
जो होनी थी ,वही छोड़ सब बात हुई ।
जो परी ख्वाबो मे आती रही अब तक,
उसके पहलू मे ही आज रात हुई ।
यूँ तो चोरी दोनों का कुछ-ना -कुछ हुआ पर,
खुश हैं दोनों ही,अजीब वारदात हुई .
Monday, 15 June 2009
तुम आओगे शहर में , मै न होऊँगा /
मैं ना होऊँगा ;
न उलझन तुम्हें होगी ,
ना मै रोऊँगा /
कुछ यादें टटोलेंगी,
कुछ पल कचोटेंगे ;
अपनो का साथ होगा ,
हँसी का कारोबार होगा ;
न होगी झिझक मन में ,
जब मै ना होऊँगा ;
खुशियों से भरी सुबहें होंगी ,
भावों से खिली रात ;
न होगी टीस मन में ,
ना होगी इच्छाओं की आस ;
न मचलेंगे सपने तेरे ,
ना बडेगी मेरी प्यास ;
तुम आओगे शहर में ,
मैं ना होऊँगा ;
न उलझन तुम्हें होगी ,
ना मै रोऊँगा /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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वो आए शहर में ,
हमें अनजान रख के चल दिए ;
समझते हैं हाले दिल तेरा ए हँसी ,
किसके साथ आए औ क्यूँकर चल दिए ;
आदतें जाती नही है ,
राहें बदल जाती हैं ;
बदन पिघलाते थे ,
दिल सुलगा के चल दिए /
वो शहर में आए ,
हमें अनजान रख के चल दिए /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Sunday, 14 June 2009
वह प्यार को ----------------------
रुमाल अपना मेरे पास छोड़ देता है ।
जात-पात ऊँच-नीच की गागर को ,
अक्सर कोई कन्हाई फोड़ देता है ।
हर एक नई मुलाकात के साथ ,
वह नया रिश्ता जोड़ देता है ।
तेवर बगावती हैं इसके बडे ,
मोहबत्त हर रिवाज को तोड़ देता है ।
Friday, 12 June 2009
एक जुगनू की भांति जुगजुगाता मैं रहा /
चाँद की तरह मुसकराता वो रहा ;
पपीहे की प्यास मुझमे थी ,न मरी वो आस मुझमे थी ;
देवी सी काया तुझमे थी, पथ्थरों की माया तुझमे थी ;
तू सागर की लहरें , मै दरिया का पानी ;
तू बदलता मौसम , मै धरती की रवानी ;
तू चहक है, मौज है, और है एक नशा ;
मै आस हूँ, प्यास हूँ , और एक सदा ;
तू खिलखिलाती हँसी है, और है स्वछन्द धारा ;
मै दिल का दर्द हूँ ;और हूँ समय में सिमटी एक विचारधारा /
तू अजेय प्यार , जीवन को हर पल दर्द बना देती है ;
मै छुद्र वासना जो मन को बहका देती है ;
वासना को वक्त मिटा देता है , कमजोर बन देता है ;
तू कालजयी है ,धड़कन के साथ पली बड़ी है ;
हर गुजरे पल के साथ तकलीफ बढाती रहती है ;
जीवन को मृतप्राय ,जीने को दुसवार बनाती रहती है ;
मै छनिक ;तू सर्वदा ;
मै तिरिस्कृत ; तू आधिस्ठित ;
मै वासना , तू प्यार ;
तू आराधना ,मै अन्धकार /
मैं वासना ,तू प्यार /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Wednesday, 10 June 2009
आदित्य जी की याद मे --------------------------------
मैं सोच रहा था की दोनों ही ख़बरें मध्यप्रदेश से ही सम्बंधित है । महाकाल भी मध्यप्रदेश (उज्जैन ) में ही हैं । उनके होते हुए भी काल के गाल मे ये सभी माँ सरस्वती के वरदपुत्र कैसे समा गए ? क्या भोलेनाथ इतने निष्ठुर हो गए हैं की विनास के लिये सृजन से जुडे लोगो को ही चुन रहे हैं ? आख़िर क्या कारण हो सकता है उनकी इस निष्ठुरता का ?
मन मे कई प्रश्न उठ रहे थे ,और याद आ रहे थे आदित्य जी । उनके साथ कितने मंचो से काव्य पाठ किया यह याद ही नही , लेकिन बहुत कुछ ऐसा याद है जो अब आंखे गीली कर दे रहा है । जादा कुछ लिखने की फिलहाल इच्छा ही नही हो रही है । मैं अपनी श्रधांजलि दे कर यह पोस्ट ख़त्म कर रहा हूँ ।
इन खबरों को ले कर बहुत कुछ लिखा गया है । उन्ही मे से कुछ लिंक नीचे आप की सुविधा के लिये दे रहा हूँ ।
tanvir
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City mourns Habib Tanvir - Kolkata - Cities - The Times of India
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Noted playwright Habib Tanvir dead
Veteran theatre personality Habib Tanvir died in Bhopal early on Monday after prolonged illness, family sources said. He was 85. Tanvir died at about 0630 ...ibnlive.in.com/news/noted-playwright-habib-tanvir-dead/94413-3.html - Cached - Similar pages
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Om Prakash Aditya poems Online,Poems by Om Prakash Aditya-Indian ...
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Tuesday, 9 June 2009
अब आ भी जावो
अब आ भी जाओ ;
चाँदनी रात में तेरे चेहरे के नूर को तरसी हैं आखें ;
सुहानी शाम में तेरी चहकती आवाज को ,
उड़ते गेशुओं से आनंदित प्यास को ,
अपनो की भीड़ में निगाहों से निगाहों के मिलाने के अंदाज को ,तरसी है निगाहें ;
अब आ भी जावो ;
सरदी की सुबहों में तेरे बदन को आगोश में भरने को ,
तेरी महकती सांसों से सांसों को बहकने को ,
तन की सरगोशियाँ बढाते तन को ,
बहकती हुयी प्यास को बढाते बेकाबू हाथ को तरशी हैं बाहें ;
अब आ भी जावो /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
====
( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
====
Friday, 5 June 2009
फरिश्तों का नसीब कहाँ की इन्सान का गुन पाए ;
फरिश्तों का नसीब कहाँ की इन्सान का गुन पाए ;
इन्सान खुदा की चाहत है ,वो फरिस्ता क्यूँ बन जाए ;
आसमान सजदा करता है जमीं की धुल का हरदम ,
बिखरे कितना भी, अपनी पहचान कहाँ से वो पाए ?
जो सिर्फ़ अपनी ही कहते हैं ,वो प्यार का जज्बा क्या जाने ,
इश्क नही उनके बस का जो जान संजोते रहते हैं ;
चाँद की किस्मत फूटी है ,पपीहे को ना सुन पाए ;
पथरीली मिटटी क्या जाने ,फूलों की खुसबू किसको कहते हैं /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
====
( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Thursday, 4 June 2009
जब-जब सावन बरसता है -------------------------------------
मेरा यार कितना तरसता होगा ।
छत पर अकेले हर शाम को ,
वह न जाने क्या-क्या सोचता होगा ।
सब पूछेंगे उदासी का सबब उससे,
मगर वह कुछ नही कहता होगा ।
बहुत ही उदास होता होगा वह ,
जब रात अकेले मे चाँद देखता होगा ।
चंदन सा शीतल बदन उसका यारों ,
sardiyon ki raat mae jaltaa hoga .
Tuesday, 2 June 2009
बादलों की प्यास हूँ मै
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
====
( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Saturday, 30 May 2009
ना कोई गम है , ना हालात मुझपे हावी हैं ;
ना कोई गम है , ना हालात मुझपे हावी हैं ;
ना मिला जो साथ , ना उसकी याद मुझपे भारी है ;
पतझड़ के मौसम में हरियाली के सपने क्यूँ देखें ?
कितनी भी नफ़रत जमाना चाहे फैलाये ;
दुरी कितनी भी वक्त साथ ले आए ;
अपनी मोहब्बत से शिकायत कैसी ;
मेरा प्यार हर हालात पे भारी है /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Friday, 29 May 2009
क्या कहें वक्त ने हालात कैसे बदले हैं ;
थे हाथों में हाथ जिनके कभी ,
उनके व्यवहार कैसे बदलें हैं /
जीवन का मर्म का क्या कहें ,
कहीं कोई कारवां नही दिखता ;
रूठे वक्त में कह सकूँ मेरा ,
ऐसा कोई सपना भी नही दिखता /
समय की करवटों से ,
सच की हरकतों से ,
मेरी अपनी बहसों से ;
अहसास बचा हो जिसके मन में कोई नम ;
ऐसा कोई अपना भी नही दिखता /
प्यार दिखाते औ बातों से अपनापन,
है आखों में दुरी औ एक रूखापन ;
जुदाई की घड़ियों में भी ,
तनहाई न पास आने पाई ;
दूर रही या पास रही ,
पर वो सिने में महफूज रही ;
तनहाई से दुरी का रिश्ता ,
मुझे कभी ,नही है दीखता ;
प्यार अपना जवाब आप है ;
इन्सान का मन अगर साफ़ है ;
बदलते वक्त से प्यार का रिश्ता ,
मुझे कभी ,नही है दिखता ;
जीवन का मर्म का क्या कहें ,
कहीं कोई कारवां नही दिखता ;
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Wednesday, 27 May 2009
The plight of Hindi
For instance A Maharastra .a Karantaka , a Tamilnadu and its people took pride in speaking there language but making it sure slowly and gradully that there language should be used by everyone who resides in these parts ,But can you say same about Hindi certainly not .
Take for instance the oath ceromony of minister is taking place in Delhi yes our capital but how many of the ministers took oath in Hindi ?And did there was even a tiny bubble in any part of the country ? No why ?
In Tamilnadu or in Karnataka or in West Bangal they want every should talk in there languge or local language and Hindi is the local language of Delhi forget about it as RAj BHASA we hardly have pride left for anything Indian but what about the local aispiration of the people that they say in Tamilnadu or in Karnataka why these minister didn`t take oath in Hindi ?
As for as electronic media is concern these people are beref of thinking and Indian pride the less we said about them the better .
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Monday, 25 May 2009
LAST WEEK
It was a great opportunity for BBCI and managing committee of IPL to show Indian culture and Indian artist on International platform . Isn`t it a Indian tournament ?
Indian DJ also could have done English songs yes given that it was held in South Africa some of the local artist should also have been used .But what Mr. Flamboyant Modi did was a complete dampener .His heart is not in right place I presume but we have to know it before when he shifted it to south Africa .
Second thing worth mention is Otha ceremony of Ministers by president .Only two Minister
took oath in Hindi Mr. Sharad pawar and Mr. Kamal Nath why?
Lets assume that few of them are not fluent in Hindi but isn``t being cabinet Minister from at lest 5 years as most of them were they should have learn ed Hindi and what about other ministers who speaks Hindi well but still preferred English why?
Why didn`t they took lesson from Mrs. Sonia Gandhi who learn ed Hindi or it is of no importance for a cabinet minister to know our Raj Bhasa ? Where these people are leading us and Why there in no hue and cry in any news paper or in electronic media ?Yes many of them could have taken oath in there mother tongue but why in English ? Did we need such politician in our midst who don`t respect there country or who`s heart is not at right places?
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Sunday, 24 May 2009
कौन है अपना कौन पराया
कैसा है मन भरमाया ;
क्या उसकी आखों में सच था ,
क्या उसकी बातों में सच था ?
क्या उसने चाहा था मुझसे ,
क्या उसने chahaa था मुझको ?
उसके नयनो में सच था देखा ,
उस चेहरे में तप था देखा ;
बातों में अच्छाई थी पाई ,
मन की गहराई थी पाई ;
कौन है अपना कौन पराया ?
कैसा है मन भरमाया /
उष्मा थी उसके स्पर्शों में ,
गरिमा थी उसके तन मन में ;
एक अनोखी अनुभूति mai पाता ,
कैसा मन chanchal ho jata ,
कौन है अपना कौन पराया
कैसा है मन भरमाया ;
क्या उसकी आखों में सच था ,
क्या उसकी बातों में सच था ?
ह नहीं सकते जब मन कहेगा चले आयेंगे
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Friday, 22 May 2009
कभी इकरार करता है
कभी इनकार करता है ;
कभी खिलता कँवल है ,
कभी अनपढ़ी गजल है ;
कहीं अधुरा सच है तू ,
कहीं पूरा तप है तू ;
कहीं विस्वास है तू ,
कहीं खोयी आस है तू ;
कहीं बंधन में जकडा है ,
कहीं बस यूँ ही अकडा है ;
चेहरे की मुस्कान है तू ,
आंसुवो की जान है तू /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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बड़ी बड़ी बातों से मर्म नही बनता
अन सुलझे कामों से कर्म नही बनता ;
संदेह नही तेरी बुद्धिमत्ता पे यार मेरे ,
बड़ा बुद्धिमान ही है बार बार गिरता /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Thursday, 21 May 2009
इश्क के नाम पर------------------------------
मोहबत्त को कहता नमाज है ।
इश्क के नाम पर खफा हैं लोग यंहा
मेरे आस-पास यह कैसा समाज है ।
भाती है,मगर मीठी आंच है यह,
इस प्यार का यही अंदाज है ।
बदन तक तो ठीक है लेकिन,
हमारे आचरण पर भी लिबाज है ।
वो चुप है,मगर कमजोर नही है,
उसे शायद आप का लिहाज है ।
Wednesday, 20 May 2009
पास तुम नही तुम्हारी यादें है -------------------------
यंही-कंही बिखरे तेरे वादे हैं ।
सभी रिश्ते बढ़ा रहे हैं मुझसे ,
जाने कैसी बिछा रहे बिसादे हैं ।
जब से तुम्हे चाहने लगा हूँ मै,
ajeeb say uth rehay iraadey hain .
meri apni koi ichha hi nahi ,
hum to shatranj kay maamooli pyaade hain .
unhay sab kuchh mila hai bana-banaya,
jo kahlaatay duniya may sahjaade hai .
Monday, 18 May 2009
अभी तो सपना सजाया है ;
अभी ही तुने रुलाया है ;
अभी तो आखें चमकी , अभी तो सांसे बहकी ;
अभी ही अँधेरा छाया, अभी ही तेरे घर से निकला कोई साया ;
अभी तो तु खुल के खिलखिलाया है ,
अभी ही तुने मेरा सपना बिखराया है ;
कदम की लडखडाहट,
तेरे जाने की आहट;
गलें की तल्खियाँ मिटाने दे ;
भावनावों को सिमट जाने दे /
अभी तो सपना सजाया है ;
अभी ही तुने रुलाया है ;
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Sunday, 17 May 2009
love you the way you are
in spite of our quarrels and wordily wars ;
the betrayal of emotions ; feeling of loves erosion's ;
the hurt of losing you ;the joy of holding you ;
the times you were not with me ;
the beautiful moments you shared with me ;
in life's ups and down ;
you hold your own;
love you the way you are ;
in spite of our quarrels and wordily wars.
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Saturday, 16 May 2009
The election and its verdict
I have my view on this .
There are no of factors which can be attributed for this success of congress. The acceptance of Mr. Manmohan singh as able administrator , his clean image and the toughness shown on Nuclear issue has very vital role in it.The biggest blunder BJP made was targeting of Mr. Manmohan singh as weak Prime minister And personal attack on him by BJP .
And then the rise of Mr. Rahul Gandhi as youth leader and his master stroke of Going solo in U.P. and Bihar .There were many regional issues like MNS in Maharashtra Tamil issue and many other factors .
But one of the major trend is also to go for a government which is pro growth that's a welcome change . Other important thing is rise of national parties or other word leaning of people towards a two national parties Congress and BJP. In-spite of setbacks BJP has done well in no of states .
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Friday, 15 May 2009
पपीहे की तरह चाँद ताकता मै रहा ,
अँधेरी गुफा में आसमान ताकता मै रहा /
नखलिस्तान की ओर तेजी से मै दौड़ा ,
मृगतृष्णा थी ,पानी तलाशता मै रहा /
लोग कहते हैं ,उसकी आखों में समुंदर सी गहराई है ;
मै समुन्दर में दिल का रास्ता तलाशता रह गया /
बाँहों में फिर भी भर लेता उसको ऐ यारों ;
मै सामने खड़े बुत में ,जीवन का स्पंदन तलाशता रह गया /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Thursday, 14 May 2009
निकले थे एक ही दिन अलग अलग राहों में ;
कुछ उनके साथ थे ,कुछ और की तलाश थी /
उन मदमस्त हवावों में ,कोहरों के साये में ;
महफिलों में ,जानी अनजानी बाँहों में ;
गा रहे थे पार्टियों में , घूम रहे थे अलमस्त भावों में ;
महफिलों का दौर था , कितने ही रंगों से सराबोर था ;
महक आती थी बातों से ,इठलाती थी शरमा के गालों से ;
खुसबू थी उसके बालों में , वो खुश थी स्वच्छंदता की राहों में /
हम भज रहे थे भगवान को ,तलाश रहे थे स्वयं में इनसान को ;
हाँ लोंगों की भीड़ थी , पर तन्हाई कितनी अभिस्ट थी ;
अपने में खोये थे ,पथरीली चट्टानों पे सोये थे ;
अपने को समेटे हुए , सत की तलाश में रमते हुए ;
भावों को सरलता की चाह दी , मन को भक्ति का भाव दी ;
उन्हें स्वच्छंदता की दरकार थी , कुछ और की तलाश थी /
वो खुश है की महफिलों की जान हैं ;
mai khush हूँ मुजमे एक सरल इन्सान है ;
उनकी भक्ति भी एक विलाश है ;
मेरे लिए भोग भी भक्ति प्रसाद है /
निकले थे एक ही दिन अलग अलग राहों में /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Tuesday, 12 May 2009
अमरकांत के साथ अन्याय क्यो ?
१ जुलाई १९२५ को बलिया मे जन्मे अमरकांत की पहली कहानी १९५३ के आस-पास कल्पना नामक पत्रिका मे छपी । इस कहानी का नाम था -इंटरव्यू । अमरकांत की जो कहानिया बहुत अधिक चर्चित हुई ,उनमे निम्नलिखित कहानियों के नाम लिये जा सकते हैं-
- जिंदगी और जोंक
- डिप्टी कलेक्टरी
- चाँद
- बीच की जमीन
- हत्यारे
- हंगामा
- जांच और बच्चे
- एक निर्णायक पत्र
- गले की जंजीर
- मूस
- नौकर
- बहादुर
- लड़की और आदर्श
- दोपहर का भोजन
- बस्ती
- लाखो
- हार
- मछुआ
- मकान
- असमर्थ हिलता हाँथ
- संत तुलसीदास और सोलहवां साल
इसी तरह अमरकांत के द्वारा लिखे गये उपन्यास निम्नलिखित हैंपत्ता
- कटीली राह के फूल
- बीच की दीवार
- सुखजीवी
- काले उजले दिन
- आकाश पछी
- सुरंग
- बिदा की रात
- सुन्नर पांडे की पतोह
- इन्ही हथियारों से
- ग्राम सेविका
- सूखा पत्ता
- इस तरह करीब १२० से अधिक कहानिया और १२ के करीब उपन्यास अमरकांत के प्रकाशित हो चुके हैं । लेकिन दुःख होता है की इतने बडे कथाकार को हिन्दी साहित्य मे वह स्थान नही मिला जो उन्हे मिलना चाहिये था । आलोचक प्रायः उनके प्रति उदासीन ही रहे हैं । ऐसे मे अब यह जरूरी है की अमरकांत का मूल्यांकन नए ढंग से किया जाए ।
अभिव्यक्ति की विवेचनाएँ
सन्दर्भ की व्याख्याएं --------- समाचार पत्र
हितों का विरोधाभास --------- समाज
सत्य का मिथ्याभास --------- सामाजिकता
व्यक्ति की असमर्थतायें --------- वासनाएं
समाज की विवसतायें --------- भ्रस्टाचार
देश की गतिशीलता --------- चमत्कार
स्वार्थ का हितोपदेश --------- राजनीति
patan ki पराकास्ठा --------- राजनेता
सच्चाई की अनुभूति --------- सपना
सच्चाई की जीत --------- माँ की प्रीती
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Monday, 11 May 2009
कुछ के गुजर
कुछ कर गुजर ,
कुछ ऐसा कर ;
सबको नाज हो तुझपे /
डूबते का किनारा बन
भटकते का सहारा बन ,
मरते की साँस बन ;
अपनो की आस बन ;
कुछ कर गुजर ,
कुछ ऐसा कर ;
सबको नाज हो तुझपे /
संत की तलाश बन ,
भक्ति का ज्ञान बन;
ज्ञानी का ध्यान बन ,
सांसारिक का मन बन ;
कुछ कर गुजर ,
कुछ ऐसा कर ;
सबको नाज हो तुझपे /
किसी का स्नेह है तू ,
किसी का ध्येय है तू ;
किसी का दुलार है तू ,
किसी का प्यार है तू ;
किसी का भाग्य है तू,
किसी का अधिकार है तू ;
उठ हिम्मत बाँध ,
टूटे किनारे संभाल ;
साथ बन , विस्वास बन ;
कर ले अपने बस में मन ;
कुछ कर गुजर ,
कुछ ऐसा कर ;
सबको नाज हो तुझपे /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Sunday, 10 May 2009
पूर्वग्रह पत्रिका का प्रकाशन पुनः प्रारम्भ ----------------------
प्रभाकर शोत्रिय जी के सम्पादन मे यह भारतीय भवन ,भोपाल से निकल रही है ।
Saturday, 9 May 2009
हमसफ़र कौन है ,कैसे कहे आज हम ?
hamsafar kaun है, kaise kahen aaj hum ;
रास्तों में भटके हुए हैं, मंजिल की तलाश है /
raston me bahatke huye hain; manjil ki talsh hai /
साथ तेरा सुखमय है , बात तेरी प्रियकर है ;
sath tera sukhmay hai ,bat teri priykar hai ;
कैसे कहें तू है वो हमसफ़र ,जिसकी मुझे तलाश है;
kaise kahen tu hai wo हमसफ़र, jisaki muje talash hai /
मेरी अनिभिज्ञता पे नाराज न हो ;
meri anibhigyta pe naraj na ho ;
पर रास्ते में ही मंजिल का हिसाब ना हो ;
par पर raste रास्ते me hi manjil ka hisab na ho ;
वाकये कितने अभी टकराने हैं ;
wakaye kitane anjane abhi takarane hai;
राहों में अभी फैसलों के वक्त आने हैं ;
rahon me abhi faisalon ke waqt aane hai;
दुविधाएं अभी कहाँ आई ?
duvidhayen abhi kahan aayi ?
जिंदगी की भूलभुलैया कहाँ छाई ?
jindagi ki bhulbuliya kahan chayi?
रिश्तों में गहराईयाँ अभी आनी है;
riston में गहराईयाँ aani hai ?
वो इक समुंदर है ,या बारिश का फैला हुआ पानी है ?
wo ek samunder hai ya barish ka faila huwa पानी hai है ?
कैसे कहें हमसफ़र मिल गया ?
रास्ते में उलझे हैं ;
rasten me ulaje hai ,
मंजिल की तलाश जारी है /
manjil ki talash jari hai /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Friday, 8 May 2009
गुजरा ज़माना , आज का फ़साना /
गुजरा जमाना ,
आज का फ़साना ;
अनकही बातें ,
अधूरे जजबात ,
और वो रात /
अरमानो का मौसम ,
बाहों की जकडन ,
जलता तन ;
बहकता मन ,
सतत प्यास ,
वो भावों का कयास ;
महकी सांसों का बंधन ,
तन से खिलता तन ;
क्या सच क्या सपना ;
रास्ता देखती आखें ,
आखों से आखों की बातें ;
सुबह का इंतजार करती रातें ;
स्पर्श से आल्हादित दिन ,
सामने पाके हर्षित मन ;
प्यार बरसते नयन ,
भावनावों की मदहोशी ;
उसपे तेरी हंसी ,
क्या सच , क्या सपना ;
क्या भाग्य क्या विडम्बना ,
क्या तू है मेरा अपना /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Thursday, 7 May 2009
उस रात का गिला क्या करे जब हम तुम साथ न थे
उस पल की याद क्या जब हाथों में हाथ न थे ;
चाँद की चांदनी में भी कहाँ अब वो बात है ,
सूरज की रोशनी में भी अँधेरे की छाप है ;
क्या कहे दिल की हालत ए मेरी जिंदगी ,
जब से तुम बिचडे हो बहकता सावन भी उदास है ;
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Wednesday, 6 May 2009
कुछ तो कहो, कुछ तो लिखो ;
सजाई है जब एक महफ़िल ,
महफ़िल में कभी तो खिलो ;
क्यूँ चुप हो ,क्या बात है,
क्यूँ मुद्दे नहीं मिलते ;
जीवन का हर पल एक बात है ,
क्यूँ बात नहीं करते ;
चुप रहने से कुछ हासिल नहीं होता ,
बिना अपनी बात कहे,
समाज के बदलाव में शामिल नहीं होता ;
गर चीजें बदलनी है बेहतरी के लिए ,
खुल के कहो बात अपनी ,
देश की तरक्की के लिए /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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The caste system
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Monday, 4 May 2009
लौटा है आज वो घर बरसों बाद
हर साल दो साल बाद ,
वो घर आता जरूर था ;
पर लौटा है घर आज वो बरसों बाद /
ख़त या इ मेल तो अपनो को करता था ;
पर वो बस खोखले शब्दों का मायाजाल है मात्र /
उसने अपने फ्लैट में गमले सजाएँ हैं ;
कई छुट्टियाँ शहर के आस पास के पहाडों ,औ पर्यटन स्थल पे बिताएं हैं/
कहाँ पाया उसने गाँव की मिट्टी का अपनापन !
शहर की पार्टियों पर ,नेटवर्क की साइटों पर ,सैकडों मित्र, मैत्रिणी है उसकी ,
कहाँ पाया उसने ;बचपन के दोस्तों की निश्छलता ,अपनापन ;
कैसे पाए अपने वो मचले दिन ?
बचपन की लड़ाई ,वो कसक , उतावलापन ;
लौटा है आज वो घर बरसों बाद /
कभी फ़ोन ,कभी मोबाइल पे बात कर लिया करता था अपनो से ,
पर कहाँ पाए वो उष्मा दादी की गोद का ,
मामा की सोच का ,
चाचा की डांट का ,
पडोसी के दुलार का ;
माँ की ममता का ,
पिता की कडाई का ,
दादा की रजाई का /
बड़ा आदमी बन गया है अब वो ,
प्यार को कितना तरस गया है वो ;
लौटा है आज वो घर बरसों बाद /
बिस्तर माँ को जकडे पड़ा है ;
पिता की आखों में खालीपन सा छुपा है ;
बचपन का दोस्ताना ,अपनो का याराना कहीं खो सा गया है /
भाई भाभी विस्मित है ,किस ढंग से पेश आयें ;
सब चाहते तो है अपनापन और हक दिखलायें ;
झूठा दिखावा और भावों का ओथालापन ;
उसका खुद का और अपनो का ;
दोनों को व्यथित किये है ;
इतने सालों को कैसे जोड़े ,
ये प्रश्न भ्रमित किये है /
सालों की अपनी सफलता में ,
बीबी के चाह में ;
बच्चों को पालने में ,
शहर की चमक में ,
भविष्य को निखारने में ;
अपने सुख ,झूठे दिखावे और विलासों के साये में ;
बिता डाले ;कितने ही सावन , होली दिवाली ;
शहरों की दीवालों में ;
पर लौटा है आज वो घर बरसों बाद /
आज बीबी का तन शिथिल , मन का वो नही जानता ;
बच्चे अपनी जिंदगी में मस्त ;
समाज और दोस्तों में वाह वाही है ;
ह्रदय खाली सिर्फ खाली है/
ये उसकी अपनी जिंदगी का खोखलापन,
डरावने सपने सा सामने खडा है ;
और आज उसके सामने practical बनने का attitude ;
यछ प्रश्न सा सिने में जड़ा है /
लौटा है आज वो घर बरसों बाद /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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मै उससे अपने रिश्ते के वजूद को कैसे झुठलायुं
इस रिश्ते की हकीकत को खुद को कैसे समझायुं
/ बरसों से मिला नहीं है ,
पर कैसे कह दूँ रिश्ता नहीं है
?हर अहसास से इंकार है तुझको ;
ऐसा कोई पल नहीं, जब तू याद नहीं मुझको /
मेरी हर गम या ख़ुशी का , तुझे ध्यान है रहता
;कभी इतने दूर न हो जाये की पास न आ सके ;
इस पहलू ने एक अनजाने धागे से हमें बांध के रक्खा ;
इतने पास न आ जाये की दुरी में हो मुश्किल ;
इस डर ने हमें अनजान सा रक्खा /
मै उससे अपने रिश्ते के वजूद को कैसे झुठलायुं ;
इस रिश्ते की हकीकत को खुद को कैसे समझायुं /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Sunday, 3 May 2009
आज नया क्या दूँ मै किसको
प्यार किया था एक सपने से ;
जो कसी ने तोड़ दिया ;
स्नेह दिया था जिस अपने को ;
उसने मुह मोड़ लिया ;
आज नया क्या दू मै किसको ?
विसवास किया था जीवन का जिसपे ;
उसको अपना ही हित प्यारा है ;
याद किया है जिसको हर पल ;
उसका ह्रदय पराया है ;
आज नया क्या दूँ मैं किसको ?
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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आज का नौजवान
सीना तान के खडा है ,उंचाईयों की तरफ बड़ा है ;
आत्म विस्वास से भरा है,
आज का नौजवान /
मंजिले उसकी धाती है , असंभव की बात नहीं भाती है ;
तेजस्विता से ओतप्रोत है ,धर्म से सचेत है ;
सीमाओं में बन्धता नहीं, कठिनाईयों से रुकता नही ;
अपनी गरिमा जानता है ,स्वतंत्रता की सीमा पहचानता है ;
आज का नौजवान /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Saturday, 2 May 2009
The caste system
"Birth is not the cause, my friend; it is virtues which are the cause of auspiciousness. Even a chandala (lower caste) observing the vow is considered a Brahman by the gods."
“The four fold division of castes’ “was created by me according to the apportionment of qualities and duties.” “Not birth, not sacrament, not learning, make one dvija (twice-born), but righteous conduct alone causes it.” “Be he a Sudra or a member of any other class, says the Lord in the same epic, “he that serves as a raft on a raftless current , or helps to ford the unfordable, deserves respect in everyway.”
Sardar Kavalam Madhava Panikkar (1896-1963) Indian scholar, journalist, historian from Kerala, administrator, diplomat, Minister in Patiala Bikaner and Ambassador to China, Egypt and France. Author of several books, including Asia and Western Dominance, India Through the ages and India and the Indian Ocean.
He says:
“The fact is that the four-fold caste is merely a theoretical division of society to which tribes, clans and family groups are affiliated. It is a sociological fiction. The earliest available literature gives instances of Brahmins carrying on the professions of medicine, arms and administration."
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Friday, 1 May 2009
अभ्यर्थना में तेरे निकाल दिए बरसों
तेरी अनिश्चितता का क्या कहें ,कभी तो खुल के बरसो /
हर बार कुछ आस दे के सिमट जाते हो ;
खुशी के कुछ लम्हे, पर लम्बा बनवास दिए जाते हो /
मजबूरियों से किसी के नावाकिफ नहीं है कोई ;
पर दिल को हर बार उदास किये जाते हो /
भावनावों का ;दुनिया की रीती से ,लोंगों की बुद्धिमत्ता की सीख से;
कब याराना रहा है यार मेरे ?
फिर क्यूँ भावों को हर बार, पराजय का अहसास दिए जाते हो ?
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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The caste system
Even if we are born Sudras. By good conduct we can raise ourselves to the highest status. (sudrayonau hi jatasya sadgunan upastisthatah vaisyatvam labhate brahmam ksatriyattvam tathaiva ca arjave vartamanasya brahmanyam abhijayate – Aranyaparva. )
Patanjali refers to Brahmin kings, and Manu to Sudra rulers. There were Brahmin soldiers in the time of Alexander, as there are today. Shankara held the view that members of all castes can read the sastras. Hindu acaryas denounced the spirit of caste separatism. Vajrasucikopanisad holds that many who were born of non-brahmin women had risen to the rank of Brahmin saints.
Author Beatrice Pitney Lamb has pointed out:
"Clearly the Indian way of assimilating foreigners - by allowing them to pursue their own customs within some niche of the caste system - has led to greater variety and tolerance within the country than exists in the United States, where immigrants have been assimilated through a school program emphasizing 100 per cent Americanization - and hence, implicitly, the rejection of inherited cultural roots."
Writing of this varna-ashrama-dharma, Auguste Comte (1798-1857) the great French sociologist, wrote in his book Système de philosophie positive or Positive Society:
“No institution has ever shown itself more adopted to honor, ability to various kinds than this polytheistic organization…In a social view, the virtues of the system are not less conspicuous. Politically, its chief attribute was stability…As to the influence on mortals, this system was favorable to personal morality, and yet more to domestic, for the spirit of caste was a mere extension of the family spirit….As to social morals, the system was evidently favorable to respect for age and homage to ancestors.” greatest poets and the most venerated saints such as Sura Dasa, Kabir, Tukaram, Thiruvalluvar and Ram Dasa; came from the humblest class of society." Caste system has been exploited against the Hindus, for the last two centuries by the British, Christian Missionaries, Secular historians, Communists, Muslims, Pre and Post-Independence Indian politicians and Journalists for their own endshe caste system was never a tenet of the Hindu faith.
"The universe is the outpouring of the majesty of God, the auspicious one, radiant love. Every face you see belongs to Him. He is present in everyone without exception." - says the Yajur Veda.
"The Lord (The Divine) is enshrined in the hearts of all." - says the Isha Upanishad 1 -1.
The Upanishads which are a pure, lofty, heady distillation of spiritual wisdom which come to us from the very dawn of time tell us:
"Reality (God) is our real Self, so that each of us is one with the power that created and sustains the universe."
In Sanskrit, Tat tvam asi, “You are That.”
"In the depths of meditation, sages (rishis)
Saw within themselves the Lord of Love,
Who dwells in the heart of every creature." says the Shvetashvatara Upanishad. 1 - 3.
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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The caste system
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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***औरत का नंगा जिस्म ********************* शायद ही कोई इस दुनिया में हो , जिसे औरत का जिस्म आकर्षित न करता हो . अगर सारे आवरण हटा क...
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जी हाँ ! मैं वृक्ष हूँ। वही वृक्ष , जिसके विषय में पद््मपुराण यह कहता है कि - जो मनुष्य सड़क के किनारे तथा...
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Factbook on Global Sexual Exploitation India Trafficking As of February 1998, there were 200 Bangladeshi children and women a...
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अमरकांत की कहानी -जिन्दगी और जोक : 'जिंदगी और जोक` रजुआ नाम एक भिखमंगे व्यक्ति की कहानी है। जिसे लेखक ने मुहल्ले में आते-ज...
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अनेकता मे एकता : भारत के विशेष सन्दर्भ मे हमारा भारत देश धर्म और दर्शन के देश के रूप मे जाना जाता है । यहाँ अनेको धर...
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अर्गला मासिक पत्रिका Aha Zindagi, Hindi Masik Patrika अहा जिंदगी , मासिक संपादकीय कार्यालय ( Editorial Add.): 210, झेलम हॉस्टल , जवा...
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अमरकांत की कहानी -डिप्टी कलक्टरी :- 'डिप्टी कलक्टरी` अमरकांत की प्रमुख कहानियों में से एक है। अमरकांत स्वयं इस कहानी के बार...
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Statement showing the Orientation Programme, Refresher Courses and Short Term Courses allotted by the UGC for the year 2011-2012 1...