चिरोयली मैं ताशकंद, उज़्बेकिस्तान में सन 2024 की फ़रवरी के पहले सप्ताह में पहुंचा था, ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी के विजिटिंग प्रोफ़ेसर के रूप में । मुझे यहाँ लगभग डेढ़ साल का समय बिताना था । एक अजनबी देश में अकेले इतना लंबा समय बिताने का यह पहला अनुभव था । मन में कई तरह के विचार थे जो परेशान किए हुए थे। ताशकंद मेरे लिए एक नई किताब जैसा था, जिसके पृष्ठों को मुझे इन डेढ़ सालों में धीरे-धीरे पलटने थे। लाल बहादुर शास्त्री भारतीय संस्कृति केंद्र के निदेशक भाई सितेश कुमार ने बताया था कि ड्राइवर शाहरुख मुझे एयरपोर्ट पर मिलेंगे और उन्हें अंग्रेज़ी बोलने आती है। अपना सामान लेकर जैसे ही मैं एयरपोर्ट से बाहर निकला ठंडी हवा के तेज़ झोके से मेरी रूह कांप गयी । अभी ओवर कोट पहन ही रहा था कि एक लंबे चौड़े व्यक्ति ने मुझसे पूछा " प्रोफ़ेसर मनीष फ़ॉर्म इंडिया ?" मैंने हां में सिर हिलाते हुए कहा " यस,बट हाऊ यू हैव रिकॉग्नाइज्ड मी ?" उसने मुस्कुराते हुए कहा," मिस्टर सितेश कुमार हैज गिवेन मी योर फ़ोटो। कैन वी गो?" इतना कहकर उन्हो...
हिन्दी साहित्य, भाषा-विज्ञान, समाज-विज्ञान, भारतीय संस्कृति और सिनेमा पर प्रामाणिक शोधपरक आलेख। संपादक: डॉ. मनीष कुमार मिश्रा।