Wednesday, 2 September 2026

हीरालाल सेन : भारतीय फिल्म निर्माण के आरंभिक इतिहास के विस्मृत अग्रदूत

 हीरालाल सेन : भारतीय फिल्म निर्माण के आरंभिक इतिहास के विस्मृत अग्रदूत

शोध आलेख

सारांश

भारतीय सिनेमा का इतिहास सामान्यतः दादासाहेब फाल्के और 1913 में प्रदर्शित ‘राजा हरिश्चंद्र’ से जोड़कर देखा जाता है। किंतु भारत में कैमरे से चलचित्र बनाने की प्रक्रिया इससे लगभग डेढ़ दशक पहले आरंभ हो चुकी थी। इस आरंभिक इतिहास में बंगाल के हीरालाल सेन का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है। उन्होंने उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में चलचित्र माध्यम को अपनाया, रंगमंचीय प्रस्तुतियों के दृश्यों का फिल्मांकन किया और अपने भाई मोतीलाल सेन के साथ रॉयल बायोस्कोप कंपनी की स्थापना की। सेन ने विज्ञापन फिल्मों, स्थानीय दृश्यों, समाचार-फिल्मों और स्वदेशी आंदोलन से जुड़ी राजनीतिक घटनाओं के फिल्मांकन में भी प्रयोग किए। उनकी फिल्मों का मूल संग्रह आग में नष्ट हो जाने के कारण उनके योगदान का मूल्यांकन मुख्यतः ऐतिहासिक दस्तावेजों और बाद के फिल्म-इतिहास लेखन के आधार पर करना पड़ता है। प्रस्तुत आलेख उनके योगदान और भारतीय सिनेमा के इतिहास में उनके स्थान का पुनर्मूल्यांकन करता है।

कुंजी शब्द

हीरालाल सेन, भारतीय सिनेमा, रॉयल बायोस्कोप कंपनी, बंगाल, प्रारंभिक भारतीय फिल्म, विज्ञापन फिल्म, स्वदेशी आंदोलन, दादासाहेब फाल्के।

1. प्रस्तावना

भारतीय सिनेमा का इतिहास किसी एक क्षण या एक व्यक्ति से शुरू होने वाली सरल कथा नहीं है। ‘राजा हरिश्चंद्र’ (1913) को भारतीय पूर्ण लंबाई की कथा-फिल्म के इतिहास में निर्णायक स्थान प्राप्त है, परंतु उससे पहले भी भारत में चलचित्र प्रदर्शन और स्वदेशी फिल्मांकन के प्रयोग हो रहे थे। हीरालाल सेन उन आरंभिक भारतीय फिल्मकारों में हैं जिन्होंने 1890 के दशक के अंतिम वर्षों में कैमरा उठाया और भारतीय विषयों को चलचित्र में दर्ज किया। फिल्म इतिहासकार Ashish Rajadhyaksha और Paul Willemen की Encyclopedia of Indian Cinema उन्हें एच. एस. भाटवडेकर के साथ भारत के प्रथम फिल्मकारों में रखती है।

2. जीवन और आरंभिक पृष्ठभूमि

हीरालाल सेन का जन्म तत्कालीन बंगाल के मानिकगंज क्षेत्र में हुआ था, जो आज बांग्लादेश में है। जन्म-वर्ष को लेकर स्रोतों में 1866 और 1868 दोनों मिलते हैं; इसलिए शोध में इस मतभेद को दर्ज करना आवश्यक है। वे फोटोग्राफी से जुड़े और कलकत्ता के समृद्ध रंगमंचीय-सांस्कृतिक वातावरण ने उन्हें नए चलचित्र माध्यम की ओर आकर्षित किया।

3. चलचित्र से परिचय और पहला फिल्मांकन

1898 के आसपास कलकत्ता के स्टार थिएटर में प्रोफेसर स्टीवेन्सन द्वारा चलचित्र प्रदर्शन ने सेन को प्रभावित किया। Victorian Cinema के Luke McKernan के अनुसार सेन ने स्टीवेन्सन के कैमरे और मार्गदर्शन से ‘The Flower of Persia’ के दृश्यों का फिल्मांकन किया। बाद में उन्होंने लंदन की Warwick Trading Company से Urban Bioscope खरीदा। यह वह चरण था जब भारतीय दर्शक स्वयं कैमरे के पीछे जाकर फिल्म निर्माण की तकनीक सीखने लगे थे।

4. रॉयल बायोस्कोप कंपनी

हीरालाल सेन और उनके भाई मोतीलाल सेन ने Royal Bioscope Company स्थापित की। स्थापना-वर्ष के बारे में स्रोतों में 1898 और 1899 का अंतर मिलता है। कंपनी ने फिल्म प्रदर्शन के साथ-साथ स्वदेशी फिल्मांकन को संगठित रूप दिया। Classic Theatre की प्रस्तुतियों से कंपनी का गहरा संबंध था। इस कारण सेन का कार्य भारतीय रंगमंच और आरंभिक सिनेमा के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में देखा जा सकता है।

5. रंगमंच से सिनेमा की ओर

सेन की शुरुआती फिल्मों में रंगमंचीय प्रस्तुतियों के दृश्य प्रमुख थे। Bhramar, Hariraj और Buddhadev जैसी प्रस्तुतियों के दृश्यों का उल्लेख ऐतिहासिक स्रोतों में मिलता है। उनका लंबा कार्य ‘Alibaba and the Forty Thieves’ (1903) भी Classic Theatre की प्रस्तुति पर आधारित था। इसे बिना शर्त भारत की पहली फीचर फिल्म कहना विवादास्पद है, पर यह भारतीय कथा-आधारित चलचित्र के आरंभिक प्रयोगों में निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है।

6. विज्ञापन फिल्म के अग्रदूत

सेन ने चलचित्र की व्यावसायिक क्षमता को बहुत जल्दी पहचान लिया। Jabakusum Hair Oil और Edwards Tonic के विज्ञापन-फिल्मों से उनका नाम जुड़ा है। इस कारण उन्हें भारत में फिल्म विज्ञापन के आरंभिक अग्रदूतों में गिना जाता है। यह प्रयोग दर्शाता है कि उनके लिए फिल्म केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि संचार और बाजार का नया माध्यम भी थी।

7. स्वदेशी आंदोलन और राजनीतिक फिल्मांकन

1905 के बंग-भंग विरोध और स्वदेशी आंदोलन से संबंधित घटनाओं को सेन ने कैमरे में दर्ज किया। 22 सितंबर 1905 को कलकत्ता टाउन हॉल में हुई Anti-Partition Demonstration और Swadeshi movement से संबंधित फिल्म को कुछ इतिहासकार भारत की आरंभिक राजनीतिक फिल्मों में रखते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि भारतीय सिनेमा अपने आरंभिक दौर में ही राजनीतिक और ऐतिहासिक दस्तावेजीकरण का माध्यम बनने लगा था।

8. सेन, भाटवडेकर और फाल्के : ‘प्रथम’ का प्रश्न

भारतीय सिनेमा में ‘पहला फिल्मकार’ निर्धारित करना सरल नहीं है। एच. एस. भाटवडेकर ने बंबई में actuality films बनाईं; हीरालाल सेन ने कलकत्ता में रंगमंचीय दृश्यों, विज्ञापनों, स्थानीय घटनाओं और राजनीतिक गतिविधियों का फिल्मांकन किया; और दादासाहेब फाल्के ने 1913 में ‘राजा हरिश्चंद्र’ के माध्यम से भारतीय पूर्ण लंबाई कथा-फिल्म के लिए निर्णायक मॉडल प्रस्तुत किया। इसलिए इन तीनों के योगदान को प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि भारतीय फिल्म निर्माण के क्रमिक विकास के रूप में देखना अधिक तथ्यपरक है।

9. फिल्मों का नष्ट होना और ऐतिहासिक क्षति

सेन की लगभग चालीस या उससे अधिक फिल्मों का उल्लेख विभिन्न स्रोतों में मिलता है। दुर्भाग्य से उनकी फिल्मों का संग्रह आग में नष्ट हो गया। यदि ये फिल्में सुरक्षित रहतीं तो आरंभिक भारतीय कैमरा-भाषा, अभिनय शैली, रंगमंच-सिनेमा संबंध, विज्ञापन और तत्कालीन सामाजिक जीवन के अध्ययन के लिए अमूल्य दृश्य-साक्ष्य उपलब्ध होते। इस विनाश ने उनके योगदान को प्रत्यक्ष रूप से समझने की संभावनाओं को गंभीर रूप से सीमित कर दिया।

10. निष्कर्ष

हीरालाल सेन भारतीय सिनेमा के उन आधारभूत अग्रदूतों में हैं जिनका योगदान लोकप्रिय इतिहास में अपेक्षाकृत कम दिखाई देता है। वे फोटोग्राफर, प्रदर्शक, फिल्म निर्माता, तकनीकी प्रयोगकर्ता और उद्यमी थे। उन्होंने विदेशी चलचित्र तकनीक को भारतीय रंगमंच, बाजार, समाज और राजनीतिक जीवन से जोड़ा। इसलिए उन्हें केवल ‘फाल्के से पहले फिल्म बनाने वाले व्यक्ति’ के रूप में सीमित करना उचित नहीं है। भारतीय सिनेमा के आरंभिक इतिहास को अधिक समावेशी ढंग से पढ़ने पर सेन का कार्य भारतीय फिल्म निर्माण, विज्ञापन फिल्म, राजनीतिक फिल्मांकन और रंगमंच-सिनेमा संक्रमण की आधारभूत कड़ी के रूप में सामने आता है।

संदर्भ

1. Rajadhyaksha, Ashish & Paul Willemen. Encyclopedia of Indian Cinema. British Film Institute / Oxford University Press, revised edition.

2. McKernan, Luke. “Hiralal Sen.” Who’s Who of Victorian Cinema: A Worldwide Survey.

3. Banglapedia: National Encyclopedia of Bangladesh. “Sen, Hiralal.”

4. Ghosal, Avijit. “The little-known legacy of Hiralal Sen: The first Indian behind movie camera.” Hindustan Times, 19 November 2017.

5. “Remembering Hiralal Sen.” The Daily Star, 10 October 2008.

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