बड़ी बड़ी बातों से मर्म नही बनता ,
अन सुलझे कामों से कर्म नही बनता ;
संदेह नही तेरी बुद्धिमत्ता पे यार मेरे ,
बड़ा बुद्धिमान ही है बार बार गिरता /
Friday, 22 May 2009
बड़ी बड़ी बातों से मर्म नही बनता
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हिन्दी कविता hindi poetry
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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