Friday, 3 April 2009

शर्मिंदा कितना माहताब हुआ ------------------

तेरा चेहरा जब बेनकाब हुआ
शर्मिंदा कितना माहताब हुआ ।

तुने पूछा था मुझसे जो सवाल
पूरा उसी में मेरा जबाब हुआ ।

यार मेरा ,पाकर मोहब्बत का पैगाम
खिल के देखो,हँसी गुलाब हुआ ।

कुछ भी कहो पर अधूरा था
मुझसे मिलके पूरा तेरा शबाब हुआ ।

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