Monday, 4 January 2010
बुर्ज दुबई ;दुनिया की सबसे ऊँची ईमारत
(इन तमाम फोटो पे मेरा किसी तेरह का कोई कॉपी राईट नहीं है . ये मुझे मेल के रूप में प्राप्त हुई हैं, जिन्हें मै यंहा सामान्य जन की जानकारी हेतु दी रहा हूँ. मेरा कोई व्यावसाईक उदेश्य नहीं है . )
Friday, 1 January 2010
इस राष्ट्रीय सेमीनार में आप सभी का हार्दिक स्वागत है
आप सब का हम दिल खोल कर स्वागत करते हैं.
अगर आप इस सेमीनार में कोई आलेख पढना चाहते हैं तो आप उसके लिए सम्पर्क कर सकते है .
इस सेमीनार में दिल्ली,वनारस,लखनऊ और अल्लाहाबाद से कई विद्वान सहभागी हो रहे हैं .
हिंदी का राष्ट्रिय सेमीनार
१५-१६ जनवरी २०१० को पुणे विश्विद्यालय से सम्बद्ध चांदमल ताराचंद बोरा महाविद्यालय , रांजनगाँव ,शिरूर में २ दिवसीय
राष्ट्रीय संगोष्टी आयोजित की गई है . यदि आप इस संगोष्टी में सहभागी होना चाहते हैं तो संपर्क करे -
डॉ.इश्वर पवार
०२१-३८२८८४४४
०९६२३९६१४४३
०९४२२३१६६१७
संगोष्ठी में आप का स्वागत है
moments goes by .
events fades by ,
feelings remains ,
care and affection what it means ,
judgements may not come true ,
believe is hard to believe ,
but love is always there to see ।
cherish those who stand by you ,
implore the goodness who are ignored by you ,
have faith in your own divinity ,
be good to every one by your civility।
the year ahead may bring joy and happiness ,
the time ahead may bring pride in your achievement and humbleness।
All you wish ,
have growth and bliss ।
a life of content ,
full of good intent ।
of love and peace ,
of growth and ease।
WISH ALL A VERY HAPPY NEW YEAR .
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
====
( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
====
Thursday, 31 December 2009
नूतन क्या है जो मै लायुं /
नूतन क्या है जो मै लायुं ,
क्या नूतन मै भाव सजायुं ;
नित्य सुबह को नयी है किरणे ,
उनमे क्या मै और मिलायुं ,
नूतन क्या है जो मै लायुं ,
मेरी निजता तुममे है खोयी ,
तेरे सपनों से प्रभुता है जोई ;
नित नए पलों का उदगम हरदम ,
कितने उसमे सपने मै बोयुं ,
नूतन क्या है जो मै लायुं ,
तुझको तकते आखें है सोयी ;
नया है हर पल ,हर छन नया है ,
नयी है शामें सुबह नयी है ,
नया महिना साल नया है ,
क्या नया नया मै जोडूँ यार पुराने ,
क्या मै बदलूं प्यार पुराने ;
नूतन क्या है जो मै लायुं ,
क्या नूतन मै भाव सजायुं ;
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
====
( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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happy new year
नव वर्ष की पूर्व संध्या पर
नए साल का आगमन होने ही वाला है .इन्टरनेट पे हर जगह नए साल को मनाने की तैयारियों को ले कर चर्चा चल रही है .कुल मिलाकर शराब,लडकियां और नाच-गाने का ही जोर चारों तरफ है . ऐसे में एक सवाल मेरे मन में उठता है कि क्या भारत जैसे देश में इस तरह से नव वर्ष का स्वागत योग्य है ?
भारत जन्हा कि ७०% आबादी गाँवों की है , जन्हा देश का बड़ा हिस्सा गरीबी रेखा के नीचे जीवन जी रहा है .जहा एक बड़ी आबादी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही हो, वंहा नव वर्ष का स्वागत कैसे होना चाहिए ?
आप यह मत सोचिये की मैं आप को कोई सन्देश दे रहा हूँ और आप की शाम खराब कर रहा हूँ . मैं तो बस इतना चाहता हूँ की आप इस बात पे पूरी ईमानदारी के साथ सोंचे .
अंत में बस इतना ही की
नव वर्ष की शुभ कामनाए
२०१० आप के लिए मंगलमय हो .
Wednesday, 30 December 2009
नया साल जब आता है ,--------------------------------------
नया साल जब आता है ,याद तुम्हारी लाता है .
तेरे मेरे सपनो का ,
खंडहर मुझे दिखाता है .
नया साल ---------------------------------------
ना जाने तेरी कितनी ,
बातें याद दिलाता है . वक्त की शाखों से टूटे,
पत्तो सा बिखराता है .
नया साल -------------------------------------------
अपने सपनो की टूटन को,
हर आहट में दिखलाता है . अपनी हर छुअन को,
यादो में सहलाता है .
नया साल -------------------------------
आ जाओगी शायद फिर तुम,
एहसास यही दे जाता है .
मीठे-मीठे सपनो को ,
मेरे पास सुलाता है .
नया साल ----------------------------------
तेरे बाद उदास पड़े,
बिस्तर को सहलाता है .
उदास इसकी सलवटों में ,
मेरी हंसी उड़ाता है .
नया साल जब --------------------------------
happy new year -2010
Indian Cricketers launch their Websites
- Biography
- A Fan Zone or Fan club
- A Picture Gallery
- A webcast where each of these players talk about something to share with their fans.
- Harbhajan Singh : Website
- Ishant Sharma : Website
Tuesday, 29 December 2009
The Traffic People : Getting through Indian roads can be little easy
The Traffic People : Getting through Indian roads can be little easy
We all know how tough is Indian roads specially when its peak time. Its not about just road conditions but when everybody is on road with their wheels on nothing helps excpet your experince. The Traffic People is an initiative by Shailesh Sinha of Delhi to help you travel through Indian roads little easier with tools they have launched and few more they will be doing in coming months.
Current Traffic Status
Plan your Route through city traffic.
Traffic Radio helping you to find which road will give you blues croissing through. There is a radio cast availble almost every 30 minutes to help you analyse the condition of the roads.
Traffic Forecast : This will be intresting depending on what kind of analysis is do
As of now only Delhi is on their radar and we hope to see how well they go ahead with this challeneging tasks. You can send an SMS to 54242 with text as TRAFFICPEOPLE and you would get the latest traffic update on your phone. Good luck to them. Find more details on Traffic People
पथिक है बैठा राह तके है /
पथिक है बैठा राह तके है ,
हमसाया मिल जाये ,
जो सपनों को सींचे है ,
रुके पगों को क्या हासिल हो ,
जो हमराही मिल जाये ,
चलते रहना नियति हो जिसकी ,
क्यूँ राहों पे रुके है ;
पथिक है बैठा राह तके है ,
बड़ते कदमों संग दुनिया भागे ,
चलता प्रियतम दुनिया मांगे ,
क्यूँ वो इसको भूले है ;
पथिक है बैठा राह तके है ,
मंजिल पहले थमना कैसा ,
धारा संग भी बहना कैसा ,
मंजिल एक पड़ाव है ,
कुछ पल का ठहराव है ,
नयी चुनौती नयी मंजिले ,
नयी सड़क का बुलावा है ,
जो संग चला वो हम साया ,
जो साथ रहा वो ही है यारा ,
पथिक है बैठा राह तके है /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Monday, 28 December 2009
merry christmas
| |
Hope the New Year will bring peace, health and success
हिंदी का राष्ट्रिय सेमीनार
१५-१६ जनवरी २०१० को पुणे विश्विद्यालय से सम्बद्ध चांदमल ताराचंद बोरा महाविद्यालय , रांजनगाँव ,शिरूर में २ दिवसीय
राष्ट्रीय संगोष्टी आयोजित की गई है . यदि आप इस संगोष्टी में सहभागी होना चाहते हैं तो संपर्क करे -
डॉ.इश्वर पवार
०२१-३८२८८४४४
०९६२३९६१४४३
०९४२२३१६६१७
संगोष्ठी में आप का स्वागत है
अभिलाषा १०५
अभिलाषा ने किया सवाल .
अपने पूरे होने की ,
उसकी थी चाहत प्रिये .
उसकी बाते सुनकर के,
जीवन बस इतना बोला -
जो पूरी ही हो जाए,
अभिलाषा वो कंहा प्रिये .
---------अभिलाषा १०५
Saturday, 26 December 2009
अपना स्वार्थ और द्वेष बड़ा है /
आज समाज विभक्त है /
आडम्बर का चलन बड़ा है ,
गले लगाने का आचरण बड़ा है /
शंकाओं का धर्म बड़ा है ,
बातों में मिठास लिए ,
अविश्वास का करम बड़ा है /
मिलते हैं ऐसे जैसे अपना हो ,
भूले तुरंत जैसे सपना हो ,
खा लेंगे इक थाली में ,
जाती हमेशा याद आती है ,
नाम निकालेंगे देश का ,
पर झगडा होगा हमेशा प्रदेश का ,
सबसे छोटा देश यहाँ हैं ,
अपना स्वार्थ और द्वेष बड़ा है /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
====
( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Thursday, 24 December 2009
अभी मेरी चाहत का भावावेश बाकी है /
अजनबी बाहें न थीं ;
सिमट न सकी वो मेरे सिने में ,
मोहब्बत की उसमे चाहें न थीं /
बदन की प्यास न थी ,
उपेच्छा की आस न थी ,
मोहब्बत से कब इनकार था मुझको ,
उनसे दुरी काश न थीं /
अभी रोष बाकी है ,
अभी तो होश में हूँ मगर ,
प्यार का जोश बाकी है ;
चाहता हूँ बाँहों में भर सिने से लगा लूँ ,
अभी मेरे इश्क का आवेश बाकी है ,
ये यार मेरे अभी इश्क का उदघोष बाकी है ,
आखों में आंसू दिल में दर्द ,
अभी मेरी चाहत का भावावेश बाकी है /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Wednesday, 23 December 2009
सजे हो महफ़िल में आखों में चमक नहीं /
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लिप्त हैं वो अभिसार में ,
खोये हैं वो इक दूजे के प्यार में ;
ओठ पी रहे ओठों की मदिरा ,
चंचल मान और काम का कोहरा ;
मचल रहा बदन बदन के प्यास से ,
चहक रहा तन तन के साथ से,
चन्दन सा घर्षण मेंहंदी सी खुसबू ,
उत्तेजित काया मन बेकाबू ,
कम्पित उच्च उरोजों का वो मर्दन ,
चूमता बदन और हर्ष का क्रन्दन ,
उफनती सांसों का महकता गुंजन ,
दुनिया से अनजान पलों में ,
स्वर्गिक वो तनों का मंथन ,
कितना भींच सको अपने में ,
कितना दैविक वो छनों का बंधन ,
भावों की वो चरमानुभुती है ,
प्रेमोत्सव की परिणिति है ;
प्यार सिर्फ अभिसार की राह नहीं है यारों ,
पर प्यार की ही ये भी इक प्रीती है ,
प्यार का बंधन तन मन का आलिंगन ,
कितनी दिव्य ये भी इक रीती है /
================================
क्या वक़्त था वो भी ,क्या समय था वो भी ,
वो मुझपे मरती थी मै कितना डरता था ;
नजरें जब भी उनसे मिलती थी ,
पलकें पहले मेरी झुकतीं थी ,
पास जो आके वो इतराती ,
मेरी हालत पतली हो जाती ,
बात वो करती जब अदा से ,
कम्पित तन मन थर -थर करता ,
बदन कभी जब बदन से लगता ,
दिल मेरा धक् -धक् सा करता ,
मुस्काती थी तब वो खुल के ,
मै पत्थर का बुत बन जाता ,
हफ्ते बीते ,बीते मौसम ,
बदला साल महीने बीते ,
पता नहीं कब मैंने हाथ वो पकड़ा ,
कब उसने बंधन में जकड़ा ,
कब डूबा उसकी बातों में ,
कब खोया उसकी आखों में ,
वक़्त उड़ा फिर ,नहीं पता चला फिर ,
कब उसकी मगनी कब शादी बीती ,
असहाय हुआ मूक बना कब ,
क्यूँ उसने नहीं मुझको बोला ,
आखों में खालीपन लिए मै डोला ,
अब सिने को सिने की बारी थी ,
अब नए जीवन से लड़ने की तैयारी थी ,
नयी राह पे फिर मैं निकला ,
फिर जीवन को जीने की ठानी थी /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Sunday, 20 December 2009
आहत मन को प्यार से जीतो /
आहत मन को प्यार से जीतो ,
जजबातों को भाव से जीतो ;
कठिन समय को सब्र से जीतो ,
जीवन को तुम कर्म से जीतो /
दुविधावों को धर्म से परखो ,
रिश्तों को तुम मर्म से परखो ;
अभावों से जूझना सीखो ;
खुद पे तुम हँसना सीखो /
राहें तेरी राह तकेंगी ,
मंजिल तेरा मान करेगी ,
कठिनाई में अपनो को जीतो ,
अच्छाई में सबको पूंछों /
करुणा मत खोना तुम कभी ,
अभिमान सजोना ना तुम कभी ;
नम्रता गुण है अच्छायी का ;
झुकना आभूषण है ऊँचाई का /
अपने मन पे राज करो तुम ,
माया पे अधिकार करो तुम ;
सत से ना तुम पीछे हटना ;
ना अपना ना दूजा तू करना /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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आ इक दूजे के सपने जिए हम /
चाहा था इसी चाल पे उनके ,
मचल उठती थी धड़कने उनकी अदाओं पे ,
क्यूँ चाहता हूँ वो बदले मेरी बातों पे ;
आवारापन मेरी सोचों का जो तुझे भाया था ,
मेरी जिस बेफक्री ने तुझे रिझाया था ,
मेरी ख़ामोशी जो तुझे लुभाती थी ,
क्यूँ मेरी वो आदतें तुझे खिजाती है ;
आ खोजे इक दूजे को हम नयी पनाहों में ,
समझे हालातों संग ढलना नयी फिजाओं में ,
बदले तौर तरीके पर खुद को ना खोये हम ,
आ इक दूजे के सपने जिए हम /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Get ready to borne extra tax if you own more than one car
As confirmed by officials, they are planning to impose extra taxes during the time of registration itself in form of Road Tax, Parking charge , Area pricing etc.
But it’s still to be clear whether by adopting this kind of plan , Govt will be able to control the situation or not, as the loop holes are yet to flash out. There is high probability that hereafter people will start doing the new car registration in different other family member’s name or even in the name of close relatives.
Though there are ifs & Buts in the proposed plan, but the initiative was really needed for controlling the traffic situation of the City. If the plan become successful , I think all the other Metro Cities are going to follow the capital to solve the problem of their Traffic system .
Courtesy : Economic Times.
अभिलाषा १०१ ------------------------------------------------------
माना की हो दूर तुम लेकिन,
दिल से दूर कंहा हो मेरे ?
आंखे बंद कर देख लिया,
चाहा जब भी तुम्हे प्रिये .
--------अभिलाषा १०१
Saturday, 19 December 2009
कभी तो चाहत को आवाज दे देते /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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अजीब इश्क था
चाहा था उसने असमर्थ इरादों से ;
दूर हुआ नहीं पास गया नहीं ,
इज़हार हुआ नहीं इकरार किया नहीं ;
अजीब इश्क था ,
दिल से गया नहीं धडकनों में बसा नहीं /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Friday, 18 December 2009
MYTH ABOUT FAT
DIFFERENT TYPES OF FAT
- Unsaturated fat
- Monounsaturated fat
- Polyunsaturated fat
- Trans fat
- Cis fat
- Omega fatty acids:
- Saturated fat
- Fatty acid
- Essential fatty acidUnsaturated fat
-
- Monounsaturated fat
- Polyunsaturated fat
- Trans fat
- Cis fat
- Omega fatty acids:
- Saturated fat
- Fatty acid
-
Essential fatty acid
WHY FAT IS INDISPENSABLE?
- Fat supply you energy in the form of adipose tissue.
- Fat plays an important role in brain and eye health.
- Fat gives elasticity and prevents ageing of skin.
- Fat acts as insulation against temperature changes by subcutaneous fat stores.
HOW MUCH FAT SHOULD WE TAKE?
- Fat intake should not exceed 25-30 per cent of our calories.
- 8 – 10 per cent of fat should come from saturated fat. Saturated fats are found in animal products like meat and full fat dairy.
- The American Heart Association recommends a trans-fat intake of less than 1 per cent
- For staying fit we should not consume more than 6 tsp of oils in a day.
- In fact we should consume less than 300mg of cholesterol a day.
Thursday, 17 December 2009
उस दिन /
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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Wednesday, 16 December 2009
Shoe Laundry : Get a facelift of old sneakers
seeing this Mumbai-based Sandeep Gajaka gave birth to the idea of Shoe Laundry in 2004. Sandeep has given the people of getting their sneakers cleaned and giving them a fresh look.
Initially started his business with Rs 7000 in his own room, Sandeep handled the entire business of his own. From picking to deliver it back was managed by him all alone. It took time for people to digest the concept of shoe laundry but soon Sandeep Gajaka’s unique business flourished. Now Shoe laundry is a mature and stable process which follows a 10 step cleaning and repairing process
Sandeep’s laundry now provides service to leading showrooms, 5 star hotels in Mumbai and many hospitals. Charging Rs 150 pair – does it sounds much? Actually no. This charge is inclusive of pick up from your door step, washing, drying, even repairing /carrying out touch-ups giving a new life to your sneakers. They also replace the worn out laces if any. What else can you demand at this charge? The present revenue is around Rs 80 Lakhs with 15 employees.
I really liked this weird idea of Mr Sandeep Gajaka. The concept is really creative and solves the problem of in fact every house. Heard and read about shoe laundry in India for first time in India and i think that not many people are aware that such a service exists in our country
उज़्बेक साहित्य में स्त्री लेखन : प्रमुख साहित्यकारों की सूची
उज़्बेक साहित्य में स्त्री लेखन : प्रमुख साहित्यकारों की सूची नोट: नीचे दी गई सूची में आपके साझा हिंदी संकलन में उल्लिखित साहित्यकारों के ...
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