Thursday, 16 July 2026

अहमद फ़राज़ के बेस्ट 20 शेर

 अहमद फ़राज़ के बेस्ट 20 शेर


1.ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो

नशा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें


2.कुछ तो मिरे पिंदार-ए-मोहब्बत का भरम रख

तू भी तो कभी मुझ को मनाने के लिए आ


3.डूबते डूबते कश्ती को उछाला दे दूँ

मैं नहीं कोई तो साहिल पे उतर जाएगा


4.जुदाइयाँ तो मुक़द्दर हैं फिर भी जान-ए-सफ़र

कुछ और दूर ज़रा साथ चल के देखते हैं


5.इस ज़िंदगी में इतनी फ़राग़त किसे नसीब

इतना न याद आ कि तुझे भूल जाएँ हम


6.ज़िंदगी से यही गिला है मुझे

तू बहुत देर से मिला है मुझे


7.यूँही मौसम की अदा देख के याद आया है

किस क़दर जल्द बदल जाते हैं इंसाँ जानाँ


8.कितना आसाँ था तिरे हिज्र में मरना जानाँ

फिर भी इक उम्र लगी जान से जाते जाते


9.ये ख़्वाब है ख़ुशबू है कि झोंका है कि पल है

ये धुँद है बादल है कि साया है कि तुम हो


10.जब भी दिल खोल के रोए होंगे

लोग आराम से सोए होंगे


11.ये कौन फिर से उन्हीं रास्तों में छोड़ गया

अभी अभी तो अज़ाब-ए-सफ़र से निकला था


12.तेरी बातें ही सुनाने आए

दोस्त भी दिल ही दुखाने आए


13.कैसा मौसम है कुछ नहीं खुलता

बूँदा-बाँदी भी धूप भी है अभी


14.ख़ुश हो ऐ दिल कि मोहब्बत तो निभा दी तू ने

लोग उजड़ जाते हैं अंजाम से पहले पहले


15.हम कि दुख ओढ़ के ख़ल्वत में पड़े रहते हैं

हम ने बाज़ार में ज़ख़्मों की नुमाइश नहीं की


16.यूँही मर मर के जिएँ वक़्त गुज़ारे जाएँ

ज़िंदगी हम तिरे हाथों से न मारे जाएँ


17.जिन के हम मुंतज़िर रहे उन को

मिल गए और हम-सफ़र शायद


18.लोग हर बात का अफ़्साना बना देते हैं

ये तो दुनिया है मिरी जाँ कई दुश्मन कई दोस्त


19.किसे ख़बर वो मोहब्बत थी या रक़ाबत थी

बहुत से लोग तुझे देख कर हमारे हुए


20.क्या लोग थे कि जान से बढ़ कर अज़ीज़ थे

अब दिल से महव नाम भी अक्सर के हो गए

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