Sunday, 27 February 2011

praveen bajpayee -kamgaar patrkarita puraskar 2011


आप को जान कर ख़ुशी होगी की मजदूर मसीहा -प्रवीण बाजपयी को कामगार  पत्रकारिता पुरस्कार २०११ से सम्मानित किया जा रहा है .

तरह .
      जब प्रवीन भाई कल्याण में रहते थे तो  उनका घर ही मेरा घर था , भाभी से माँ तुल्य प्रेम और स्नेह मिलता था . लेकिन कतिपय व्यक्तिगत कारणों  से प्रवीण भाई को  परेल  रहने के लिए जाना पड़ा . मैं भी अपने  शोध कार्य और  फिर नौकरी में  ऐसा उलझा कि अब फ़ोन पे ही दुआ-सलाम हो पाता  है .
    लेकिन इन  दूरियों ने दिलों  के रिश्ते को कमजोर नहीं होने दिया. अपनेपन कि ऊर्जा  हमेशा बनी रही . जब भी कभी मैंने भईया को कल्याण बुलाया वे  सारी  व्यस्तताओं में से भी समय निकाल  कर  आये . स्वास्थ की तकलीफों के बीच  आये . पारिवारिक  और राजनैतिक समस्याओं को दर  किनार कर आये . मुझे मेरे इस भाई पे गर्व है .
             आप शायद  यह सोच रहे होगें  कि मैं ब्लॉग पे किसी अपने करीबी का  गुणगान क्यों कर रहा हूँ ? मित्रो, जिन्दगी में कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनका हम सम्मान तो करते  हैं, लेकिन कभी  औपचारिक  रूप से कह नहीं पाते . लेकिन उम्र के लगभग ३० वसंत पूरा करते करते  मुझे  यह लगने लगा है कि ,किसी  से  प्यार हो, किसी के प्रति स्नेह हो,आदर हो तो हमे कहना जरूर चाहिए. क्या पता जिन्दगी कल ये मौका दे या ना दे .
 वैसे  मुंबई वालों के लिए प्रवीण बाजपयी कोई  नया नाम  नहीं है . आप  सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ  के मुंबई डिविजन के  अध्यक्ष  हैं. रेल केसरी पत्रिका के  कार्यकारी  संपादक हैं ,और एक  अच्छे कवि भी हैं . अगर आप नेट पे ही प्रवीण जी से मिलना  चाहें , तो निम्नलिखित लिंक का उपयोग कर सकते  हैं 
 praveenbajpai.crms@gmail.कॉम 
 ttp://www.facebook.com/reqs.php#/photo.php?pid=385531&op=1&o=global&view=global&subj=1635027107&id=1635027107 
   

डॉ.शीतला प्रसाद दुबे जी का सम्मान

 बुधवार दिनांक ०२ मार्च २०११ की शाम ७.३० बजे से कल्याण पश्चिम स्थित लक्ष्मण देवराम सोनवाने महाविद्यालय के प्रांगण में  स्नेह मिलन सम्मान समारोह आयोजित किया जा रहा है. इस अवसर पर कई विद्वानों को सम्मानित किया जायेगा . 
             डॉ. शीतला प्रसाद दुबे जी का भी सम्मान इस अवसर पर किया जाएगा .  हाल ही में हिंदी अध्ययन मंडल , मुंबई विश्विद्यालय के अध्यक्ष के रूप में  के.सी.कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. शीतला प्रसाद दुबे जी की  नियुक्ति हुई है. आप विगत कई वर्षों से अध्यापन कार्य से जुड़े हुवे हैं. आप पीच.ड़ी के गाईड भी हैं. कई विद्यार्थी आप के मार्ग  दर्शन में अपना शोध कार्य सफलता पूर्वक पूरा कर चुके हैं. 
         आप का सम्मान करते हुवे संस्था गौरवान्वित है.  अध्ययन-अध्यापन से जुड़े लोगों का सम्मान हमारी संस्था हमेशा से ही करती आ रही है. 








    

Sunday, 13 February 2011

क्योंकि अब भी तेरा ही सामान हूँ ./

अजीब सी आदत से परेशान हूँ 
तुम्हे  सोच -सोचकर  हैरान  हूँ 


जो था,वो सब कुछ तुम्हे दे दिया,
अब बाजार क़ी एक बंद दुकान हूँ .


अब भी बहुत याद आती हो तुम,
सोचो  तो , कितना   नादान    हूँ . 




अकेला हूँ, आज इस वलेंटाइन  डे पर ,



क्योंकि अब  भी   तेरा ही  सामान हूँ .



जब खुद के ही कातिल हो गए /Saint Valentine's Day






             जब खुद के  ही कातिल हो गए 
           मकाम सारे मुझे हासिल हो गए 

       तू  सबसे   हसीन    सपना   था  मेरा  
      अफ़सोस! दुनियादारी  में  गाफिल  हो गए 

तेरा  प्यार  था  स्नेह  के   समंदर जैसा 
   तेरे  बाद  तो  रेतीला  साहिल  हो गए 

तेरी  बातें , तेरी  जुल्फें ,तेरी   यादें  सनम 
इनमे  इतना   उलझे  क़ी   जाहिल  हो गए   

आज  फिर  जब  वलेंटाइन  डे  है  
हम  तेरी  यादों  से  बोझिल  हो गए .  
-- 

मोहब्बत में हम भी इंसान हो गए.

किसी  पत्रिका में पढ़ा हुआ  मोहब्बत पर एक शेर आप सभी के लिए 
  सारे पेचीदा मसले आसान हो गए ,
मोहब्बत में हम भी इंसान हो गए. 
                               

या हम ही ठिकाने लग जाएँ

हाल ही  में भाई नदीम सिद्दीकी जी से मुंबई में एक कवि सम्मेलन में मुलाकात हुई. उनका एक शेर वेलेंटाइन  डे क़ी पूर्व संध्या  पर बड़ा कारगर  लगा. 


 तेरा इन्तजार करेंगे, चाहे ज़माने लग जाएँ 
 या तो तू आ जाए,या हम ही ठिकाने लग जाएँ . 

Saturday, 12 February 2011

आज डॉ. निरूपम बाजपई से मिलने पर

 आज डॉ. निरूपम बाजपई  से  मिलने  पर बहुत संतोष और ख़ुशी का अनुभव हुआ . संतोष इस बात का क़ी भारत में ऐसी प्रतिभाएं है जो इस देश का मस्तक हमेशा ऊँचा रखने क़ी ताकत रखते हैं और ख़ुशी इस बात क़ी क़ि मुझ जैसे मामूली व्यक्ति को इतनी सहजता और अपनेपन से डॉ. निरूपम जी से मिलने का अवसर मिला.
                     डॉ. निरूपम जी किसी कार्य से आज कर्जत आये हुवे थे, श्रीमती बिरला के साथ किसी समाजसेवी कार्य में सहभागी होने. वापसी में वे अपने कल्याण  स्थित रिश्तेदार के यंहा दोपहर के भोजन के लिए आये. उनके ये रिश्तेदार कल्याण शहर के प्रसिद्ध उद्योगपति  एवम समाजसेवी श्री  कृष्णलाल मिश्रा जी थे. उनके बड़े बेटे श्री आशीष मिश्रा मेरे प्रिय मित्रों में हैं. उन्ही के मध्यम से डॉ. निरूपम जी के  आगमन क़ि खबर मिली.
                   फिर क्या था, आनन्-फानन में महाविद्यालय में एक संगोष्ठी का प्रस्ताव पारित करा कर, आमंत्रण पत्र और एक गुलदस्ता लेकर मैं निरूपम जी के पास  पहुँच गया. उन्होंने बड़ी ही सहजता से मेरा प्रस्ताव स्वीकार कर लिया और भावी संगोष्ठी में उपस्थिति का आश्वाशन भी दिया. हमने खाना साथ ही खाया. ४-५ घंटे लगातार हमने कई  मुद्दों पे बात-चीत की. अपने विदेश दौरों से जुड़े कई प्रसंग डॉ. साहब ने बताये. भारत के उज्जवल भविष्य के प्रति उनके मन में कंही कोई आशंका नहीं  थी. अंत में हम उन्हें छोड़ने के लिए  ईमारत के निचे आये और  उन्हें विदा दी .
                  डॉ. के  सहज ,सरल  और सजग व्यक्तित्व ने मुझे  काफी  प्रभावित किया. आप का जो परिचय नेट पे  उपलब्ध है, वो  इस प्रकार है ----------

Dr. Nirupam Bajpai is Director of the Columbia Global Centers | South Asia and a Senior Development Advisor (Full Professor according to Columbia University norms) at the Earth Institute at Columbia University in New York. He is also a member of the United Nations Millennium Project on the Millennium Development Goals, the internationally agreed goals to reduce extreme poverty, disease, and hunger by the year 2015.

Over the last 15 years, Dr. Bajpai has been working at different U.S. universities beginning at the Department of Economics at the Massachusetts Institute of Technology (MIT) in 1992; Harvard University from 1995 to 2002 and since July 2002 at Columbia University. Dr. Bajpai worked at the Indian Council for Research on International Economic Relations before moving to the Economics Department at MIT. Prior to his arrival at Columbia University, Dr. Bajpai worked for seven years at Harvard University, most recently at the Kennedy School of Government’s Center for International Development leading the Harvard India Program and prior to that at the Harvard Institute for International Development, Harvard University. During this period, Dr. Bajpai also worked at MIT's Media Lab Asia (MLA) as a Senior Fellow.

A macroeconomist by training, Dr. Bajpai’s research interests include the links of health and development, economic geography, globalization, emerging markets, economic development and growth, global competitiveness, and macroeconomic policies in developing and developed countries. His work focuses on economic policy reform in India, China, sub-Saharan Africa and the South and East Asian regions. Currently, he is an Associate Editor of the journal Asian Economic Papers, published by MIT Press and is also on the Editorial Board of the journal Economic Change and Restructuring published by Springer.

Dr. Bajpai is considered to be a leading economic advisor of his generation. For almost two decades, Dr. Bajpai has been studying the challenges of economic development, poverty alleviation, and globalization and advising governments, both at the federal and the state levels. In India, Dr. Bajpai is also working towards combining economic development with environmental sustainability to promote the mitigation of anthropogenic climate change.

Since June 2004, Dr. Bajpai has had the high honor and privilege of advising the Honorable Dr. Manmohan Singh, Prime Minister of India and several of his cabinet ministers, including the Minister of Health and Family Welfare. Earlier, between 1999 and 2004, Dr. Bajpai served as an economic advisor to the Honorable Atal Bihari Vajpayee, former Prime Minister of India and to several of his cabinet ministers, including the Ministers of Finance, Commerce and Industry, and Information Technology.

Dr. Bajpai has led several teams of social and physical scientists to conduct research and advice several State Governments on “Scaling up Services in Rural India” wherein teams led by Dr. Bajpai were working with Rural Communities in India. As far as his work in India is concerned, Dr Bajpai's work most notably along with Professor Jeffrey Sachs has helped advice policymakers on a variety of issues relating to the Indian economy and India’s economic reforms, both at the federal and state levels.

Among others, his research and advice has helped implement the following:
  1. On his recommendation, a pilot project on carbon capture and geologic sequestration is being put together in Andhra Pradesh;
  2. He advises the Minister of Health and Family Welfare on the National Rural Health Mission; and has advised the Planning Commission and the state governments of Andhra Pradesh, Karnataka, Madhya Pradesh, Rajasthan, Tamil Nadu and Uttar Pradesh on scaling up primary health and education services in rural areas and reforms for improving service delivery;
  3. Along with Prof. Sachs, he recommended to Prime Minister Vajpayee that India set-up national goals in the Year 2000 of doubling India’s per capita income by the end of the first decade of the 21st century and attaining universal primary literacy by 2010, goals that Prime Minister Vajpayee announced during his Independence Day address to the nation on August 15, 2000. The Sarva Shiksha Abhiyan was launched in 2001 on his recommendation.
  4. He recommended strategies for Health for All via the Sarva Swasthya Abhiyan and is credited to have coined this name.
  5. He played a key role to help set-up the Indian National Commission on Macroeconomics and Health, among many other initiatives.
  6. Based on Dr. Bajpai’s recommendations, the Government of India has initiated a scheme of scholarships for students from sub-Saharan African countries to pursue their Master’s Degrees in Indian institutions in Computer Science and Electrical Engineering. Currently, seven students are pursuing their Master’s Degrees in IIT, Bombay; seven in IIT, Delhi and one at the Vellore Institute of Technology.  The first batch of four students from the Mekelle Institute of Technology, Ethiopia has returned to their parent institution and has begun teaching undergraduate students.
  7. Based on Dr. Bajpai’s recommendations, the Narayana Hrudayalaya hospital in Bangalore is setting up a telemedicine program with a teaching hospital in Kumasi, Ghana to offer round-the-clock video consultation, primarily for heart patients from remote areas and to help build capacity in the Ghanaian hospital, and
  8. Working with several sub-Saharan African leaders, both in East and West Africa, Dr. Bajpai is helping connect Indian technology and innovations through its vast expertise and experience in the areas of agriculture and Green Revolution technologies, agricultural R&D, rural small-scale industry, non-conventional energy, and information technology.
Other economic policy reforms that have utilized his ideas and recommendations are in the areas of growth strategy (an inclusive growth strategy keeping the bottom 20 percent of the population in mind), fiscal reform, export orientation (In 2000, SEZs in India were introduced on Prof. Sachs’ and his recommendations) and the role of states in promoting export-led growth, small-scale industry, enhancing the global competitiveness of India’s information and communications technology industry (ICT) and the use of ICT in the education and health sectors.

Dr. Bajpai serves on the advisory Board of the World Economic Development Congress based in New York and is a leading Asia specialist for the Asian Economic Panel and the National Bureau of Asian Research.

Dr. Bajpai is widely published and is the author or co-author of dozens of scholarly articles on a variety of issues relating to economic reforms in developing countries.  He has written extensively on macroeconomic policy and management focusing on fiscal policy, and on the role of trade and foreign direct investment policies on growth and development.  In 1998, he co-edited a volume entitled “India in the Era of Economic Reforms” along with Jeffrey Sachs and Ashutosh Varshney which was published by Oxford University Press.  In 2010, he co-authored a volume entitled “Improving Access and Efficiency in Public Health Services” along with Jeffrey Sachs and Ravindra Dholakia which was published by Sage Publications. His most recent work focuses on evaluating the performance of the National Rural Health Mission; scaling up primary health and education services in rural India focusing on Andhra Pradesh, Karnataka, Madhya Pradesh, Rajasthan, Tamil Nadu and Uttar Pradesh; global services outsourcing analyzing issues relating to cost and quality.  For the U.N. Millennium Project, his papers include “Reaching the Millennium Development Goals in South Asia”; “Primary Health Care in India: Issues of Coverage and Quality” and Primary Education in India: Quality and Coverage Issues”.

Dr. Bajpai is the recipient of several honors and awards. On the eve of India’s 59th Republic Day on January 25, 2008, Dr. Bajpai was awarded the ‘Padma Shri’ by the President of India, which is a high civilian honor bestowed by the Government of India. In the category of ‘Literature and Education’, Dr. Bajpai is the youngest awardee ever since the Padma Awards were instituted in 1954 having been conferred the award at the age of 45.
Nirupam receiving Padma Medal Nirupam receiving Padma Scrollडॉ.

हिंदी ब्लागिंग संगोष्ठी में आने वाले संभावित मेहमान


               २०-२१  जनवरी २०१२ को हिंदी ब्लागिंग :स्वरूप,व्याप्ति और संभावनाएं इस विषय पर  प्रस्तावित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में जो मेहमान  आ सकते  हैं , उनकी पहली सूची इस प्रकार है 

  1.  डॉ. नामवर सिंह 
  2.  डॉ. अशोक चक्रधर 
  3.  पद्मश्री डॉ. निरूपम  बाजपई
  4. डॉ.विद्या बिंदु सिंह 
  5.  डॉ. राम जी तिवारी 
  6.  डॉ. अशोक मिश्रा 
  7.  श्री  अविनाश  वाचस्पति 
  8.  श्री प्रमोद ताम्बट
  9.  डॉ. सतीश पाण्डेय 
  10.  डॉ. संजीव दुबे 
  11.  डॉ. शीतला प्रसाद दुबे 
  12.  डॉ. अनिल सिंह 
  13.  डॉ. एम्.पी.सिंह 
  14.  डॉ. ईश्वर पवार 
  15.  डॉ. मिथलेश अवस्थी 
  16.  डॉ. विजय अवस्थी 
  17.  डॉ. अनिता श्रीवास्तव 
  18.  डॉ. श्याम सुंदर पाण्डेय 
  19.  डॉ. ऋषि कुमार मिश्रा 
  20.  डॉ. वेद प्रकाश मिश्रा 
  21.  श्री मानव मिश्रा 
  22.  श्री आशीष मोहता  
  23.  डॉ. आर. एन. त्रिपाठी 
  24.  डॉ. संतोष मोटवानी 
  25.  डॉ. हरीश अरोरा 
  26.  श्री रविन्द्र प्रभात 
  27. श्री सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी 
  28.  डॉ. बालकवि सुरंजे 
  29.  श्री सुनील  सांवरा 
  30.  श्री दिनेश बावरा 
  31.  श्री अनूप सेठी 
  32.  श्री आलोक भट्टाचार्य 
  33.  डॉ. निर्मला त्रिपाठी 
  34.  डॉ. सुमनिका सेठी 
        आप से भी अनुरोध है क़ि  यदि आप इस संगोष्ठी में सम्मिलित होना चाहते हैं तो सूचित करें.
 मनीष मिश्रा 
 ९३२४७९०७२६ 

     

Sunday, 6 February 2011

आलेख लिखने के लिए उप विषय

हाल ही में जो पोस्ट मैंने प्रस्तावित  ब्लागिंग संगोष्ठी के सन्दर्भ में लिखी थी ,उसी सम्बन्ध में कई लोगों ने आलेख लिखने के लिए  उप विषय मांगे .मूल विषय है-''हिंदी ब्लागिंग: स्वरूप,व्याप्ति और संभावनाएं ''
 आप इस  मूल विषय से  जुड़कर अपनी  सुविधा के अनुसार उप विषय चुन सकते हैं 
जैसे क़ि ---------------- 
१- हिंदी ब्लागिंग का इतिहास 
 २- हिंदी ब्लागिंग का प्रारंभिक स्वरूप  
३- हिंदी ब्लागिंग  और तकनीकी समस्याएँ 
 ४-हिंदी ब्लागिंग  और हिंदी साहित्य 
 ५-हिंदी के प्रचार -प्रसार में हिंदी ब्लागिंग का योगदान 
 ६-हिंदी अध्ययन -अध्यापन में ब्लागिंग क़ी उपयोगिता 
 ७- हिंदी टंकण : समस्याएँ और निराकरण 
 ८-हिंदी ब्लागिंग का अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य 
 ९-हिंदी के साहित्यिक ब्लॉग 
 १०-विज्ञानं और प्रोद्योगिकी से सम्बंधित हिंदी ब्लॉग 
 ११- स्त्री विमर्श से सम्बंधित हिंदी ब्लॉग 
 १२-आदिवासी विमर्श से सम्बंधित हिंदी ब्लॉग  
१३-दलित विमर्श से सम्बंधित हिंदी ब्लॉग 
 १४- मीडिया और समाचारों से सम्बंधित हिंदी ब्लॉग 
 १५- हिंदी ब्लागिंग के माध्यम से धनोपार्जन 
 १६-हिंदी ब्लागिंग से जुड़ने के तरीके 
 १७-हिंदी ब्लागिंग का वर्तमान परिदृश्य 
 १८- हिंदी ब्लागिंग का भविष्य 
 १९-हिंदी के श्रेष्ठ ब्लागर 
 २०-हिंदी तर विषयों से हिंदी ब्लागिंग का सम्बन्ध 
२१- विभिन्न साहित्यिक विधाओं से सम्बंधित हिंदी ब्लाग 
 २२- हिंदी ब्लागिंग में सहायक तकनीकें 
 २३- हिंदी ब्लागिंग और कॉपी राइट कानून 
२४- हिंदी ब्लागिंग और आलोचना 
 २५-हिंदी  ब्लागिंग और  साइबर ला 
 २६-हिंदी ब्लागिंग और आचार संहिता का प्रश्न 
 २७-हिंदी ब्लागिंग के लिए निर्धारित मूल्यों क़ी आवश्यकता 
 २८-हिंदी और भारतीय भाषाओं में ब्लागिंग का तुलनात्मक अध्ययन 
 २९-अंग्रेजी के मुकाबले हिंदी ब्लागिंग क़ी वर्तमान स्थिति  
३०-हिंदी साहित्य और भाषा पर ब्लागिंग का प्रभाव 
 ३१- हिंदी ब्लागिंग के माध्यम से रोजगार क़ी संभावनाएं  
३२- हिंदी ब्लागिंग से सम्बंधित गजेट /स्वाफ्ट वयेर 
 ३३- हिंदी ब्लाग्स पर उपलब्ध जानकारी कितनी विश्वसनीय ?
 ३४-हिंदी ब्लागिंग : एक प्रोद्योगिकी सापेक्ष विकास यात्रा 
 ३५- डायरी विधा बनाम हिंदी ब्लागिंग 
 ३६-हिंदी ब्लागिंग और व्यक्तिगत पत्रकारिता  
३७-वेब पत्रकारिता में हिंदी ब्लागिंग का स्थान 
 ३८- पत्रकारिता और ब्लागिंग का सम्बन्ध 
 ३९- क्या ब्लागिंग को साहित्यिक विधा माना जा सकता है ? 
४०-सामाजिक सरोकारों से जुड़े हिंदी ब्लाग
-- 

DR.manish kumar mishra

Saturday, 5 February 2011

हिंदी ब्लागिंग : स्वरूप, व्याप्ति और संभावनाएं '' -दो दिवशीय राष्ट्रीय संगोष्ठी

प्रिय हिंदी ब्लॉगर बंधुओं ,
           आप को सूचित करते हुवे हर्ष हो रहा है क़ि आगामी शैक्षणिक वर्ष २०११-२०१२ के जनवरी माह में २०-२१ जनवरी (शुक्रवार -शनिवार ) को ''हिंदी ब्लागिंग  : स्वरूप, व्याप्ति और संभावनाएं ''  इस विषय पर दो दिवशीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जा रही है.  विश्विद्यालय अनुदान आयोग    द्वारा  इस संगोष्ठी को संपोषित  किया जा सके इस सन्दर्भ में  औपचारिकतायें पूरी की जा रही हैं. के.एम्. अग्रवाल महाविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा आयोजन की जिम्मेदारी ली गयी है. महाविद्यालय के प्रबन्धन समिति ने संभावित संगोष्ठी के पूरे खर्च को उठाने की जिम्मेदारी ली है. यदि किसी कारणवश कतिपय संस्थानों से आर्थिक मदद नहीं मिल पाई तो भी यह आयोजन महाविद्यालय अपने खर्च पर करेगा.
               संगोष्ठी की तारीख भी निश्चित हो गई है (२०-२१ जनवरी २०१२ )  संगोष्ठी में अभी पूरे साल भर का समय है ,लेकिन आप लोगों को अभी से सूचित करने के पीछे मेरा उद्देश्य यह है क़ि मैं संगोष्ठी के लिए आप लोगों से कुछ आलेख मंगा सकूं.
             दरअसल संगोष्ठी के दिन उदघाटन समारोह में हिंदी ब्लागगिंग पर एक पुस्तक के लोकार्पण क़ी योजना भी है. आप लोगों द्वारा भेजे गए आलेखों को ही पुस्तकाकार रूप में प्रकाशित किया जायेगा . आप सभी से अनुरोध है क़ि आप अपने आलेख जल्द से जल्द भेजने क़ी कृपा    करें  .
           आप सभी के सहयोग   क़ी आवश्यकता  है . अधिक  जानकारी  के लिए संपर्क  करें 


डॉ.  मनीष  कुमार  मिश्रा 
 के.एम्. अग्रवाल महाविद्यालय 
 गांधारी  विलेज , पडघा  रोड 
 कल्याण -पश्चिम 
 pin.421301
 महाराष्ट्र
mo-09324790726

Sunday, 30 January 2011

अवधी सम्मलेन का आयोजन




द्वितीय अवधी सम्मेलन 13 फरवरी, 2011 को स्वानंद आश्रम परिसर, येऊर, ठाणे में आयोजित होगा।


देश के अवधी अंचलों व नेपाल से अवधी विद्वान, कवि व कलाकार उपस्थित रहेंगे।


परिचर्चा, सृजन संवाद, विभूतियों का सम्मान एवं लोक काव्य संध्या का आयोजन भी होगा।






देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के निकटवर्ती ठाणे शहर की सुरम्य येऊर हिल्स स्थित परमपूज्य स्वानंद बाबा आश्रम परिसर में रविवार, 13 फरवरी, 2011 को सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक अवधी सम्मेलन का आयोजन प.पू.स्वानंद बाबा सेवा न्यास के सहयोग से किया जा रहा है। इसमें सुलतानपुर, प्रतापगढ़, इलाहाबाद, कानपुर, लखनऊ, बाराबंकी, फैजाबाद, बहराइच, आदि अवधी अंचलों के साथ नई दिल्ली व नेपाल से अवधी विद्वान, कवि व कलाकार हिस्सा लेंगे। अवधी सम्मेलन में परिचर्चा, सृजन संवाद, अवधी विभूतियों के सम्मान के साथ लोक काव्य संध्या का आयोजन भी होगा।






अवधी सम्मेलन की परिचर्चा "अवधी की चुनौतियाँ" में बोली-बानी के संपादक व अवधी अकादमी के अध्यक्ष जगदीश पीयूष, अवध भारती समिति के महामंत्री डॉ. रामबहादुर मिश्र, अवधी विकास संस्थान के अध्यक्ष एड. विनोद मिश्र, दोपहर का सामना के कार्यकारी संपादक प्रेम शुक्ल, सुप्रसिद्ध गीतकार समीर, सहारा समय के ब्यूरो प्रमुख सैयद सलमान, सिटी चैनल के मुख्य संपादक अजय पत्रकार / सौरभ ओमर विचार व्यक्त करेंगे। इसकी अध्यक्षता मुंबई विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. रामजी तिवारी करेंगे व संचालन अभियान संस्था के अध्यक्ष अमरजीत मिश्र करेंगे। सृजन संवाद में नेपाल के अवधी विद्वान लोकनाथ वर्मा, राहुल नेपाली अवधी की प्रवृत्तियों को, लाइव इंडिया के प्रमुख संवाददाता रवि तिवारी, मीडिया में अवधी तथा कवि डॉ. अशोक गुलशन अवधी कविता के गुणों को रेखांकित करेंगे।






लोक काव्य संध्या में सुप्रसिद्ध अवधी गायिका मालिनी सिंह बिसेन, व्याख्या मिश्रा, सुप्रसिद्ध गायक रवि त्रिपाठी, कवि निर्झर आजमगढ़ी, अशोक टाटंबरी(फैजाबाद) व गीतकार कमल किशोर भावुक, लखनऊ के साथ मुंबई के प्रमुख स्थानीय कवि शिरकत करेंगे। सम्मेलन के अवसर पर "विकलांग की पुकार" साप्ताहिक के अभय मिश्र के अतिथि संपादन में अवधी गौरव विशेषांक का विमोचन पं. दुर्गा प्रसाद पाठक द्वारा होगा। इस सम्मेलन के आयोजन में उद्योगपति समाजसेवी चंद्रशेखर आर. शुक्ला, उद्योगपति बबलू पांडेय, कवि देवमणि पांडेय, पत्रकार सरताज मेहदी का सहयोग है।






इस कार्यक्रम के लिए सुप्रसिद्ध गीतकार जावेद अख्तर, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष एवं सांसद डॉ. पी.एल. पूनिया (बाराबंकी) व डॉ. संजय सिंह (सुलतानपुर) से भी संपर्क किया गया है।






अवधी सम्मेलन, मुंबई के बारे में :


विश्व प्रसिद्ध काव्य साहित्य व मूल्यवान लोक साहित्य की भाषा अवधी के प्रचार-प्रसार, उन्नयन व संवर्धन के लिए अवधी सम्मेलन, मुंबई की भावनात्मक स्थापना 14 दिसंबर, 2009 को राजेश विक्रांत द्वारा की गई। संस्था ने 22 जनवरी, 2010 को मुंबई में प्रथम अवधी सम्मेलन का आयोजन रंगभारती-हमलोग के सौजन्य से किया। इसमें जगदीश पीयूष, डॉ. रामजी तिवारी, प्रेम शुक्ल, पं. किरण मिश्र, आनंद त्रिपाठी, हृदयेश मयंक, द्वारिकानाथ मिश्रा, बृजनाथ, अनुराग त्रिपाठी, हरिश्चंद्र, रामप्यारे सिंह रघुवंशी, ओमप्रकाश तिवारी, एड. विजय सिंह, वर्ल्ड ऑफ ग्रेट फेसेस के संपादक अभिलाष अवस्थी, देवमणि पांडेय, अभय मिश्र, रासबिहारी पांडेय, बोधिसत्व, दिवाकर द्विवेदी, अर्चना मिश्रा, मनोज मुंतशिर, सुरेश मिश्र व कमलेश पांडेय तरुण उपस्थित रहे।






प.पू.स्वानंद बाबा सेवा न्यास के बारे में :


ठाणे के येऊर हिल्स स्थित प.पू. स्वानंद बाबा आश्रम का प्रबंधन इस न्यास द्वारा किया जाता है। इस न्यास के प्रमुख ट्रस्टी प्रेम शुक्ल हैं। आश्रम में स्वानंद समाधि, महादेव मंदिर, हनुमान मंदिर के साथ सामुदायिक सुविधायुक्त स्वानंद सदन का निर्माण ट्रस्ट द्वारा किया गया है। होली उत्सव, गुरुपूर्णिमा, श्रावण उत्सव, शरद पूर्णिमा, वासंतिक नवरात्रि, शारदीय नवरात्रि, दीपपर्व, महाशिवरात्रि, मकर संक्रांति पर आश्रम में भव्य दिव्य आयोजन होता है जिसमें कई हजार धर्म प्रेमी व श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। शरद पूर्णिमा की रात आश्रम परिसर में आयाजित होने वाली काव्य निशा की ख्याति दूर-दूर तक है। न्यास की ओर से समय-समय पर साहित्यकारों-पत्रकारों कलाकारों के सम्मान का कार्यक्रम व मेडिकल शिविरों का आयोजन भी पं. दुर्गा प्रसाद पाठक व श्रीमती शांति प्रेम शुक्ल के मार्गदर्शन में होता है।


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अधिक जानकारी हेतु सम्मेलन के मीडिया प्रभारी आफताब आलम से 09224169416, ई-मेलः aftaby2k@hotmail.com पर अथवा www.rajeshvikrant.blogspot.com तथा www.aftabalamhindustani.blogspot.com पर भी लॉगऑन किया जा सकता है।

अपनी सहभागिता सुनिश्चित करते हुवे

हाल ही में के.एम्. अग्रवाल महाविद्यालय कल्याण में एक राष्ट्रिय संगोष्ठी का आयोजन हुआ. इस संगोष्ठी में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करते हुवे हमने अपने इस ब्लॉग की तरफ से स्मृति चिन्ह प्रायोजित किये.
          शिक्षा से जुड़े किसी भी आयोजन में हम आगे भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करते रहेंगे.

     

national seminar on hindi blogging

In  january 2012 we are planning to organize a two days national seminar on  '' hindi blogging: svroop,vyapti aur sambhavnayen.''
              expected date will be 20st-21nd  january 2012. for the same we have send our preposal to university grant commission and maharashtra hindi sahity akadmi. k.m.agrawal college managemaent and principal madam has all ready given the permission for the said seminar.
        we are planning to publish a book of selected articles on above seminar topic. so if you are intrested in the same, then kindly contact to me.

DR.MANISH KUMAR MISHRA
 K.M.AGRAWAL COLLEGE
 GANDHARI VILLAGE
PADGHA ROAD
 KALYAN-WEST
 PIN-421301
 DIST. THANE
 MAHARASHTRA
INDIA
MO-9324790726

Tuesday, 25 January 2011

दीवानगी है , पागलपन है  मोहब्बत या आवारापन ;
चाहे जों तू नाम दे तू इश्क ही मेरा जीवन है :



गम ही दे पर दे इन्तहा वो भी ,

गम  ही  दे पर दे इन्तहा वो भी ,
खुशियों  पे तेरा अब बस नहीं
चाहा है टूट कर जिसको
 मिटा दे हस्ती गम दे तू ही

दर्द  का मेला चाहूं तुझसे
तकलीफों का झोला चाहूं तुझसे
चाहत का क्या है वो तू कब का भूली
ग़मों का लम्हा चाहूं अब तुझसे


Tuesday, 18 January 2011

आपके आलेख आमंत्रित हैं.

आपके आलेख आमंत्रित हैं
                               ''  हिंदी ब्लॉग्गिंग ''  पर  फरवरी २०१२ में आयोजित होनेवाली राष्ट्रीय संगोष्ठी के लिए आप के आलेख सादर आमंत्रित हैं.इस संगोष्ठी में देश-विदेश के कई विद्वान सहभागी हो रहे हैं.
             आये हुवे सभी आलेखों को पुस्तकाकार रूप में प्रकाशित करने क़ी योजना है. आपसे अनुरोध है क़ी आप अपने आलेख जल्द से जल्द भेजने क़ी कृपा करें.
         इस सम्बन्ध में अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें --------------
 डॉ.मनीष कुमार मिश्रा
 के.एम्. अग्रवाल कॉलेज
 पडघा रोड,गांधारी विलेज
 कल्याण-पश्चिम ,४२१३०१
 जिला-ठाणे
 महाराष्ट्र ,इण्डिया
 mailto:manishmuntazir@gmail.com
 wwww.onlinehindijournal.blogspot.कॉम
 ०९३२४७९०७२६

Thursday, 13 January 2011

national seminar on hindi blogging in february 2012

हिंदी ब्लॉग्गिंग : स्वरूप,व्याप्ति और संभावनाएं
                                     इस विषय पर फरवरी २०१२ में एक राष्ट्रीय संगोष्ठी अपने महाविद्यालय और विश्विद्यालय अनुदान आयोग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित करने जा रहा हूँ.
                                    सभी हिंदी ब्लॉग्गिंग परिवार से जुड़े लोगों से निवेदन है क़ी अपनी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करते हुवे अपने सुझाव भी प्रेषित करें .

 डॉ.मनीष कुमार मिश्रा
 प्रभारी -हिंदी विभाग
 के.एम्. अग्रवाल महाविद्यालय
 कल्याण-पश्चिम ४२१३०१
 जिला-ठाणे
महाराष्ट्र
  manishmuntazir@gmail.कॉम

 

Monday, 10 January 2011

महफ़िल तो सजी हुई है पर हर बंदा यहाँ उदास है

महफिले पुरजोर है जामों का यहाँ जोर है
मुस्करा रहा कोई किसी का अटठाहँसों पे जोर है ;
महफ़िल तो सजी हुई है
 पर हर बंदा यहाँ उदास है
 किसी को रिश्तोंकी है उलझने
कोई business का यहाँ दास है
नौकरी जों कर रहा वो ना करी कैसे करे
कहता फिरे कुछ भी मगर उसका भी कोई boss है
औरतें उलझी हुई किस राह तक पति का साथ दे
कैसे समेटे जिंदगी कैसे खुशियों को राह दें

बचपन का मेला याद अब भी
अल्ल्हड़पन की मस्ती साथ अब भी
यौवन का भावों का घेरा 
आज कहाँ है उसका बसेरा


महफ़िल तो सजी हुई है
 पर हर बंदा यहाँ उदास है

उल्लास तो बिखरा पड़ा
हर मन में दबी कोई प्यास है
कहीं परिवार का उलझाव है
कहीं कैरियर का जंजाल है
कहीं पतली होती रिश्ते की डोर है
कहीं सिमटते विश्वास का छोर है

मुस्काते चेहरे खिले भाव
दिल के कोनों में उदासी की छावं

मिल रहे गले यार से यार यहाँ
मिला रहे एक दूजे से हाथ अनजान यहाँ
कोई पीने का शौक़ीन कोई जुटा खाने पे
कोई बतियाये खुल के कोई चुपचाप यहाँ
कोई थिरके है गाने पे
कोई दे रहा थाप यहाँ


गम दर्द तकलीफों से भाग रहा हर कोई है
हर्ष खुशियाँ उल्लास चाह रहा हर कोई है
शाम बिना सुबह कब आये
खुशियों का रंग तकलीफों पे ही आये है


महफ़िल तो सजी हुई है
 पर हर बंदा यहाँ उदास है
भागती हुई ये जिंदगी
ठहरा हुआ अहसास है
वक़्त से खेल रहा हर कोई
पर वक़्त ही सरताज है


महफ़िल तो सजी हुई है
 पर हर बंदा यहाँ उदास है /

Tuesday, 4 January 2011

हकीकते जिंदगी स्वीकार कर तू खुल के

हकीकते  जिंदगी  स्वीकार  कर  तू  खुल  के  ,

मुश्किलों  की  बारिश  में  तू  मुस्करा   खुल  के ,
वक़्त  का ये  खेल  है  कर्मे  जिंदगी  ,

हार  हो  या  जीत  हो  तू  खिलखिला  खुल  के  !

Monday, 27 December 2010

पति पत्नी का रिश्ता हो मिनट का पल का या हो दिन महीने साल का

पति पत्नी का रिश्ता हो मिनट का पल का या हो दिन महीने साल का
मिटा सके ये इतना बस नहीं है काल का ;
शिव की भभूती औ  माता का सिंदूर भरा था औ भाव अटूट प्यार का
तब मांग भरी थी तेरी मैंने इश्वर स्वयम गवाह था ,
कैसे भूलूं वो घड़ियाँ मैं आंसूं से सींचा था रिश्ता प्यार का ,
झूठ कहे या भूले तू पर ये रिश्ता मेरे हर जनम हर सांस का ;

भाव से बड़कर क्या दुनिया में
प्यार से अच्छा क्या इन्सा में

सही गलत उंच नीच का फैसला कोई कैसे करे है
है मोहब्बत खुदा का जज्बा उसे बुरा कैसे कहे है /
राधा कृष्ण भजते सभी हैं
द्रौपदी को कहते सती हैं  
रीती में उलझे है क्यूँकर
प्रीती बिन जीना हो क्यूँ कर

प्यार से बड़कर पूजा नहीं कोई इस जगत इस संसार में
क्यूँ झिझक कैसी ये दुविधा क्या मैं नहीं तेरे दिल की छाँव में
सरल नहीं  है राह  प्रीती की पर सरल कहाँ जीना संसार में
क्यूँ हो अब तक तू उलझी क्या कमी रही मेरे  प्यार में ;

प्यार को रब समझा और तुझको जिंदगी
मेरे जीने का उद्देश्य तू ही है तेरी करूँ मै बंदगी /

नाम ले मेरा या पति कह ले या कुछ भी कह के पुकार ले
मेरा जीवन तेरा साँसे तेरी क़त्ल करे या साथ ले

करे बहस इनकार करे या बचपने का नाम दे
समझे भावुकता पागलपन या अर्थहीन कह टाल दे
चाहे समझे कोरी बातें या मुर्खता का नाम दे
 मेरा जीवन तुझको अर्पण तू खुशियों दे या आंसुओं की सौगात दे  /

Sunday, 26 December 2010

दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी

दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी
                    शहरीकरण का प्रभाव - इस विषय पर  दिनांक-२४-२५ जनवरी को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित क़ी जा रही है. इस  संगोष्ठी में देश भर से  करीब  ३०० विद्वान शामिल होंगे. यदि आप इसमें भाग लेना चाहते हैं तो कृपया संपर्क करें .

Wednesday, 15 December 2010

Nana Patekar's speech & Kavita

Monday, 13 December 2010

कुछ तो कहो, कुछ तो लिखो ;

कुछ तो कहो, कुछ तो लिखो ;
सजाई है जब एक महफ़िल , महफ़िल में कभी तो खिलो ;
क्यूँ चुप हो ,क्या बात है, क्यूँ मुद्दे नहीं मिलते ;
जीवन का हर पल एक बात है ,क्यूँ बात नहीं करते ;
चुप रहने से कुछ हासिल नहीं होता ,
बिना अपनी बात कहे, समाज के बदलाव में शामिल नहीं होता ;
गर चीजें बदलनी है बेहतरी के लिए ,
खुल के कहो बात अपनी ,देश की तरक्की के लिए

Friday, 10 December 2010

फ्रेंच भाषा भी खूब है पर मुझसे कितनी दूर है

जिंदगी गुजर रही अब नए आशियाने में ,
सीख रहे हर पल कुछ नया जिंदगी नए पैमाने में 
सोना वही है जागना वही है पर साथ नए अनजाने है
दूर देश में बैठे हम आये यहाँ कमाने हैं /


फ्रेंच भाषा भी खूब है पर मुझसे कितनी दूर है 
भरमाती है तड़पाती है  है और बड़ा तरसाती है ,
भागा पीछे वो आगे भागे अलसाया तो वो मुस्काए 
नजर मिलाये पास बुलाये नित नए वो ठौर दिखाए 

फ्रेंच भाषा भी खूब है पर कितनी दूर है 

Thursday, 9 December 2010

State Level Seminar - Translation Triggers Employability (TTE)

March 10th - 11th, 2011 Hindi State Level Seminar - Translation Triggers Employability (TTE)

UGC sponsored National Seminar in the third week of January 2011.

Hindi Department of Khalsa College Amritsar is going to organize UGC sponsored National Seminar in the third week of January 2011.

NET or SLET mandatory for appointment of lecturers

Observing that “the courts should not venture into academic arena which is best suited for academician and experts”, the Delhi High Court has upheld the mandatory requirement of clearing the National Eligibility Test (NET) or the State Level Eligibility Test (SLET) for appointment to the post of lecturer.
The University Grants Commission had framed this rule called Regulations-2009 in July last year.
However, those who have secured a Ph.D. degree in compliance with the UGC Regulations-2009 (Minimum Standards and Procedure for award of Ph.D.) are exempted from this rule.
The judgment by a Division Bench of the Court comprising Justice Dipak Misra and Justice Manmohan came on a petition by the All India Researchers' Co-ordination Committee challenging the Constitutional validity of fixing the minimum eligibility requirement for appointment as a lecturer.
Counsel for the petitioner, Amit Kumar, had challenged the rule mainly on the ground that the UGC had framed it on a direction by the Union Government which is against the express provisions in the UGC Act, 1956, for framing regulations.
He further submitted that the Act empowers the UGC to frame rules for regulating teaching, research and examinations in universities across the country independent of any external pressure from the Government.
Another submission by him was that it had been the consistent policy of the UGC and the Government to grant exemption to those who had obtained M.Phil. or Ph.D. degree before the cut-off date.
A similar exemption was also provided by Regulations-2006 which had given rise to a legitimate expectation that a person having an M.Phil. or a Ph.D. degree would be eligible for the post of lecturer, he further submitted, adding that an impression was created that they would not have to pass the NET.
Counsel for the Centre Neeraj Chaudhury defended the Government's directive to the UGC to frame the rule as the Act empowers it to issue directions to the regulatory body on questions of policy relating to national interest.
UGC counsel Amitesh Kumar submitted that under Section 20 of the Act the Centre is empowered to issue directions to the UGC on questions of policy relating to national purposes and such directions are binding on the UGC.
In pursuance of the direction issued by the Government, the UGC in exercise of its power conferred by Section 26(1)(e) and (g) read with Section 14 of the Act had framed the Regulations, 2009, he added.
The Bench dismissed the petition saying that it is bereft of merit. Also, it has not been implemented retrospectively.

Wednesday, 8 December 2010

भारतीय लोक साहित्य पर रास्ट्रीय संगोष्ठी

भारतीय लोक साहित्य पर रास्ट्रीय संगोष्ठी ;
                                  दिनांक २७-२८ जनवरी २०११ को फरुखाबाद में दो दिवसीय रास्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित क़ी जा रही है. संगोष्ठी का विषय है लोक साहित्य .
 आप सभी इसमें  आमंत्रित हैं.

हिंदी विवेक

Current Issue
 
हिंदुस्थान प्रकाशन संस्था के अंतर्गत चलनेवाले उपक्रम

  हिंदी विवेक
मुख्य कार्यालय : ५/१२, कामत इंडस्ट्रीयल इस्टेट, ३९६ स्वा. वीर सावरकर मार्ग, प्रभादेवी, मुंबई - ४०००२५. दूरध्वनी : ०२२-२४२२१४४०, २४२२५६३९, फॅक्स : ०२२-२४३६३७५६.
प्रशासकीय कार्यालय : हिंदुस्थान प्रकाशन संस्था, विवेक भवन (कृष्णा रिजेन्सी), १२ वा मजला, प्लॉट क्र. ४०, सेक्टर क्र. ३०, सानपाडा (प), नवी मुंबई - ४००७०५. दूरध्वनी : ०२२-२७८१०२३५/३६, फॅक्स : ०२२-२७८१०२३७.
विभागीय कार्यालय :
पुणे : वीरेंद्र हाईट्स, तिसरा मजला, ५५७, सदाशिव पेठ, लक्ष्मी रोड, पुणे - ३०. दूरध्वनी : २४४८१३९२.
देवगिरी : राज हाईट्स, पहिला मजला, सी-विंग, फ्लॅट क्र. १०१, एम.जी.एम. हॉस्पिटल समोर, सेवन हिल्स, संभाजीनगर, (औरंगाबाद), दूरध्वनी : ०२४०-२४८७७११.
रत्नागिरी : कापडी एनक्लेव, बी-४, दुसरा मजला, गयालवाडी गेट जवळ, रत्नागिरी-कोल्हापुर रोड, खेडशी, ता.जि. रत्नागिरी - ४१५६३६.
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विवेक - ५/१२, कामत इंडस्ट्रीय इस्टेट, ३९६ स्वा. वीर सावरकर मार्ग, प्रभादेवी, मुं

समय, स्मृति और मनुष्य की तलाश : ‘अक्टूबर उस साल’ का आलोचनात्मक पुनर्पाठ

  समय, स्मृति और मनुष्य की तलाश : ‘अक्टूबर उस साल’ का आलोचनात्मक पुनर्पाठ समकालीन हिंदी कविता का एक महत्त्वपूर्ण पक्ष यह है कि उसने जीवन के ...