ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज़, ताशकंद, उज़्बेकिस्तान
मध्य एशिया में प्राच्यविद्या, भाषा, साहित्य, इतिहास और अंतरराष्ट्रीय अध्ययन का प्रमुख केंद्र
Tashkent State University of Oriental Studies (TSUOS) — उज़्बेक में Toshkent davlat sharqshunoslik universiteti — उज़्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में स्थित प्राच्य अध्ययन का एक विशिष्ट उच्च शिक्षण एवं शोध संस्थान है। विश्वविद्यालय का वर्तमान स्वरूप 2020 में स्थापित हुआ, किंतु इसकी शैक्षणिक परंपरा 1918 में स्थापित Turkestan Institute of Oriental Studies तक जाती है। विश्वविद्यालय के आधिकारिक इतिहास के अनुसार, 1918 का यह संस्थान मध्य एशिया में प्राच्य अध्ययन के लिए स्थापित पहला उच्च शिक्षण संस्थान था।
इस दृष्टि से TSUOS केवल एक भाषा-शिक्षण विश्वविद्यालय नहीं है। इसकी अकादमिक संरचना में एशियाई भाषाओं और साहित्य के साथ इतिहास, दर्शन, नृविज्ञान, अंतरराष्ट्रीय संबंध, अर्थशास्त्र, अनुवाद, पत्रकारिता तथा क्षेत्र-अध्ययन भी सम्मिलित हैं। वर्तमान विश्वविद्यालय की आधिकारिक संरचना भी इसी बहुविषयक स्वरूप को दर्शाती है।
ऐतिहासिक विकास
TSUOS का इतिहास एक शताब्दी से अधिक लंबी प्राच्यविद्या-परंपरा से जुड़ा है। नवंबर 1918 में ताशकंद में Turkestan Institute of Oriental Studies की स्थापना हुई। प्रथम शैक्षणिक वर्ष में 234 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया था। उस समय अरबी, फ़ारसी, चीनी, पश्तो, उर्दू और तुर्की जैसी पूर्वी भाषाओं के साथ उज़्बेक, ताजिक, किर्गिज़, तुर्कमेन और तातार तथा अंग्रेज़ी, जर्मन और फ़्रेंच जैसी यूरोपीय भाषाएँ भी पढ़ाई जाती थीं। इसके साथ भारत, ईरान, अफ़ग़ानिस्तान, तुर्किस्तान और मध्य एशिया से संबंधित इतिहास, भूगोल, नृविज्ञान तथा इस्लाम और शरिया संबंधी विषयों का भी अध्ययन कराया जाता था।
1922 तक संस्थान के पुस्तकालय में लगभग 5,300 पुस्तकें तथा 200 से अधिक पांडुलिपियाँ उपलब्ध थीं। 1924 में इस संस्थान को Central Asian State University में एक Faculty के रूप में सम्मिलित कर दिया गया। बाद के पुनर्गठन के फलस्वरूप यह संरचना 1930 में समाप्त हो गई।
1944 में Central Asian State University में Oriental Faculty को पुनः स्थापित किया गया। इसके बाद ईरानी अध्ययन, भारतीय भाषाओं, पूर्वी तुर्किस्तान तथा निकट और मध्य पूर्व के इतिहास जैसे क्षेत्रों में शिक्षण विकसित हुआ। 1949 में इस पुनर्स्थापित संकाय से विद्यार्थियों का पहला समूह स्नातक हुआ। विश्वविद्यालय के इतिहास के अनुसार, आगे चलकर यहाँ अरबी, फ़ारसी, पश्तो, हिन्दी, उर्दू, चीनी, उइग़ुर और तुर्की सहित अनेक भाषाओं का अध्ययन-अध्यापन विकसित हुआ।
1965 में पूर्वी देशों के साहित्य के अध्ययन के लिए एक विशेष विभाग की स्थापना की गई। भाषा-अध्यापन को व्यावहारिक बनाने के उद्देश्य से ईरान, अफ़ग़ानिस्तान, भारत और अरब देशों से अध्यापकों को भी आमंत्रित किया जाता रहा।
स्वतंत्र संस्थान से विश्वविद्यालय तक
1990 में Tashkent State University के Oriental Faculty के आधार पर Institute of Oriental Studies स्थापित किया गया। इसके बाद 15 जुलाई 1991 को इसे पुनर्गठित कर Tashkent State Institute of Oriental Studies (TSIOS) बनाया गया। स्वतंत्र संस्थान बनने के बाद इसकी शैक्षणिक गतिविधियों और विशेषज्ञताओं का विस्तार हुआ तथा जापानी, कोरियाई और तुर्की सहित अन्य भाषाओं एवं साहित्य के अध्ययन को भी संस्थागत आधार मिला।
इसके इतिहास में अगला महत्त्वपूर्ण परिवर्तन 16 अप्रैल 2020 को हुआ। उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति के निर्णय No. PP/PQ-4680 के आधार पर Tashkent State Institute of Oriental Studies को पुनर्गठित करके वर्तमान Tashkent State University of Oriental Studies स्थापित किया गया।
अतः यह अंतर समझना आवश्यक है कि विश्वविद्यालय के रूप में TSUOS की स्थापना 2020 में हुई, जबकि उसकी संस्थागत एवं अकादमिक परंपरा 1918 तक जाती है।
वर्तमान अकादमिक संरचना
विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर अगस्त 2026 में उपलब्ध वर्तमान संरचना के अनुसार TSUOS में निम्न प्रमुख अकादमिक इकाइयाँ सूचीबद्ध हैं:
1. Institute of Languages and Literature of the Peoples of the East
यह संस्थान TSUOS की भाषा और साहित्य संबंधी विशेषज्ञता का प्रमुख केंद्र है। इसके अंतर्गत आधिकारिक रूप से निम्न Higher Schools सूचीबद्ध हैं:
- Higher School of Arabic Studies
- Higher School of Iranian and Afghan Studies
- Higher School of Turkology
- Higher School of South Asian Languages
- Higher School of Japanese Studies
- Higher School of Korean Studies
- Higher School of Chinese Studies
- Higher School of Translation Studies and International Journalism
यह संरचना स्पष्ट करती है कि विश्वविद्यालय में प्राच्य भाषाओं को केवल भाषा के रूप में नहीं, बल्कि संबंधित क्षेत्रों के साहित्य, समाज और संस्कृति के व्यापक संदर्भ में पढ़ने की परंपरा है।
2. Faculty of Eastern Civilization and Philosophy
वर्तमान आधिकारिक सूची में इसके अंतर्गत निम्न विभाग दिए गए हैं:
- Department of History of Eastern Countries and Anthropology
- Department of Eastern Philosophy and Hermeneutics
- Department of History of the Peoples of Central Asia
पूर्वी देशों के इतिहास और नृविज्ञान से संबंधित विभाग में एशियाई देशों के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक इतिहास पर शोध किया जाता है तथा शोध-परिणामों को मोनोग्राफ, पुस्तकों, अध्ययन-सामग्री और शोध प्रकाशनों के माध्यम से सामने लाया जाता है।
3. Institute of Foreign Policy and International Economic Relations
इसके अंतर्गत वर्तमान में निम्न विभाग सूचीबद्ध हैं:
- Department of International Relations
- Department of Economics and Management
- Department of Foreign Economic Activity
- Department of Tourism
इस संरचना से यह स्पष्ट होता है कि आधुनिक TSUOS पारंपरिक Oriental Studies को समकालीन अंतरराष्ट्रीय संबंध, अर्थव्यवस्था, विदेश नीति और पर्यटन जैसे क्षेत्रों से भी जोड़ता है।
4. Faculty of Applied Sciences
इसके अंतर्गत:
- Department of Western Languages
- Department of Pedagogy and Psychology
- Evening and Correspondence Department
सूचीबद्ध हैं।
दक्षिण एशिया और भारतीय अध्ययन
भारत के संदर्भ में TSUOS का महत्त्व विशेष है। इसका कारण यह है कि भारतीय और दक्षिण एशियाई अध्ययन यहाँ कोई हाल में आरंभ हुआ विषय नहीं है। विश्वविद्यालय के आधिकारिक इतिहास के अनुसार 1918 में ही भारत का भूगोल तथा भारतीय क्षेत्र से संबंधित अध्ययन प्रारंभिक पाठ्यक्रम का हिस्सा थे। 1944 के बाद पुनर्गठित Oriental Faculty में North Indian Philology का विभाग भी था, जो बाद में भारतीय भाषाओं और वर्तमान दक्षिण एशियाई भाषा-अध्ययन की परंपरा से जुड़ा। हिन्दी और उर्दू भी विश्वविद्यालय की दीर्घकालीन भाषा-अध्ययन परंपरा का हिस्सा रही हैं।
वर्तमान संरचना में Higher School of South Asian Languages का होना इस ऐतिहासिक परंपरा की निरंतरता को दर्शाता है।
इस प्रकार भारत के अध्ययन को TSUOS के व्यापक Oriental Studies ढाँचे में भाषा, साहित्य, इतिहास और क्षेत्र-अध्ययन की दीर्घकालीन परंपरा के संदर्भ में देखा जा सकता है।
मध्य एशियाई अध्ययन
विश्वविद्यालय की एक अन्य महत्त्वपूर्ण विशेषता स्वयं मध्य एशिया पर केंद्रित अध्ययन है। Department of History of the Peoples of Central Asia की संस्थागत स्थापना 1991 में हुई थी। बाद के वर्षों में इसके नाम और संरचना में परिवर्तन हुए। विभाग में मध्य एशिया के सामान्य इतिहास, राज्य-व्यवस्था, ऐतिहासिक भूगोल, स्रोत-अध्ययन, इतिहासलेखन, धार्मिक विश्वदृष्टि, सामाजिक-राजनीतिक विकास, भौतिक एवं आध्यात्मिक संस्कृति तथा जातीय-सांस्कृतिक संबंधों जैसे विषयों पर अध्ययन कराया जाता है।
विभाग Bachelor स्तर पर History तथा Anthropology and Ethnology और Master स्तर पर Historiography, Source Studies and Methods of Historical Research तथा Ethnography, Ethnology and Anthropology जैसे क्षेत्रों में अध्ययन से जुड़ा है।
इस विभाग के सहयोगी संस्थानों में Uzbekistan Academy of Sciences के इतिहास एवं प्राच्य अध्ययन से संबंधित संस्थान, National Archive of Uzbekistan तथा कई प्रमुख संग्रहालय भी सूचीबद्ध हैं।
शोध और ज्ञान-संसाधन
TSUOS में शिक्षण के अतिरिक्त शोध की संस्थागत व्यवस्था भी मौजूद है। विश्वविद्यालय की वर्तमान संरचना में Research Center for Oriental Culture and Heritage, doctoral structures, gifted students के research activities से संबंधित विभाग, Scientific Council तथा doctoral degree awarding scientific councils जैसी इकाइयाँ सूचीबद्ध हैं।
पांडुलिपि और स्रोत-अध्ययन की परंपरा भी विश्वविद्यालय के इतिहास का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। आधिकारिक इतिहास बताता है कि पुराने Institute of Oriental Studies में विद्यार्थियों को पांडुलिपियों और लिखित स्रोतों के वैज्ञानिक अध्ययन के लिए तैयार करने हेतु Source Studies and Textology से संबंधित विभाग विकसित किया गया था।
अंतरराष्ट्रीय दृष्टि और भावी रणनीति
TSUOS की 2024–2027 Strategy में अंतरराष्ट्रीयकरण, डिजिटल शिक्षा, श्रम-बाज़ार की आवश्यकताओं के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, विदेशी निवेश/सहयोग को आकर्षित करना, science–education–production integration, student-centred education और global reach को प्राथमिकताओं में रखा गया है। विश्वविद्यालय ने स्वयं को Central Asia के specialized universities के बीच एक educational “hub” के रूप में विकसित करने का रणनीतिक लक्ष्य भी व्यक्त किया है।
इसी रणनीति में पारंपरिक Faculty of Eastern Philology and Translation Studies को Institute of Languages and Literature of Eastern Peoples में विकसित करने तथा इतिहास-दर्शन संबंधी संरचना में Central Asian Studies, Eastern history, philosophy, source studies और anthropological research पर अधिक ध्यान देने की योजना वर्णित है।
नेतृत्व
विश्वविद्यालय की वर्तमान आधिकारिक Administration page पर Gulchehra Shavkatovna Rikhsieva को विश्वविद्यालय प्रशासन में शीर्ष नेतृत्व के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। उनके पास philological sciences में Candidate degree तथा Professor का अकादमिक पद उल्लिखित है।
चूँकि विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक पदों और विभागीय संरचनाओं में परिवर्तन हो सकते हैं, वर्तमान पदाधिकारियों के संबंध में विश्वविद्यालय की अद्यतन आधिकारिक वेबसाइट को ही अंतिम आधार माना जाना उचित है।
TSUOS का शैक्षणिक महत्त्व
TSUOS की विशिष्टता मुख्यतः तीन स्तरों पर दिखाई देती है। पहला, इसकी ऐतिहासिक जड़ें 1918 तक जाती हैं, जिससे इसे मध्य एशिया में संस्थागत Oriental Studies की सबसे पुरानी परंपराओं में स्थान मिलता है। दूसरा, यहाँ भाषा और साहित्य को इतिहास, दर्शन, नृविज्ञान, अर्थशास्त्र और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जोड़कर पढ़ने की बहुविषयक व्यवस्था विकसित हुई है। तीसरा, विश्वविद्यालय पूर्वी एशिया, दक्षिण एशिया, मध्य एशिया, पश्चिम एशिया तथा अन्य क्षेत्रों के अध्ययन को एक ही विशिष्ट संस्थागत ढाँचे में समाहित करता है।
भारत के लिए भी इस विश्वविद्यालय का महत्त्व विशेष रूप से दक्षिण एशियाई भाषाओं, हिन्दी-उर्दू अध्ययन और भारत संबंधी ऐतिहासिक शैक्षणिक परंपरा के कारण है। इसीलिए TSUOS को भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संपर्कों के अध्ययन के एक महत्त्वपूर्ण संस्थागत केंद्र के रूप में देखा जा सकता है—हालाँकि किसी विशिष्ट द्विपक्षीय कार्यक्रम या समझौते के बारे में दावा केवल संबंधित आधिकारिक दस्तावेज के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
संपर्क
Tashkent State University of Oriental Studies (TSUOS)
20, Amir Temur Street
Tashkent – 100060
Uzbekistan
फोन: +998 71 233 34 24 / +998 71 233 52 24
ईमेल: info@tsuos.uz
स्रोत एवं तथ्य-सत्यापन
इस आलेख में जानबूझकर ऐसे आँकड़े नहीं जोड़े गए हैं जिनकी वर्तमान आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं थी। उदाहरण के लिए, कुल वर्तमान विद्यार्थी-संख्या, कुल विदेशी विद्यार्थियों की संख्या, देशों की संख्या अथवा वर्तमान international MoUs की संख्या को बिना ठोस अद्यतन स्रोत के प्रस्तुत नहीं किया गया है।
मुख्य स्रोत Tashkent State University of Oriental Studies की आधिकारिक वेबसाइट है:
विशेष रूप से विश्वविद्यालय का आधिकारिक इतिहास, वर्तमान faculties/departments, administration और 2024–2027 strategy संबंधी पृष्ठों से तथ्यों का सत्यापन किया गया है।
निष्कर्षतः, Tashkent State University of Oriental Studies आधुनिक उज़्बेकिस्तान का एक विशिष्ट उच्च शिक्षण और शोध विश्वविद्यालय है जिसकी वर्तमान विश्वविद्यालयीय संरचना 2020 की है, लेकिन जिसकी Oriental Studies की संस्थागत विरासत 1918 तक पहुँचती है। भाषा और साहित्य से लेकर इतिहास, दर्शन, नृविज्ञान, अंतरराष्ट्रीय संबंध और अर्थशास्त्र तक इसकी बहुविषयक संरचना इसे मध्य एशिया में प्राच्य अध्ययन के महत्त्वपूर्ण केंद्रों में स्थान देती है।
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