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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में स्नातक हिंदी पाठ्यक्रम का परिणाम-आधारित विश्लेषण एवं CO-PO मैपिंग

 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में स्नातक हिंदी पाठ्यक्रम का परिणाम-आधारित विश्लेषण एवं CO-PO मैपिंग

के. एम. अग्रवाल कला, वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय, कल्याण (पश्चिम), महाराष्ट्र के हिंदी विभाग का एक अध्ययन


डॉ. मनीष कुमार सी. मिश्रा

एसोसिएट प्रोफेसर, हिंदी विभाग
के. एम. अग्रवाल कला, वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय
कल्याण (पश्चिम), महाराष्ट्र

सारांश

परिणाम-आधारित शिक्षा (Outcome-Based Education: OBE) भारतीय उच्च शिक्षा में पाठ्यक्रम नियोजन, अध्यापन और मूल्यांकन की एक महत्त्वपूर्ण पद्धति के रूप में उभरी है। इसका केंद्र केवल निर्धारित पाठ्यवस्तु की समाप्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में विकसित होने वाले ज्ञान, कौशल, मूल्यों और क्षमताओं की स्पष्ट पहचान है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की परिणाम-आधारित रूपरेखाएँ बहुविषयकता, संप्रेषण, रोजगारपरक कौशल, मूल्यबोध, लचीलापन और अधिगम परिणामों पर विशेष बल देती हैं। प्रस्तुत शोध आलेख में मुंबई विश्वविद्यालय की NEP-आधारित संरचना के अंतर्गत के. एम. अग्रवाल कला, वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय, कल्याण (पश्चिम), महाराष्ट्र के हिंदी विभाग द्वारा वास्तव में अपनाए गए FYBA, SYBA और TYBA हिंदी पाठ्यक्रम का CO-PO मैपिंग के आधार पर विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में 3 = प्रबल, 2 = मध्यम, 1 = निम्न तथा 0 = प्रत्यक्ष संबंध नहीं की चार-स्तरीय मैपिंग पद्धति अपनाई गई है। FYBA में आधुनिक हिंदी गद्य, संभाषण एवं मंच संचालन, सृजनात्मक लेखन तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और हिंदी; SYBA में मध्यकालीन हिंदी काव्य तथा हिंदी भाषा : व्यावहारिक प्रयोग; और TYBA में दो-क्रेडिट हिंदी प्रवासी साहित्य को अध्ययन में सम्मिलित किया गया है। महाविद्यालय द्वारा FYBA Semester I का SEC पाठ्यक्रम अपनाया नहीं गया है, अतः उसे इस संशोधित अध्ययन से पूर्णतः बाहर रखा गया है। विश्लेषण से ज्ञात होता है कि FYBA स्तर पर भाषा-अभिव्यक्ति और आधारभूत साहित्यिक क्षमता प्रमुख है; SYBA में साहित्यिक-सांस्कृतिक व्याख्या, व्यावहारिक भाषा और मूल्यबोध सुदृढ़ होते हैं; जबकि TYBA के प्रवासी साहित्य में वैश्विक नागरिकता, बहुलता, संवाद और मानवीय मूल्यों का विशेष विस्तार दिखाई देता है। संशोधित गणना के अनुसार समग्र औसत मैपिंग शक्ति FYBA में 1.47, SYBA में 2.40 और TYBA में 2.50 है। अध्ययन निष्कर्ष देता है कि व्यवस्थित CO-PO मैपिंग मानविकी पाठ्यक्रम की विकासात्मक संरचना को दृश्य बनाती है और अध्यापन, मूल्यांकन, NAAC/IQAC गुणवत्ता आश्वासन तथा पाठ्यक्रम समीक्षा के लिए उपयोगी उपकरण सिद्ध हो सकती है।

बीज शब्द: परिणाम-आधारित शिक्षा, CO-PO मैपिंग, हिंदी पाठ्यक्रम, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, मुंबई विश्वविद्यालय, प्रवासी साहित्य, भाषा कौशल, वैश्विक नागरिकता, गुणवत्ता आश्वासन

1. प्रस्तावना

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन ने भारतीय स्नातक शिक्षा में पाठ्यक्रम की संकल्पना को व्यापक बनाया है। अब यह अपेक्षा बढ़ी है कि पाठ्यक्रम केवल यह न बताए कि क्या पढ़ाया जाएगा, बल्कि यह भी स्पष्ट करे कि पाठ्यक्रम पूर्ण करने के बाद विद्यार्थी क्या जानेंगे, क्या समझेंगे, किन कौशलों का प्रयोग कर सकेंगे और किन मूल्यों को आत्मसात करेंगे। मानविकी विषयों के लिए यह परिवर्तन विशेष महत्त्व रखता है, क्योंकि साहित्य और भाषा की उपलब्धियाँ अनेक बार प्रत्यक्ष कौशल, सांस्कृतिक संवेदना, आलोचनात्मक सोच और मूल्यबोध के रूप में सामने आती हैं।

हिंदी अध्ययन इस संदर्भ में विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि यह साहित्य, भाषा, संप्रेषण, मीडिया, संस्कृति और सामाजिक अनुभव को एक साथ जोड़ता है। के. एम. अग्रवाल महाविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा अपनाई गई योजना में आधुनिक हिंदी गद्य, संभाषण एवं मंच संचालन, सृजनात्मक लेखन, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, मध्यकालीन हिंदी काव्य, व्यावहारिक हिंदी और प्रवासी साहित्य जैसे पाठ्यक्रम शामिल हैं। इस प्रकार हिंदी का अध्ययन केवल साहित्येतिहास तक सीमित न रहकर भाषा-कौशल, रचनात्मकता, मीडिया साक्षरता, सांस्कृतिक समझ और वैश्विक दृष्टि तक विस्तृत होता है।

प्रस्तुत अध्ययन में CO-PO मैपिंग को केवल प्रत्यायन अथवा दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया नहीं माना गया है। इसे पाठ्यक्रम की आंतरिक संगति को समझने की विश्लेषणात्मक विधि के रूप में उपयोग किया गया है। Course Outcomes किसी विशिष्ट पाठ्यक्रम से अपेक्षित उपलब्धियों को व्यक्त करते हैं, जबकि Programme Outcomes स्नातक स्तर पर विकसित होने वाली व्यापक क्षमताओं का संकेत देते हैं। दोनों के बीच संबंध का विश्लेषण यह बताता है कि पाठ्यक्रम किन क्षमताओं को अधिक बल देता है और किन क्षेत्रों में अतिरिक्त शैक्षणिक हस्तक्षेप की आवश्यकता हो सकती है।

2. नीतिगत एवं वैचारिक आधार

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 समग्र एवं बहुविषयक शिक्षा, संप्रेषण, आलोचनात्मक चिंतन, मूल्य-आधारित शिक्षा, पर्यावरणीय जागरूकता और वैश्विक नागरिकता पर बल देती है। हिंदी भाषा और साहित्य इन उद्देश्यों में अनुशासनात्मक ज्ञान के साथ संप्रेषण क्षमता, सांस्कृतिक साक्षरता और मानवीय मूल्यों के विकास के माध्यम से योगदान कर सकते हैं।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की Learning Outcomes-based Curriculum Framework (LOCF) स्नातक गुणों, कार्यक्रम अधिगम परिणामों और पाठ्यक्रम अधिगम परिणामों के बीच संबंध स्थापित करने का वैचारिक आधार प्रदान करती है। Curriculum and Credit Framework for Undergraduate Programmes (CCFUP) भी NEP 2020 के अनुरूप विद्यार्थी-केंद्रित, लचीली और बहुविषयक क्रेडिट संरचना को आगे बढ़ाती है।

इस अध्ययन में 3 अंक का अर्थ प्रबल प्रत्यक्ष संबंध, 2 का अर्थ मध्यम संबंध, 1 का अर्थ सीमित अथवा अप्रत्यक्ष संबंध और 0 का अर्थ कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। मात्रात्मक अंक गुणात्मक विवेचन का विकल्प नहीं हैं; विशेषतः मानविकी में प्रत्येक मैपिंग के पीछे साहित्यिक, भाषिक, सांस्कृतिक और मूल्यपरक तर्क को समझना आवश्यक है।

3. अध्ययन के उद्देश्य

FYBA, SYBA और TYBA स्तर पर हिंदी विभाग द्वारा अपनाए गए पाठ्यक्रम का दस्तावेजीकरण करना।

पाठ्यक्रम के Course Outcomes का विभागीय Programme Outcomes के साथ संबंध निर्धारित करना।

तीनों स्तरों पर CO-PO संबंधों की प्रकृति और तीव्रता की तुलना करना।

साहित्यिक ज्ञान, भाषा-कौशल, मीडिया दक्षता, सांस्कृतिक समझ, मानवीय मूल्य और वैश्विक नागरिकता की क्रमिक प्रगति का विश्लेषण करना।

पाठ्यक्रम समीक्षा, मूल्यांकन योजना तथा NAAC/IQAC गुणवत्ता आश्वासन में CO-PO मैपिंग की उपयोगिता का परीक्षण करना।

4. शोध-पद्धति

यह अध्ययन वर्णनात्मक-विश्लेषणात्मक केस स्टडी पद्धति पर आधारित है। इसके प्राथमिक स्रोत मुंबई विश्वविद्यालय के वे हिंदी पाठ्यक्रम हैं जिन्हें विभाग ने FYBA, SYBA और TYBA स्तर पर अपनाया है तथा उन्हीं पाठ्यक्रमों के आधार पर तैयार विभागीय CO-PO मैपिंग दस्तावेज हैं। संशोधित अध्ययन में FYBA Semester I SEC को शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि वह महाविद्यालय द्वारा अपनाई गई योजना का हिस्सा नहीं है।

विश्लेषण की मूल इकाई Course Outcome है। प्रत्येक CO को पाँच विभागीय Programme Outcomes से 0-3 पैमाने पर जोड़ा गया। प्रत्येक स्तर पर PO की औसत मैपिंग शक्ति और समग्र औसत की गणना की गई। ये आँकड़े पाठ्यक्रम के अपेक्षित संबंधों के संकेतक हैं; इन्हें विद्यार्थियों के वास्तविक attainment अथवा परीक्षा-परिणाम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

तीनों स्तर NEP के चरणबद्ध क्रियान्वयन से संबंधित हैं। अतः अध्ययन इन्हें एक ही शैक्षणिक वर्ष की योजना के रूप में नहीं, बल्कि विभाग द्वारा अपनाई गई FYBA-SYBA-TYBA पाठ्यक्रमीय प्रगति के रूप में देखता है।


5. विभागीय Programme Outcomes (POs)

PO

क्षेत्र

परिचालनात्मक कथन

PO1

अनुशासनात्मक ज्ञान

हिंदी भाषा और साहित्य की प्रमुख विधाओं, परंपराओं, प्रवृत्तियों और विकास का ज्ञान।

PO2

भाषा, अभिव्यक्ति एवं आलोचनात्मक कौशल

भाषिक अभिव्यक्ति, साहित्यिक विश्लेषण, आलोचनात्मक चिंतन, संप्रेषण और व्यावहारिक भाषा दक्षता का विकास।

PO3

सामाजिक-सांस्कृतिक एवं अंतर-सांस्कृतिक समझ

भारतीय और वैश्विक सांस्कृतिक परंपराओं, विविधता, बहुलता, राष्ट्रीय/लोकतांत्रिक मूल्यों और अंतर-सांस्कृतिक संबंधों की समझ।

PO4

मानवीय, नैतिक एवं सामाजिक उत्तरदायित्व

मानवीय, नैतिक, सामाजिक, पर्यावरणीय और लोकतांत्रिक उत्तरदायित्वों के प्रति संवेदनशीलता।

PO5

सृजनात्मक एवं उत्तरदायी नागरिकता

सृजनात्मकता, मानवीय मूल्य, सह-अस्तित्व, रोजगारपरक क्षमता तथा उत्तरदायी/वैश्विक नागरिकता का विकास।

6. हिंदी विभाग द्वारा अपनाया गया FYBA-SYBA-TYBA पाठ्यक्रम

कक्षा

सेमेस्टर

पाठ्यक्रम

Vertical

क्रेडिट

मुख्य परिणाम-उन्मुखता

FYBA

Sem. I

आधुनिक हिंदी गद्य

Major

4

साहित्यिक ज्ञान, गद्य-बोध, मूल्य

FYBA

Sem. I

संभाषण एवं मंच संचालन

VSC

2

मौखिक अभिव्यक्ति, संप्रेषण, मंच संचालन

FYBA

Sem. II

आधुनिक हिंदी गद्य

Major

4

साहित्यिक समझ, अभिव्यक्ति, मूल्य

FYBA

Sem. II

सृजनात्मक लेखन

VSC

2

रचनात्मकता, चिंतन, अभिव्यक्ति

FYBA

Sem. II

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और हिंदी

SEC

2

मीडिया साक्षरता, लेखन, सामाजिक उत्तरदायित्व

SYBA

Sem. III

मध्यकालीन हिंदी काव्य

Hindi Major

4

काव्य परंपरा, काव्यशास्त्र, भाषा, सांस्कृतिक मूल्य

SYBA

Sem. III

हिंदी भाषा : व्यावहारिक प्रयोग

AEC

2

राजभाषा, व्याकरण, शुद्ध एवं व्यावहारिक हिंदी

TYBA

Sem. V

हिंदी प्रवासी साहित्य

Minor

2

प्रवास, विस्थापन, बहुलता, संवाद, वैश्विक नागरिकता

7. FYBA : साहित्य, संप्रेषण और मीडिया-कौशल की आधारभूमि

संशोधित FYBA संरचना में Semester I का SEC सम्मिलित नहीं है। Semester I में आधुनिक हिंदी गद्य तथा संभाषण एवं मंच संचालन और Semester II में आधुनिक हिंदी गद्य, सृजनात्मक लेखन तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और हिंदी विभाग द्वारा अपनाए गए पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं। यह संरचना साहित्यिक आधार, मौखिक संप्रेषण, सृजनात्मक अभिव्यक्ति और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की कार्यात्मक समझ को एक साथ विकसित करती है।

संशोधित गणना के अनुसार FYBA में PO1 = 1.72, PO2 = 2.22, PO3 = 1.44, PO4 = 0.56 और PO5 = 1.44 है; समग्र औसत 1.47 है। PO2 का सर्वाधिक होना स्वाभाविक है क्योंकि संभाषण, मंच संचालन, सृजनात्मक लेखन और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सभी अभिव्यक्ति और संप्रेषण से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। PO4 अपेक्षाकृत कम है, जिससे स्पष्ट होता है कि प्रथम वर्ष का प्रमुख बल आधारभूत साहित्यिक और भाषिक दक्षता पर है।

8. SYBA : साहित्यिक-सांस्कृतिक गहराई और व्यावहारिक हिंदी

SYBA में चार-क्रेडिट मध्यकालीन हिंदी काव्य और दो-क्रेडिट AEC हिंदी भाषा : व्यावहारिक प्रयोग का संयोजन अनुशासनात्मक गहराई और कार्यात्मक भाषा-दक्षता के बीच संतुलन स्थापित करता है। मध्यकालीन काव्य में कवि, काव्य-परंपरा, छंद, रस, अलंकार और मध्यकालीन भाषा-सौंदर्य का अध्ययन होता है, जबकि AEC पाठ्यक्रम राजभाषा, व्याकरण, वर्तनी, वाक्य-रचना, विराम-चिह्न और व्यावहारिक लेखन पर केंद्रित है।

SYBA में औसत मैपिंग शक्ति PO1 = 2.50, PO2 = 2.62, PO3 = 2.62, PO4 = 1.75 और PO5 = 2.50 है; समग्र औसत 2.40 है। FYBA की तुलना में PO3 और PO5 का सुदृढ़ होना विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इससे संकेत मिलता है कि दूसरे वर्ष में भाषा-कौशल साहित्यिक-सांस्कृतिक व्याख्या और मूल्यबोध के साथ अधिक गहराई से जुड़ता है।

9. TYBA : प्रवासी साहित्य, बहुलता और वैश्विक नागरिकता

TYBA Semester V का दो-क्रेडिट हिंदी प्रवासी साहित्य पाठ्यक्रम हिंदी अध्ययन को राष्ट्रीय सीमाओं से आगे ले जाता है। इसमें घर और परदेश, स्मृति, संघर्ष, विस्थापन, बहुसांस्कृतिकता, प्रवास और वैश्वीकरण जैसे अनुभव केंद्रीय हैं। इसके छह Course Outcomes परिचय और विशेषताओं से आगे बढ़कर प्रवासी रचनाकार की व्यथा, मानवीय वैश्विक मूल्य, वैश्विक नागरिकता, बहुलता और संवाद तक पहुँचते हैं।

TYBA में PO1 = 2.50, PO2 = 2.50, PO3 = 2.67, PO4 = 2.33 और PO5 = 2.50 है; समग्र औसत 2.50 है। PO3 सर्वाधिक है, जो अंतर-सांस्कृतिक समझ और विविधता की केंद्रीयता को दर्शाता है। PO4 और PO5 का उच्च स्तर मानवीय मूल्य, सामाजिक उत्तरदायित्व, सह-अस्तित्व और वैश्विक नागरिकता के स्पष्ट पाठ्यक्रमीय संबंध को रेखांकित करता है ।

10. तुलनात्मक मात्रात्मक विश्लेषण

स्तर

PO1

PO2

PO3

PO4

PO5

समग्र औसत

FYBA

1.72

2.22

1.44

0.56

1.44

1.47

SYBA

2.5

2.62

2.62

1.75

2.5

2.4

TYBA

2.5

2.5

2.67

2.33

2.5

2.5

चित्र 1 : FYBA-SYBA-TYBA में औसत CO-PO मैपिंग शक्ति का तुलनात्मक स्वरूप

तुलनात्मक आँकड़े स्पष्ट विकासात्मक प्रवृत्ति दिखाते हैं। समग्र औसत FYBA में 1.47 से बढ़कर SYBA में 2.40 और TYBA में 2.50 हो जाता है। इसका अर्थ यह नहीं कि उच्च कक्षा का पाठ्यक्रम ‘बेहतर’ है; बल्कि उच्च स्तर पर अनेक Programme Outcomes का एकीकरण अधिक जटिल और सघन होता जाता है।

FYBA में PO2 सबसे मजबूत है। SYBA में PO2 के साथ PO3 लगभग समान रूप से मजबूत हो जाता है। TYBA में PO3 सर्वाधिक हो जाता है। PO4 में सबसे तीव्र वृद्धि दिखाई देती है—FYBA के 0.56 से SYBA में 1.75 और TYBA में 2.33। यह क्रम दर्शाता है कि नैतिक, मानवीय और सामाजिक उत्तरदायित्व उच्च स्तर पर अधिक स्पष्ट रूप से पाठ्यक्रम में समाहित होते हैं।

11. प्रमुख निष्कर्ष

  1. अपनाया गया हिंदी पाठ्यक्रम आधारभूत साहित्यिक एवं संप्रेषण कौशल से उन्नत सांस्कृतिक, मूल्यपरक और वैश्विक अधिगम की ओर क्रमिक प्रगति दिखाता है।

  2. FYBA में PO2 प्रमुख है क्योंकि संप्रेषण, मंच संचालन, सृजनात्मक लेखन और मीडिया-अभिव्यक्ति का स्पष्ट स्थान है।

  3. SYBA में मध्यकालीन हिंदी काव्य और व्यावहारिक हिंदी का संयोजन साहित्यिक गहराई तथा कार्यात्मक भाषा-दक्षता के बीच संतुलन बनाता है।

  4. TYBA का हिंदी प्रवासी साहित्य अंतर-सांस्कृतिक समझ, बहुलता, संवाद, मानवीय मूल्यों और वैश्विक नागरिकता के लिए सबसे स्पष्ट मंच प्रदान करता है।

  5. समग्र औसत मैपिंग FYBA 1.47 से SYBA 2.40 और TYBA 2.50 तक बढ़ती है।

  6. PO4 प्रथम वर्ष में अपेक्षाकृत कम प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित है, पर SYBA और TYBA में उसका योगदान उल्लेखनीय रूप से बढ़ता है।

  7. CO-PO मैपिंग मानविकी में निहित सहानुभूति, सांस्कृतिक समझ और उत्तरदायी नागरिकता जैसे परिणामों को संरचित रूप में दृश्य बनाती है।

12. अध्यापन, मूल्यांकन और गुणवत्ता आश्वासन के लिए निहितार्थ

CO-PO मैपिंग का सबसे उपयोगी पक्ष यह है कि यह अध्यापन और मूल्यांकन को पाठ्यक्रम परिणामों के अनुरूप बनाने के लिए प्रेरित करती है। मंच संचालन का मूल्यांकन केवल लिखित परीक्षा से नहीं, बल्कि प्रस्तुति से; सृजनात्मक लेखन का मूल्यांकन मौलिक लेखन से; मीडिया पाठ्यक्रम का मूल्यांकन अनुप्रयुक्त लेखन से; और प्रवासी साहित्य का मूल्यांकन तुलनात्मक चर्चा, चिंतनपरक लेखन तथा सांस्कृतिक विश्लेषण से अधिक प्रभावी रूप में किया जा सकता है।

आंतरिक मूल्यांकन में प्रकल्प, परिसंवाद, प्रस्तुति, रचनात्मक कार्य और कौशल-वर्धन गतिविधियों को विशिष्ट COs से जोड़ा जा सकता है। आगे चलकर विद्यार्थी-प्रदर्शन के आधार पर वास्तविक attainment की गणना भी की जा सकती है। प्रस्तुत अध्ययन केवल curriculum mapping तक सीमित है और attainment को परीक्षा-परिणाम के रूप में प्रस्तुत नहीं करता।

NAAC और IQAC की दृष्टि से CO-PO प्रणाली पाठ्यक्रम नियोजन, परिणाम-उन्मुखता, शैक्षणिक संगति और समीक्षा का साक्ष्य देती है। इसका उद्देश्य केवल दस्तावेज तैयार करना नहीं, बल्कि यह पूछना भी होना चाहिए कि कौन-से परिणाम पर्याप्त रूप से समर्थित हैं, किन परिणामों को अतिरिक्त अवसर चाहिए और क्या मूल्यांकन वास्तव में घोषित COs को मापता है।

13. चर्चा : NEP 2020 में हिंदी अध्ययन की नई प्रासंगिकता

यह अध्ययन इस धारणा को चुनौती देता है कि परिणाम-आधारित शिक्षा साहित्य को केवल मापनीय कौशलों तक सीमित कर देती है। उचित मैपिंग से यह दिखाया जा सकता है कि मध्यकालीन काव्य भाषा-इतिहास, सौंदर्यबोध, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक समझ विकसित करता है; प्रवासी साहित्य सहानुभूति, अंतर-सांस्कृतिक क्षमता, बहुलता और वैश्विक नागरिकता को सुदृढ़ करता है; और आधुनिक गद्य सामाजिक एवं मानवीय मूल्यों को विकसित कर सकता है।

साथ ही, कौशल-आधारित पाठ्यक्रम हिंदी को समकालीन संप्रेषण से जोड़ते हैं। संभाषण, मंच संचालन, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सृजनात्मक लेखन और व्यावहारिक हिंदी यह सिद्ध करते हैं कि हिंदी विभाग सांस्कृतिक ज्ञान के साथ हस्तांतरणीय और रोजगारपरक कौशल भी विकसित कर सकता है।

अध्ययन की एक महत्त्वपूर्ण पद्धतिगत विशेषता यह है कि विश्वविद्यालय के Course Outcomes और विभागीय Programme Outcomes के बीच स्पष्ट भेद रखा गया है। जहाँ पाठ्यक्रम में COs दिए गए हैं, उन्हें आधार बनाया गया है; वहीं सामान्य PO सूची अनुपस्थित होने पर विभागीय विश्लेषणात्मक PO framework का उपयोग किया गया है। यह पारदर्शिता मैपिंग की विश्वसनीयता बढ़ाती है।

14. सुझाव

  1. FYBA, SYBA और TYBA के लिए एक समान अनुमोदित विभागीय PO framework बनाए रखा जाए।

  2. मौखिक संप्रेषण, मीडिया लेखन, सृजनात्मक लेखन और साहित्यिक विश्लेषण के लिए CO-विशिष्ट rubrics तैयार किए जाएँ।

  3. पर्याप्त विद्यार्थी-डेटा उपलब्ध होने पर direct और indirect attainment measures विकसित किए जाएँ।

  4. विद्यार्थी portfolio के माध्यम से भाषा-अभिव्यक्ति, रचनात्मकता और मीडिया-कौशल की प्रगति दर्ज की जाए।

  5. FYBA स्तर पर PO4 को उपयुक्त साहित्यिक/मीडिया assignments के माध्यम से अधिक प्रत्यक्ष समर्थन दिया जाए।

  6. CO-PO matrices की वार्षिक विभागीय समीक्षा हो और प्रत्येक परिवर्तन का शैक्षणिक औचित्य दर्ज किया जाए।

15. अध्ययन की सीमाएँ एवं भावी संभावनाएँ

यह पाठ्यक्रम-स्तरीय केस स्टडी है; यह वास्तविक विद्यार्थी attainment का मापन नहीं करती। संख्यात्मक मान अपेक्षित पाठ्यक्रमीय संबंधों की शक्ति दर्शाते हैं। अध्ययन केवल के. एम. अग्रवाल महाविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा अपनाई गई योजना पर केंद्रित है; अन्य महाविद्यालयों में verticals अथवा पाठ्यक्रम संयोजन अलग हो सकते हैं। भविष्य में CO-wise विद्यार्थी प्रदर्शन, rubrics, प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष attainment, विद्यार्थी प्रतिक्रिया और बहु-महाविद्यालयीय तुलनात्मक अध्ययन के माध्यम से इसे विस्तृत किया जा सकता है।

16. निष्कर्ष

के. एम. अग्रवाल महाविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा अपनाए गए FYBA-SYBA-TYBA पाठ्यक्रम का CO-PO विश्लेषण यह स्पष्ट करता है कि परिणाम-आधारित पाठ्यक्रम अध्ययन भाषा और साहित्य शिक्षा में सार्थक रूप से लागू किया जा सकता है। संशोधित FYBA संरचना में Semester I SEC को हटाने के बाद भी पाठ्यक्रम आधुनिक गद्य, संभाषण, मंच संचालन, सृजनात्मक लेखन और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से मजबूत आधार तैयार करता है। SYBA में साहित्यिक-सांस्कृतिक गहराई और व्यावहारिक हिंदी का समन्वय होता है, जबकि TYBA प्रवासी साहित्य बहुलता, संवाद, मानवीय मूल्यों और वैश्विक नागरिकता की दिशा में पाठ्यक्रम को आगे बढ़ाता है।

समग्र औसत मैपिंग FYBA में 1.47, SYBA में 2.40 और TYBA में 2.50 है। इन संख्याओं से अधिक महत्त्वपूर्ण वह पाठ्यक्रमीय कथा है जो इनके पीछे दिखाई देती है—हिंदी शिक्षा साहित्यिक, भाषिक, व्यावहारिक, सांस्कृतिक और नागरिक क्षमताओं को एक साथ विकसित कर सकती है। व्यवस्थित CO-PO मैपिंग गुणवत्ता आश्वासन, अध्यापन-मूल्यांकन संरेखण और सतत पाठ्यक्रम सुधार के लिए एक प्रभावी साधन बन सकती है।

संदर्भ

  1. भारत सरकार, शिक्षा मंत्रालय. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020. नई दिल्ली, 2020.

  2. University Grants Commission. Learning Outcomes-based Curriculum Framework for Undergraduate Education. New Delhi: UGC, 2020.

  3. University Grants Commission. Curriculum and Credit Framework for Undergraduate Programmes. New Delhi: UGC.

  4. University of Mumbai, Board of Studies in Hindi. FYBA Hindi Syllabus, Semester I and II, NEP 2020.

  5. University of Mumbai, Board of Studies in Hindi. SYBA Hindi Major Syllabus, Semester III: मध्यकालीन हिंदी काव्य, NEP 2020, Academic Year 2025-26.

  6. University of Mumbai, Board of Studies in Hindi. SYBA AEC Syllabus, Semester III: हिंदी भाषा : व्यावहारिक प्रयोग, NEP 2020, Academic Year 2025-26.

  7. University of Mumbai, Board of Studies in Hindi. TYBA Major-2 (Minor) Hindi, Semester V: हिंदी प्रवासी साहित्य / Hindi Diasporic Literature, 2 Credits, Academic Year 2026-27.

  8. हिंदी विभाग, के. एम. अग्रवाल कला, वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय, कल्याण (पश्चिम). FYBA, SYBA एवं TYBA CO-PO Mapping Documents. विभागीय शैक्षणिक अभिलेख

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