सॉफ्ट पावर से पहले: भारतीय सिनेमा, सांस्कृतिक स्मृति और उज़्बेक कल्पना में भारत की निर्मिति
डॉ. मनीष कुमार सी. मिश्रा
एसोसिएट प्रोफेसर, हिन्दी विभाग, के. एम. अग्रवाल कला, वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय, कल्याण (पश्चिम), महाराष्ट्र, भारत
ई-मेल: manishmuntazir@gmail.com
सारांश
सोवियत काल से ही भारत और उज़्बेकिस्तान के सांस्कृतिक संबंधों में भारतीय सिनेमा का विशिष्ट स्थान रहा है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों में ‘सॉफ्ट पावर’ और ‘सांस्कृतिक कूटनीति’ जैसी अवधारणाओं के व्यापक प्रचलन से बहुत पहले हिन्दी फिल्मों ने एक अनौपचारिक सांस्कृतिक सेतु का निर्माण किया, जिसके माध्यम से उज़्बेक दर्शकों ने भारतीय समाज, परिवार, संगीत, भावनाओं और दैनिक जीवन की छवियों से परिचय प्राप्त किया। यह शोधपत्र उज़्बेकिस्तान में भारत की सांस्कृतिक स्मृति और छवि के निर्माण में भारतीय सिनेमा की भूमिका का अध्ययन करता है तथा सिनेमाई ग्रहण को अंतरसांस्कृतिक संचार के व्यापक संदर्भ में रखता है। ऐतिहासिक अध्ययन, रिसेप्शन स्टडीज़ और सांस्कृतिक विश्लेषण को संयोजित करने वाली गुणात्मक एवं अंतर्विषयी पद्धति के माध्यम से सोवियत काल से उत्तर-सोवियत और समकालीन उज़्बेकिस्तान तक भारतीय सिनेमा के प्रसार और ग्रहण का विश्लेषण किया गया है। राज कपूर से जुड़ी सांस्कृतिक स्मृति, 2024 में ताशकंद में आयोजित उनकी जन्मशती संबंधी अकादमिक गतिविधियों तथा बदलते मीडिया परिवेश पर विशेष ध्यान दिया गया है। शोध का तर्क है कि उज़्बेकिस्तान में भारतीय सिनेमा की दीर्घकालिक लोकप्रियता और स्मृति औपचारिक सॉफ्ट-पावर रणनीतियों से पहले विकसित हुई सांस्कृतिक निकटता का महत्त्वपूर्ण उदाहरण है। यह अनुभव भारत-मध्य एशिया सांस्कृतिक संबंधों की ऐतिहासिक नींव और उनके समकालीन विकास को समझने के लिए एक उपयोगी परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत करता है।
मुख्य शब्द: भारतीय सिनेमा; उज़्बेकिस्तान; सांस्कृतिक स्मृति; अंतरसांस्कृतिक संचार; लोकप्रिय संस्कृति
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