सहमे पत्ते खिले फूल हैं
महका गुलशन मौसम नम
खिलता चेहरा आखें रिक्त
रुंधा गला बातों मे सख्त
थाली सजी पूजा के फूल
सुखा पत्ता पैर की धुल
खुशियों का मौसम गम की चिंगारी
सीने में सिमटी बाहें वो प्यारी
सहमे पत्ते खिले फूल हैं
महका गुलशन मौसम नम
Monday, 18 October 2010
सहमे पत्ते खिले फूल हैं
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hindi kavita,
jindagi
[ बादलों की प्यास हूँ मै ,
जो पूरी न हुयी ,वो आस हूँ मै ;
फूलों की घाटी का ,
दल से बिछडा गुलाब हूँ मै ;
सुबह का पूरा न हुवा ;
वो अधुरा ख्वाब हूँ मै / ]====
{ तजुर्बा उम्र का है या उम्र तजुर्बे की ?
कैसे कहें की बात सच की है या सपने की ?
जो दिया जिंदगी ने समेट लिया ,
जो कहा अपनो ने सहेज लिया /
रास्ते कहाँ जायेंगे जानता नहीं हूँ मै;
खुदा की राह है,मंजिल तलाशता नहीं हूँ मै / }
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( मेरी मोहब्बत से मुझको शिकायत है ,
ऐसे न कर सका की उनको भी आहट हो / )
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