जाने क्यों तुझे मैंने फिर पुकारा नहीं,
मुश्किल ये कि तेरे बिन गुज़ारा नहीं।
सफ़र लंबा है अभी बड़ी दूर जाना है
अब किसे आवाज़ दूँ कोई सहारा नहीं।
वो अब किसी और का हुआ तो क्या हुआ
मैं इश्क़ की बाज़ी अभी तक हारा नहीं।
डॉ मनीष कुमार मिश्रा
के एम अग्रवाल महाविद्यालय
कल्याण पश्चिम